यूपी में 10 उपचुनाव को लेकर भाजपा के अंदर भी राजनीति गरमाई हुई है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की अगुआई में असंतुष्ट गुट ने लोकसभा चुनाव में राज्य में मिली करारी हार के लिए योगी को जिम्मेदार ठहराते हुए हटाने की मुहिम चल रही है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि भाजपा आलाकमान यानी मोदी-शाह ने असंतुष्टों को उपचुनाव के नतीजे आने तक रुकने को कहा है। इस बीच योगी ने अपनी राजनीति को आगे बढ़ाते हुए खुद को कट्टर हिन्दू नेता के रूप में स्थापित करने की मुहिम तेज कर दी है। हाल के उनके कई फैसले इस तरफ इशारा भी करते हैं।
उपचुनाव कुरुक्षेत्र बनाः लोकसभा चुनाव के बाद खाली फूलपुर, गाजियाबाद, मझवां, खैर, मीरापुर, कुंदरकी, करहल, मिल्कीपुर, कटेहरी और सीसामऊ सीटों पर उपचुनाव होना है। सपा के चार विधायकों के सांसद और एक विधायक के दोषी ठहराए जाने के कारण पांच सीटें खाली हुई हैं, जबकि भाजपा के कोटे से तीन विधायक सांसद बन गए हैं। इसके अलावा एक सीट आरएलडी विधायक के सांसद बनने और एक सीट निषाद पार्टी के विधायक के बीजेपी से सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई है। इस प्रकार, पांच सीटें सपा के कोटे की हैं, जबकि पांच सीटें भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि उपचुनाव को कितना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीएम योगी आदित्यनाथ को अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा और अंबेडकरनगर की कटेरी विधानसभा की जिम्मेदारी मिली है। 2022 में ये दोनों सीटें सपा ने जीती थीं। कठेरी से लालजी वर्मा विधायक चुने गए थे, जबकि मिल्कीपुर से अवधेश प्रसाद जीते थे, लेकिन अब दोनों सपा विधायक सांसद बन गए हैं। एसपी कोटे की इन दोनों सीटों पर कमल खिलाने की जिम्मेदारी सीएम योगी को सौंपी गई है। मिल्कीपुर सीट के राजनीतिक अस्तित्व में आने के बाद से भाजपा ने इस पर केवल दो बार जीत हासिल की है, एक बार 1991 में और फिर 2017 में। 1991 में भाजपा केवल एक बार कटेरी सीट जीतने में सफल रही।