नेताजी सुभाषचंद्र बोस पर अपमानजनक टिप्पणी के ख़िलाफ़ पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी की चेतावनी 24 घंटे के अंदर तब हवा में उड़ गई जब कोलकाता में ही नेताजी बोस की मूर्ति गुरुवार को टूटी-फूटी हालत में मिली। घटना के सामने आते ही स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों में नाराजगी फैल गई है। यह घटना तब समय सामने आयी है जब बीजेपी के राज्यसभा सांसद नागेंद्रनाथ रॉय उर्फ अनंत महाराज के नेताजी पर दिए गए विवादित बयान को लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक माहौल गर्म है। इसी बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को ही अनंत महाराज को दिया गया 'बंग विभूषण' सम्मान भी तत्काल प्रभाव से वापस लेने का फ़ैसला किया है। हालाँकि, पश्चिम बंगाल बीजेपी ने दावा किया है कि नेताजी की जो खंडित मूर्ति अभी मिली है वह काफी पहले से ही क्षतिग्रस्त थी।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार कोलकाता के दक्षिणी हिस्से के न्यू अलीपुर इलाके में तीन रास्तों के चौराहे पर स्थापित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का दाहिना हाथ टूटा हुआ पाया गया। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। रिपोर्ट के अनुसार कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फ़िलहाल यह साफ़ नहीं है कि मूर्ति को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया या किसी अन्य कारण से यह क्षतिग्रस्त हुई। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और अन्य सबूत भी जुटाए जा रहे हैं। अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

स्थानीय बीजेपी नेता क्या बोले?

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार घटना के बाद स्थानीय बीजेपी नेताओं ने मौके पर पहुंचकर आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने बुधवार रात प्रतिमा को नुक़सान पहुंचाया। उन्होंने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। न्यूज़ एजेंसी के अनुसार दक्षिण कोलकाता बीजेपी के संगठन सचिव तारक बनर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने एक दिन पहले ही नेताजी के अपमान को लेकर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। ऐसे में 24 घंटे के भीतर प्रतिमा का क्षतिग्रस्त मिलना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

एक दिन पहले सीएम ने दी थी सख्त चेतावनी

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को पुलिस और राज्य के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी को निर्देश दिया था कि सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा था कि जो लोग नेताजी के खिलाफ झूठी, अपमानजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां कर रहे हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
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सीएम ने यह भी कहा था कि केवल सोशल मीडिया पोस्ट हटाने से कार्रवाई से बचा नहीं जा सकेगा और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए थे। हालाँकि उन्होंने नेताजी पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले सांसद नागेंद्रनाथ रॉय का नाम लेने से इनकार कर दिया था।

बीजेपी सांसद के बयान से शुरू हुआ विवाद

पूरा विवाद बीजेपी के राज्यसभा सांसद नागेंद्रनाथ रॉय उर्फ अनंत महाराज के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने दावा किया था कि नेताजी के पास आजाद हिंद फौज बनाने की क्षमता नहीं थी और उन्होंने इस सेना का गलत इस्तेमाल किया। कुछ रिपोर्टों में उनके बयान में नेताजी को 'युद्ध अपराधी' कहे जाने का भी ज़िक्र किया गया। इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद तेज हो गया और सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

'बंग विभूषण' सम्मान वापस लिया

विवाद बढ़ने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को अनंत महाराज को दिया गया 'बंग विभूषण' सम्मान वापस लेने की घोषणा कर दी। राज्य सरकार के सूचना एवं संस्कृति विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि सम्मान दिए जाने के बाद सामने आए तथ्यों को देखते हुए यह पाया गया कि उनका इस सम्मान को बनाए रखना पुरस्कार की गरिमा और उद्देश्य के अनुरूप नहीं है।
सरकार ने आदेश में साफ़ किया कि अब अनंत महाराज खुद को 'बंग विभूषण' सम्मान प्राप्त व्यक्ति नहीं बता सकेंगे। साथ ही उनका नाम पुरस्कार प्राप्त लोगों की आधिकारिक सूची से भी हटाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेने से किया इनकार

इसी विवाद के बीच गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील की उस मांग पर स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया, जिसमें अनंत महाराज के खिलाफ कार्रवाई की अपील की गई थी। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को लगता है कि यह मामला गंभीर है, तो वह नियमित रिट याचिका दाखिल करें। अदालत ने कहा कि याचिका आने पर मामले की कानूनी रूप से सुनवाई की जाएगी।

बीजेपी ने तोड़फोड़ के आरोपों को बताया भ्रामक

विवाद बढ़ने के बाद पश्चिम बंगाल बीजेपी ने मूर्ति तोड़े जाने के आरोपों को गुरुवार देर रात को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि न्यू अलीपुर में नेताजी की प्रतिमा पिछले कई महीनों से खराब हालत में थी और लंबे समय से तिरंगे से ढकी हुई थी।
बीजेपी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने प्रतिमा की मरम्मत कराने की पहल की थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने मरम्मत से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसे विपक्षी दलों ने तोड़फोड़ बताकर गलत तरीके से प्रचारित किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि विपक्ष 'फेक न्यूज' फैलाकर राजनीतिक माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है।

वहीं पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रतिमा वास्तव में तोड़ी गई या वह पहले से क्षतिग्रस्त थी। फिलहाल जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।