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निलंबन के ख़िलाफ़ पूरी मज़बूती से लड़ूँगा, आईपीएस जसवीर ने कहा

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सरदार जसवीर सिंह ने शासन द्वारा ख़ुद को निलंबित किए जाने को अपमानित करने वाला क़दम बताया है। जसवीर ने ‘सत्य हिन्दी’ से  बातचीत में कहा कि उनका निलंबन नाजायज़ है और वह इसके ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई लड़ेंगे। 

बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने एडीजीपी (रूल्स एंड मैन्युअल) सरदार जसवीर सिंह को 14 फ़रवरी को निलंबित कर दिया था। जसवीर पर न्यूज़ वेबसाइट 'हफ़िंगटन पोस्ट' को इंटरव्यू देने का आरोप लगाकर सरकार ने उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी। जसवीर ने यह इंटरव्यू बीती 30 जनवरी को दिया था। जसवीर के निलंबन की पुष्टि राज्य के प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार ने भी की है। 
  • उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले हफ़्ते ही 'हफ़िंगटन पोस्ट' को इंटरव्यू दिए जाने पर जसवीर सिंह से स्पष्टीकरण माँगा था। लेकिन जवाब न दिए जाने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया। जसवीर पर सेवा नियमावली का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। 
उत्तर प्रदेश शासन के मुताबिक़, बिना बताए अवकाश पर चले जाना भी उनके निलंबन की एक वजह है। जसवीर सिंह के निलंबन की चिट्ठी मीडिया में भी नहीं आई, बल्कि उन्हें गुपचुप तरीके़ से ई-मेल के जरिये इसकी सूचना भेजी गई। फिलहाल जसवीर सिंह अपनी बीमार माँ के इलाज के लिए गए हुए हैं और मीडिया में खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। बड़े पुलिस अधिकारी भी इस मामले पर कुछ नहीं कहना चाहते।
जसवीर सिंह ने फ़ोन पर हुई बातचीत में ‘सत्य हिन्दी’ से कहा कि इंटरव्यू में जो कुछ भी उन्होंने कहा है वह उनके व्यक्तिगत विचार हैं। न्यूज़ वेबसाइट में जसवीर सिंह के हवाले से लिखा गया था कि वह एक ऐसे आईपीएस ऑफ़िसर हैं जो सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकते।
जसवीर के मुताबिक़, वह विभिन्न मंचों पर सरकारों के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ बोलते रहे हैं और आगे भी बोलते रहेंगे। जसवीर सिंह ने इंटरव्यू में बताया था कि राजनीतिक दलों का खिलौना न बनने पर किस तरह उनका उत्पीड़न किया गया।

योगी के ख़िलाफ़ की थी कार्रवाई 

1992 बैच के आईपीएस अधिकारी जसवीर सिंह की उत्तर प्रदेश पुलिस में बेहद ईमानदार और राजनीतिक दबाव के आगे न झुकने वाले ऑफ़िसर की छवि है। 2002 में एसपी महराजगंज रहते समय उन्होंने उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ रासुका की कार्रवाई प्रारम्भ की थी। जिसके एक दिन बाद ही उनका तबादला कर दिया गया था। उस समय योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से बीजेपी के सांसद थे।

राजा भैया को किया था गिरफ़्तार 

पंजाब के होशियारपुर के रहने वाले जसवीर ने प्रतापगढ़ का एसपी रहते हुए बाहुबली विधायक राजा भैया को गिरफ़्तार किया था। ऐसा करके वह तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की आँख का तारा बन गए थे। लेकिन 2007 में मुज़फ़्फ़रनगर का एसएसपी रहते हुए जसवीर ने कथित तौर पर मायावती की सिफ़ारिश वाले थानेदारों की पोस्टिंग करने से मना कर दिया था, जिसके बाद उन्हें हटा दिया गया। 

जसवीर ने कहा कि उन्हें ईमानदारी से काम करने की सज़ा भुगतनी पड़ी। जसवीर को सरकारों ने डेढ़ दर्जन से ज़्यादा जाँचों में उलझा दिया और सपा, बसपा और बीजेपी तीनों ही सरकारों में उनका जमकर उत्पीड़न हुआ।

जी-हुजूरी नहीं की, हुआ उत्पीड़न

मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए भी जसवीर सिंह को ग़ैर-ज़रूरी पोस्टिंग मिली। जसवीर के मुताबिक़, उन्होंने नेताओं की जी-हुजूरी नहीं की इसलिए वह लगातार उत्पीड़न के शिकार हुए। अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए जसवीर अधिकतर समय स्टडी लीव पर थे। 2017 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही वह लौटे और उन्हें एडीजीपी (होमगार्ड) बनाया गया। यहाँ उन्होंने अपने ही डीजीपी सूर्य कुमार शुक्ला और सूबे के होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया।

होमगार्ड विभाग में भ्रष्टाचार पर लिखा पत्र 

जसवीर सिंह ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखा जिसने होमगार्ड विभाग में किए जा रहे भ्रष्टाचार की पोल खोल दी। इस पत्र से विभाग में हड़कंप मच गया। जसवीर सिंह के इस पत्र में पैसा लेकर होमगार्ड्स की ड्यूटी लगाए जाने और उनका इस्तेमाल निजी नौकरों की तरह किए जाने सहित कई तरह की बेईमानी का ज़िक्र किया गया था। उनके पत्र ने विभाग में हड़कंप मचा दिया। 

होमगार्ड विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर लिखे पत्र में सीधे योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर और डीजीपी सूर्य प्रकाश शुक्ला पर उंगली उठाई गई। आनन-फानन में जसवीर सिंह को छुट्टी के दिन ही जबरन पद से हटा दिया गया।
  • एडीजीपी (होमगार्ड) से हटाए जाने के बाद जसवीर को लखनऊ में एडीजीपी (रूल्स एंड मैनुअल) के पद पर तैनाती दी गई। यहाँ एक बहुत छोटे से कमरे में किताबों के ढेर के बीच उन्हें सिर्फ़ क़ानून की किताबें पढ़ने का काम दिया गया। बता दें कि स्टडी लीव पर रह चुके जसवीर सिंह ने एलएलएम की पढ़ाई की थी और गोल्ड मैडल हासिल किया था।

बेईमानी के ख़िलाफ़ बोलते रहे हैं जसवीर

अविवाहित जसवीर सिंह के पिता आर्मी में लांसनायक रहे हैं। लखनऊ में वह अपनी माँ के साथ रहते हैं। जसवीर सिंह को जान से मारने की  धमकी के चलते वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी जो कुछ साल पहले हटा ली गई थी। जसवीर सिंह 2008 में अपनी संपत्ति को सार्वजनिक करने वाले पहले आईपीएस अधिकारी बने थे। उन्होंने एक एंटी करप्शन मंच में भी सहभागिता की थी। जसवीर सिंह खुले मंच से सरकारों की बेईमानी के ख़िलाफ़ बोलते रहे हैं। 

जसवीर कहते हैं कि ज़्यादातर मुख्यमंत्री ईमानदार को नहीं बल्कि ‘लिफाफे’ वाले एसपी को पसंद करते हैं। 2017 में जसवीर ने फ़ायर सेफ़्टी विभाग में आईजी के पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार का खुलासा किया था।
जसवीर 2002 में खाद्यान्न घोटाले की जाँच को लेकर भी चर्चा में रहे। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी इस घोटाले की जाँच करवाना चाहते थे। जसवीर सिंह ने ही इस घोटाले की जाँच की थी और अमर सिंह और राजा भैया तक इसकी तपिश पहुँची थी।

कई बार रोका गया प्रमोशन

जसवीर ने काले धन के ख़िलाफ़ भी याचिका दायर की थी। उन्होंने टोल के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ भी आवाज़ उठाई। कई बार जसवीर के प्रमोशन रोक दिए गए। उनपर दो बार जानलेवा हमला भी हो चुके हैं। जसवीर खुले मंच से राजा भैया जैसे बाहुबली विधायक को गुंडा कहते रहे। रिटायर्ड डीएसपी जे. आर. जोशी के मुताबिक़,  जसवीर सिंह एक आदर्श पुलिस ऑफ़िसर हैं उन्होंने पुलिस के भीतर रहकर पुलिस के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का साहस किया। 

  • जसवीर सिंह के अनुसार, ‘मेरी फ़ाइल पर 5 बार लिखा गया कि मुझे बर्खास्त कर दिया जाए क्योंकि मेरा मानसिक संतुलन ठीक नहीं है लेकिन मैं लगातार ईमानदारी का हथौड़ा चलाना चाहता हूँ। मैं लगातार पुलिस विभाग में राजनीतिक सहयोग से होने वाले भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ बोलता रहूँगा।’
निलबंन के बाद भी जसवीर सिंह के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं। जसवीर ने कहा कि उन्होंने क़ानून की पढ़ाई की है। वह अपने कर्तव्य और सेवा नियमों को अच्छी तरह समझते हैं और निलंबन के ख़िलाफ़ वह अपना पक्ष मज़बूती से रखेंगे।
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क़मर वहीद नक़वी
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