महुआ मोइत्रा अब ममता बनर्जी के समर्थन में उतर आई हैं। उन्होंने यूसुफ़ पठान के बागी गुट के साथ जाने पर लिखा, 'यूसुफ़ पठान, क्या आप इसलिए दिल्ली भाग रहे हैं क्योंकि अमित शाह ने आपको बुलाया है? थोड़ी हिम्मत दिखाइए।'
यूसुफ पठान और महुआ मोइत्रा
टीएमसी में बड़ी बगावत के बीच पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा ने पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान पर बड़ा हमला बोला है। महुआ ने उन्हें बाग़ी गुट का साथ देने का आरोप लगाते हुए कहा, 'थोड़ी शर्म और ज़रा रीढ़ की हड्डी दिखाइए।' यूसुफ पठान पर महुआ का यह हमला तब हुआ है जब बगावत में शामिल बर्दवान पूर्व सीट से सांसद शर्मिला सरकार के अनुसार पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर घोषणा कर दी है कि वे ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी से अलग होकर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल होना चाहते हैं।
बगावत की इस ख़बर के बीच कृष्णानगर से लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि यूसुफ पठान को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुलाया और वे तुरंत दिल्ली पहुंच गए। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'यूसुफ़ पठान, क्या आप इसलिए दिल्ली भाग रहे हैं क्योंकि अमित शाह ने आपको बुलाया है? थोड़ी हिम्मत दिखाइए। आप भारत के लिए खेले हैं। हमारे ज़िले ने आपको भारी अंतर से जिताया था। थोड़ी शर्म और ज़रा रीढ़ की हड्डी दिखाइए।'
इसके बाद महुआ ने एक और पोस्ट में लिखा, "जानकारी के लिए बता दूँ कि लोकसभा में मैजिक नंबर 19 है और उनके पास 19 नहीं हैं! लेकिन मेरे अच्छे दोस्त सांसद सीएम रमेश 'दल्लागिरी' की पूरी कोशिश कर रहे हैं!"
महुआ अभी तक ममता बनर्जी के साथ पूरी मजबूती से खड़ी हैं, जबकि पार्टी अपने गठन के बाद सबसे बड़े संकट की स्थिति से गुजर रही है। महुआ मोइत्रा ने कुछ दिन पहले बागी विधायकों पर भी बड़ा हमला बोला था। उन्होंने उन्हें बिल्कुल बेकार नेता बताया था, जो सिर्फ ममता बनर्जी की लोकप्रियता के सहारे टिके रहे।
यूसुफ पठान और ममता विवाद
यूसुफ पठान हाल ही में विवादों में आए थे जब एक बंगाली अखबार ने खबर छापी कि टीएमसी ममता बनर्जी के लिए बहरामपुर सीट खाली कराने के लिए यूसुफ पठान से इस्तीफा मांग रही थी। इसके लिए पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली को भी बीच में लाया गया था। पठान ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। बहरामपुर में मुस्लिम मतदाता करीब 50-52% हैं, जिसे टीएमसी ममता के लिए सुरक्षित सीट मानती है। सौरव गांगुली ने इस खबर को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि अखबार ने 'बिना सोचे-समझे' खबर छापी है। यूसुफ पठान ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर टीएमसी के लिए बहरामपुर जीता था। यह सीट पार्टी के लिए ऐतिहासिक जीत थी।
20 सांसदों ने की बड़ी बगावत
महुआ मोइत्रा के बयान से कुछ घंटे पहले ही टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर बड़ा बम फोड़ा है। इन सांसदों का नेतृत्व मुख्य सचेतक काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। सांसदों ने घोषणा की है कि वे भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का साथ देंगे और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी संसदीय पार्टी से अलग हो गए हैं। काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, 'हमने लोगों का फैसला स्वीकार किया है और अब एनडीए के साथ मिलकर बंगाल के विकास के लिए काम करेंगे।' बाग़ी सांसदों का कहना है कि वे अभी पार्टी से इस्तीफा नहीं देंगे और बीजेपी में भी नहीं जाएंगे। वे अलग संसदीय गुट के रूप में काम करेंगे और एनडीए को समर्थन देंगे। इस रणनीति से उन्हें दलबदल विरोधी कानून से बचाव मिल सकता है।विधायी दल में भी बगावत
लोकसभा से पहले विधानसभा विधायी दल में भी बगावत हो चुकी है। निकाले गए टीएमसी विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने 58 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र दिया है। उन्होंने दावा किया है कि 60 विधायक उनके साथ हैं। इस पत्र में ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाने का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन उन्होंने ममता बनर्जी को पार्टी का सर्वोच्च नेता मानने की बात कही है। 60 विधायकों का समर्थन दलबदल विरोधी कानून के तहत दो-तिहाई बहुमत है, जिससे वे पार्टी का चुनाव चिन्ह हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी में भारी बवाल मचा हुआ है। अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और तरीके को लेकर काफी नाराजगी है। कई नेता अब ममता बनर्जी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के अंदर टूट साफ दिख रही है। महुआ मोइत्रा जैसे कुछ नेता ममता बनर्जी के साथ डटे हुए हैं, जबकि बड़े हिस्से ने बगावत का रास्ता चुन लिया है।