आज़ादी का जश्न तो मनाया, लेकिन आज़ादी की कीमत भूल गए? स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट का फैसला मज़ाक नहीं है? ऐसे चलेगी आज़ादी जिसके लिए लोगों ने सीने पे गोलियां खाईं? आलोक जोशी की टिप्पणी।
लेखक सीएनबीसी आवाज़ के पूर्व संपादक हैं, आर्थिक मामलाों के विशेषज्ञ हैं और समसामयिक विषयों पर लिखते रहते हैं।





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