नीतीश के ख़िलाफ़ और मोदी के प्रति चापलूसी भरी बयानबाज़ी के ज़रिए चिराग पासवान ने सुर्ख़ियाँ तो बटोर लीं, मगर क्या इससे उन्हें कोई राजनीतिक फ़ायदा भी होगा? कहीं वे बीजेपी के मोहरे बनकर तो नहीं रह जाएंगे? वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की रिपोर्ट-Satya Hindi






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