राहुल गांधी ने दावा किया है कि पिछले 10 साल में देशभर में 152 पेपर लीक हुए, जिससे करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए, लेकिन अब तक एक भी दोषी को सज़ा नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश का शिक्षा तंत्र पेपर लीक और भ्रष्टाचार की गिरफ्त में है और मेहनत करने वाले करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में मोदी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक को लेकर बड़ा हमला बोला। छात्रों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में ईमानदारी की जगह भ्रष्टाचार ने ले ली है।
ताज़ा ख़बरें

'एजुकेशन सिस्टम पर पेपर लीक का कब्जा'

राहुल ने कहा, 'देश में पेपर लीक ने एजुकेशन सिस्टम पर कब्जा कर लिया है। मेहनत करने वाले छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ हो रहा है।' कांग्रेस ने कहा कि देश में 'पेपर लीक उद्योग' चल रहा है और इसे खत्म करने के लिए व्यापक सुधार की जरूरत है।

कांग्रेस नेता ने प्रतियोगी परीक्षाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि देश में करोड़ों युवा सरकारी नौकरी पाने के लिए वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन सफलता बहुत कम लोगों को मिलती है। उन्होंने कहा, 'देश में लगभग 9 करोड़ उम्मीदवार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 6 लाख युवाओं को सफलता मिलती है। यानी 150 उम्मीदवारों में सिर्फ एक को नौकरी मिलती है।' उन्होंने कहा कि यह केवल प्रतियोगिता का सवाल नहीं है, बल्कि व्यवस्था की खामियों का भी परिणाम है।

'पेपर लीक उद्योग खत्म करना होगा'

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देश में पेपर लीक अब एक संगठित समस्या बन चुकी है। पार्टी का कहना है कि यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई तो लाखों युवाओं का भविष्य लगातार खतरे में रहेगा।

'दो रास्ते हैं- ईमानदारी या भ्रष्टाचार'

राहुल गांधी ने कहा कि आज युवाओं के सामने दो रास्ते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि पहला रास्ता ईमानदारी और मेहनत का है और दूसरा रास्ता भ्रष्टाचार और पेपर लीक का है। उन्होंने कहा, 'देश के 99 प्रतिशत छात्र ईमानदारी से मेहनत करते हैं। लेकिन एक प्रतिशत लोग सिस्टम का दुरुपयोग कर पेपर लीक और भ्रष्टाचार के जरिए आगे बढ़ जाते हैं। इसका नुकसान करोड़ों मेहनती छात्रों को उठाना पड़ता है।'

राहुल गांधी ने कहा कि आज का छात्र सिर्फ बेरोजगारी से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से लड़ रहा है। उन्होंने युवाओं के सामने चार बड़ी समस्याएं गिनाईं-
  • शिक्षा पर लगभग 9 लाख रुपये तक का खर्च
  • रोजगार के अधिकांश अवसर बंद होना
  • 150 उम्मीदवारों में सिर्फ एक को सफलता मिलना
  • बार-बार होने वाले पेपर लीक
राहुल के मुताबिक यह स्थिति युवाओं के भविष्य को असुरक्षित बना रही है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी केवल छात्र नहीं, पूरा परिवार करता है। उन्होंने कहा, 'एक छात्र पांच साल तक अपनी सामान्य जिंदगी छोड़कर तैयारी करता है। इस दौरान परिवार करीब 9 लाख रुपये तक खर्च करता है। कई परिवार अपनी जमा पूंजी लगा देते हैं और कर्ज तक लेते हैं। ऐसे में अगर पेपर लीक हो जाए तो सिर्फ परीक्षा नहीं, पूरे परिवार के सपने टूट जाते हैं।' उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर करोड़ों युवाओं को केवल सरकारी नौकरियों के लिए इतनी कठिन प्रतिस्पर्धा क्यों करनी पड़ रही है।

आत्महत्या करने वाली छात्रा के पिता से मिले

कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी की मुलाकात नीट परीक्षा की तैयारी करने वाली रिया कुमारी के पिता राजेश मल्ल से भी हुई। कांग्रेस का दावा है कि रिया कुमारी ने NEET पेपर लीक से जुड़े तनाव के कारण आत्महत्या कर ली थी। मुलाकात के दौरान राजेश मल्ल भावुक हो गए और उन्होंने राहुल गांधी से कहा, 'जो मेरी बेटी के साथ हुआ, वह किसी और बेटी के साथ न हो। राहुल जी, आप संसद में हमारी आवाज उठाइए।'

राहुल गांधी ने परिवार को भरोसा दिलाया कि छात्रों के अधिकार और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक उठाया जाएगा।

कार्यक्रम में शामिल होने से पहले राहुल गांधी ने कहा था कि राज्य में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UKSSSC की परीक्षाओं में एक ऐसा तंत्र विकसित हो गया है, जहां पटवारी और लेखपाल जैसी सरकारी नौकरियां योग्यता से नहीं, बल्कि अपराधियों द्वारा तय की गई कीमतों पर मिल रही हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह स्थिति युवाओं के साथ अन्याय है और इससे उनकी मेहनत और सपनों पर सीधा हमला हो रहा है।

उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार ने नकल विरोधी कानून तो बना दिया, लेकिन इसका कोई असर दिखाई नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया, जबकि परीक्षा के प्रश्नपत्र लगातार बाजार में बिकते रहे।

कोटा से शुरू हुआ अभियान

राहुल का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम राजस्थान के कोटा से शुरू हुआ है। कार्यक्रम में राहुल गांधी नये तेवर में दिखे। बिल्कुल वो पुराने और पारंपरिक नेता वाले अंदाज़ से अलग। नेता वाला भाषण नहीं। आकर्षक प्रजेंटेशन। एक टीचर, छात्र और एक्टिविस्ट की तरह। कोटा देश का कोचिंग हब माना जाता है, जहां हर साल लाखों छात्र IIT, NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। कार्यक्रम में हजारों छात्र-छात्राएं शामिल हुए। माहौल उत्सव जैसा था- बड़े स्टेज पर रैप गाने बज रहे थे, छात्र हेडबैंड और प्लेकार्ड लेकर पहुंचे थे। राहुल गांधी ने कहा, 'भारत की शिक्षा व्यवस्था सिलेक्शन सिस्टम नहीं, बल्कि रिजेक्शन सिस्टम बन गई है। यह छात्रों को कुचल रही है, दबा रही है। बार-बार पेपर लीक होने से छात्रों पर बहुत दबाव पड़ रहा है, जो पूरे देश के भविष्य के लिए ख़तरनाक़ है।'

और फिर उसी कड़ी में राहुल ने ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया। तब जेन ज़ी को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा था, "अगर पेपर लीक, परीक्षा से जुड़ी समस्याओं या ज़्यादा फ़ीस की वजह से आपको परेशानी हुई है; अगर इस शिक्षा व्यवस्था ने आपके सपने तोड़ दिए हैं; अगर आपके परिवार ने आपकी पढ़ाई में अपनी ज़िंदगी भर की बचत लगा दी है, तो 'छात्रों की गूँज' आपकी आवाज़ है। यह सिर्फ़ एक कैंपेन नहीं है - यह आपकी माँगों को सीधे सरकार तक पहुँचाने का एक प्लेटफ़ॉर्म है। सस्ती शिक्षा। निष्पक्ष परीक्षाएँ। सम्मानजनक रोज़गार। इस आंदोलन से जुड़ें, अपने विचार साझा करें। पिटीशन पर साइन करें।"