देश भर में काले कोट में वकील खाकी वर्दी पहने पुलिसवालों को ढूंढ-ढूंढकर पीट रहे हैं। दशकों पहले किरन बेदी द्वारा दिल्ली के वकीलों पर कराये गये लाठीचार्ज के बाद इस बार यह विवाद उससे ज़्यादा तूल ले गया है। क़ानून के दो प्रमुख स्तंभ एक-दूसरे के ख़िलाफ़ सड़क पर हैं। देखिये, सत्य हिन्दी के लिये वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह का विश्लेषण।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।



















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