टीएमसी में बड़ी बगावत के बीच अब ममता बनर्जी के बेहद क़रीबी फिरहाद हकीम ने बुधवार को कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया। ममता बनर्जी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने पत्रकारों को बताया, 'फिरहाद हकीम ने पहले भी ममता बनर्जी से इस्तीफा देने की अनुमति मांगी थी। उस समय उन्हें इस्तीफा नहीं देने को कहा गया था। लेकिन आज उन्होंने फिर से अनुरोध किया, जिसके बाद ममता बनर्जी ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया।' ऐसे में सवाल है कि जिस मेयर पद को पाने के लिए राजनीतिक दल जी-जान लगा देते हैं उस पद को आख़िर फिरहाद हकीम की पार्टी टीएमसी या ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने को मंजूरी देकर खाली क्यों करने दिया?

फिरहाद हकीम के इस्तीफे की वजह

फिरहाद हकीम ने बीजेपी सरकार बनने के बाद काम करने में आने वाली दिक्कतों का ज़िक्र किया। वे टीएमसी के प्रमुख अल्पसंख्यक चेहरे माने जाते हैं और 2018 से कोलकाता के मेयर पद पर थे। कोलकाता नगर निगम यानी केएमसी पर 2010 से लगातार टीएमसी का कब्जा रहा है। अभी यह साफ नहीं है कि फिरहाद हकीम के बाद कोलकाता का नया मेयर कौन बनेगा।
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यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती अनिश्चितता और हाल के हफ़्तों में कोलकाता नगर निगम में पार्टी पार्षदों के इस्तीफ़ों के बीच सामने आया है। हकीम का इस्तीफ़ा टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जो ऐसे समय में आया है जब पार्टी राज्य में सत्ता गंवाने के बाद अंदरूनी उथल-पुथल से जूझ रही है। अभी तक इस बारे में कोई तत्काल जानकारी नहीं मिली है कि कोलकाता के मेयर के तौर पर हकीम की जगह कौन लेगा।

हकीम टीएमसी के एक कद्दावर अल्पसंख्यक चेहरा हैं। वह 2018 से कोलकाता के मेयर के तौर पर काम कर रहे हैं और पिछले कुछ सालों में राज्य सरकार में कई अहम मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी संभाल चुके हैं।

शुभेंदु अधिकारी की बैठक में पहुँचे थे हकीम?

रिपोर्ट है कि फिरहाद हकीम हाल ही में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की नबन्ना में हुई प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुए थे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार उनके साथ नयना बंद्योपाध्याय, अशोक देब और कुणाल घोष जैसे अन्य वरिष्ठ टीएमसी विधायक भी वहां पहुंचे थे। 

सीएम की बैठक में टीएमसी विधायकों शामिल होना इसलिए ज्यादा चर्चा में आया क्योंकि इसी दौरान पार्टी के बागी विधायक अलग बैठक कर रहे थे। ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा भी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में शामिल हुए थे।

शुभेंदु की बैठक पर टीएमसी का रुख क्या?

इस मामले में सवाल उठने पर शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि ये प्रशासनिक बैठकें हैं और सभी विधायकों- सांसदों को आमंत्रित किया जाता है, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों। कुणाल घोष ने कुछ दिन पहले कहा था, 'हम सरकारी प्रशासनिक बैठकों का बहिष्कार नहीं करना चाहते, लेकिन जब हमारे कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं और उन्हें घर से बेघर किया जा रहा है, तो हमें दो बार सोचना पड़ता है।'

टीएमसी के ख़िलाफ़ बागियों का शक्ति प्रदर्शन!

टीएमसी के 58 से ज़्यादा बागी टीएमसी विधायकों ने एक दिन पहले ही निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में अपना नेता बनाने का फ़ैसला स्पीकर रथिंद्र बोस को बताया। स्पीकर ने उनके दावे को स्वीकार कर लिया और विपक्ष के नेता वाले कमरे की चाबी उन्हें सौंप दी। विपक्ष के नेता बनने के बाद ऋतब्रत ने कहा है कि ममता बनर्जी उनकी नेता हैं। हालाँकि, टीएमसी ने उन्हें पहले ही पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए पार्टी से निकाल दिया है। अब यह ताज़ा घटना ममता बनर्जी के लिए खुली चुनौती है। ममता बनर्जी ने पहले वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने का फैसला किया था, लेकिन ऋतब्रत बनर्जी ने उनके खिलाफ बगावत कर दी।

बागी विधायकों ने क्या किया?

बगावत करने वाले विधायकों ने पार्टी के लेटरहेड पर नहीं, बल्कि सफेद कागज पर एक पत्र लिखकर स्पीकर को सौंपा। इसमें उन्होंने लिखा- ममता बनर्जी- पार्टी की नेता, ऋतब्रत बनर्जी- विपक्ष के नेता, अखरुज्जमान- चीफ व्हिप और शेउली साहा, जावेद खान, संदीपन साहा व सबीना यास्मिन- उपनेता।

बाद में मीडिया को संबोधित करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, 'हम विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हम 60 विधायकों का एक गुट हैं। हम ममता बनर्जी से अनुरोध करेंगे कि वे हमारी सलाहकार बनें और हमारा मार्गदर्शन करें। हम एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे।' उन्होंने आगे कहा कि वे और उनके खेमे के विधायक पार्टी के बाकी विधायकों की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है, जिनमें से कई अब भी ममता बनर्जी के प्रति वफ़ादार हैं।
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टीएमसी के समर्थन में नहीं पहुँचे कई नेता

ममता बनर्जी द्वारा कोलकाता में किए गए धरने में ये बागी विधायक नहीं पहुंचे। वहीं, ममता के करीबी नेता बागियों की बैठक में नहीं गए और सरकारी बैठक में शामिल हुए। कुछ दिन पहले टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तिदार और छह विधायकों ने भी कल्याणी में शुभेंदु अधिकारी की बैठक में हिस्सा लिया था।

ममता के वफादार हैं फिरहाद!

फिरहाद हकीम ममता बनर्जी के सबसे पुराने और भरोसेमंद सहयोगियों में से एक हैं। उन्होंने राज्य सरकार में कई अहम विभाग संभाले हैं। उनका इस्तीफा टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर जब पार्टी पहले ही क़रीब 60 विधायकों के विद्रोह से जूझ रही है। टीएमसी अब संगठनात्मक स्तर पर आत्म-मंथन कर रही है और कई कमेटियां भंग कर दी गई हैं। पार्टी के भविष्य और नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं।