मज़हबी श्रेष्ठता के प्रश्न हमेशा से मनुष्य के ज़रूरी सवालों को बहस से बाहर कर दिया करते हैं। ख़ाली जेब ख़ाली पेट लोग इन सवालों पर लड़ मरते हैं लड़ मर सकते हैं । सियासत इसको जानती है और समय समय पर इसका स्तेमाल करती रही है । इस्तांबुल में भी यही हो रहा है “पड़ोस” का हाल सुना रहे हैं दानिश्वर वी एन राय
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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