नीतीश कुमार द्वारा आरक्षण बढ़ाने का प्रस्ताव क्या राष्ट्रीय राजनीति को बदल देगा? क्या इससे हिंदुत्व की राजनीति की हवा निकल जाएगी? पहले से ही जातिगत जनगणना के सवाल पर उलझी बीजेपी के लिए क्या ये घोषणा एक बड़ी आफ़त बन जाएगी?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























