आज़ादी और गाँधी के बारे में कंगना की आपत्तिजनक टिप्पणियों को किस तरह से लिया जाए? इसे उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में देखा जाए या फिर हेट स्पीच के तौर पर? क्या वे उन करोड़ों भारतीयों की भावनाओं को आहत नहीं कर रहीं जो गाँधी को राष्ट्रपिता मानते हैं? क्या उन्हें अनदेखा या माफ़ किया जा सकता है?










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