पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार की सख्त कार्रवाई ने वाघा-अटारी बॉर्डर पर परिवारों को बिछड़ने पर मजबूर किया। इलाज, परिवार और सपनों के लिए आए पाकिस्तानी नागरिक, जैसे 17 वर्षीय मोहम्मद अयान और 85 वर्षीय मोहम्मद बी, आंसुओं के साथ लौट रहे हैं। तीन दिनों में 537 नागरिक लौटे। वाघा बॉर्डर अब जज्बातों और निराशा से भरा है। आतंकवादियों को कोसते हुए लोग पूछते हैं, उनकी क्या गलती?
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