पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मतदान से 10 दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजनीतिक सलाहकार कंपनी I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के सह-संस्थापक और निदेशक विनेश चंदेल (Vinesh Chandel) को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। लेकिन चंदेल की कंपनी आई पैक तृणमूल कांग्रेस का चुनाव अभियान संभालती है। इससे पहले इसी कंपनी के कोलकाता दफ्तर पर छापे पड़े थे तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद विरोध करने मौके पर पहुंची थीं। 
ED का आरोप है कि कोयला तस्करी सिंडिकेट से जुड़े एक 'हवाला' ऑपरेटर ने I-PAC की पंजीकृत कंपनी (Indian PAC Consulting Private Limited) को करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए थे। मामला नवंबर 2020 में CBI द्वारा दर्ज की गई उस FIR से जुड़ा है, जिसमें आसनसोल के पास 'ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड' की खदानों से करोड़ों रुपये के कोयले की चोरी और तस्करी का आरोप लगाया गया था। ED की जांच में सामने आया है कि इस अवैध कारोबार से होने वाली कमाई का एक हिस्सा हवाला के जरिए I-PAC तक पहुँचाया गया था। हालांकि ये सिर्फ आरोप है। ईडी ने अभी न तो साबित कर पाया है और न ही अदालत ने विनेश चंदेल को कोई सज़ा सुनाई है।

मोदी सरकार पर ईडी के राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप

टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी के राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप मोदी सरकार पर लगाया है। अभिषेक ने सोमवार देर रात एक्स पर लिखा- बंगाल चुनावों से महज 10 दिन पहले आई-पीएसी के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी न केवल चिंताजनक है, बल्कि इसने निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत को ही हिला दिया है। ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की ओर बढ़ना चाहिए, इस तरह की कार्रवाई एक भयावह संदेश देती है: यदि आप विपक्ष के साथ काम करते हैं, तो अगला नंबर आपका हो सकता है। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि डराना-धमकाना है!
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टीएमसी नेता ने कहा-  इसे और भी अनदेखा करना मुश्किल है क्योंकि यहाँ दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे लोगों को पाला बदलते ही संरक्षण मिल जाता है, जबकि अन्य लोगों को राजनीतिक रूप से सुविधाजनक समय पर निशाना बनाया जाता है। लोग अब इस बात से अनजान नहीं हैं। यहां पर अभिषेक का इशारा मुर्शिदाबाद के पूर्व विधायक हुमायूं कबीर की तरफ था। जिन पर दूसरी बाबरी मस्जिद मुर्शिदाबाद में बनवाने के नाम पर एक हजार करोड़ रुपये चंदा लेने का आरोप है। हाल ही एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके ज़रिए आरोप लगाया था कि हुमायूं कबीर को मुसलमानों का वोट बांटने के लिए बीजेपी ने आगे किया था। हुमायूं कबीर ने फटाफट अपनी पार्टी बनाई। बड़े बड़े प्रोग्राम किए। ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने कबीर की पार्टी से गठबंधन किया था। लेकिन कबीर पर चंदा वसूली और अन्य आरोप लगने पर पार्टी ने गठबंधन तोड़ दिया।
अभिषेक बनर्जी ने आगे एक्स पर लिखा है- जब लोकतंत्र की रक्षा के लिए बनी संस्थाएँ दबाव के औजार बनने लगती हैं, तो विश्वास कम होने लगता है। एक तरफ चुनाव आयोग है, तो दूसरी तरफ ईडी, एनआईए, सीबीआई जैसी एजेंसियां ​​सबसे संवेदनशील समय पर हस्तक्षेप करती हैं। इससे निष्पक्षता का नहीं, बल्कि भय का माहौल बनता है। भारत को हमेशा से अपने लोकतंत्र पर गर्व रहा है- मुखर, अव्यवस्थित लेकिन स्वतंत्र। लेकिन आज कई लोग पूछने लगे हैं: क्या हम अब भी वही देश हैं? यह महज़ एक गिरफ़्तारी का मामला नहीं है। यह इस बात का सवाल है कि क्या हमारी संस्थाएँ स्वतंत्र रहेंगी और क्या हर नागरिक, चाहे उसकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी हो, बिना किसी डर के भाग ले सकेगा। क्योंकि एक बार डर आज़ादी की जगह ले लेता है, तो लोकतंत्र महज़ एक शब्द बनकर रह जाता है।

अमित शाह को चुनौतीः टीएमसी महासचिव ने कहा- अमित शाह और भाजपा के सारे सत्ताधीश 4 और 5 मई को बंगाल में मौजूद रहें। सीईसी ज्ञानेश कुमार और अपनी सभी एजेंसियों को साथ लेकर आएँ। बंगाल न तो दबेगा, न चुप होगा और न ही झुकेगा। यह वो धरती है जो दबाव का जवाब प्रतिरोध से देती है और आपको इसका सही मतलब दिखाएगी!

विनेश चंदेल की गिरफ्तारी के बाद ईडी ने अपने पुराने आरोप दोहराए। ED ने आरोप लगाया है कि इस मामले की जांच के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बाधा डालने की कोशिश की थी। जनवरी में जब I-PAC के कोलकाता दफ्तर पर छापा मारा गया था, तब मुख्यमंत्री ने वहां पहुंचकर जांच एजेंसी की कार्रवाई का विरोध किया था और कुछ दस्तावेज अपने साथ ले गई थीं। 

विनेश चंदेल कौन हैं?

विनेश चंदेल I-PAC के शुरुआती सदस्यों में से एक हैं और प्रशांत किशोर के करीबी माने जाते हैं। वह भोपाल के NLIU से कानून स्नातक हैं और पत्रकारिता व सुप्रीम कोर्ट में वकालत का अनुभव भी रखते हैं। वह लंबे समय से बंगाल और मेघालय में TMC के लिए जमीनी स्तर पर चुनावी रणनीति बनाने का काम देख रहे थे।
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ED चंदेल को विशेष अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड की मांग करेगी। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कोयला घोटाले का पैसा चुनाव प्रचार या अन्य राजनीतिक गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया था। यानी कोयले घोटाले के तार कथित तौर पर टीएमसी से जुड़े होने की जांच हो रही है। भाजपा को मनी लॉन्ड्रिंग जांच का सामना कर रही तमाम कंपनियों से चुनावी चंदा मिलने का आरोप टीएमसी और अन्य विपक्षी पार्टियों ने लगाया लेकिन ईडी ने कभी बीजेपी के किसी नेता या मंत्री पर छापा नहीं मारा। ईडी देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के खातों तक को सीज़ कर चुकी है। ईडी आम आदमी पार्टी के नेताओं पर कार्रवाई कर चुकी है। खुद बीजेपी शासित राज्यों के नेता, मुख्यमंत्रियों पर करप्शन के गंभीर आरोप हैं लेकिन किसी जांच एजेंसी ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की।