ममता बनर्जी ने केंद्र पर बड़ा आरोप लगाया है कि बंगाल में अघोषित राष्ट्रपति शासन है और NRC-जनगणना के ज़रिए नागरिकता छीनने की कोशिश की जा रही है।
ममता बनर्जी, नरेंद्र मोदी, अमित शाह
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अब राज्य के लोगों को चेताया है कि मोदी सरकार उनकी नागरिकता छीन सकती है! उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अनौपचारिक तौर पर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है और केंद्र सरकार विधानसभा चुनाव के बाद एनआरसी और जनगणना के नाम पर लोगों की नागरिकता छीनने की गहरी साज़िश रच रही है।
ममता बनर्जी कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस का चुनावी घोषणा-पत्र जारी करने के बाद मीडिया से बात कर रही थीं। उन्होंने कहा कि भले ही मोदी सरकार ने आधिकारिक रूप से घोषणा न की हो, लेकिन उनकी हरकतें इसे साबित करती हैं कि इसने पहले से ही राष्ट्रपति शासन लगा रखा है।
'ईसीआई, मोदी सरकार मिले हुए हैं'
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग केंद्र के साथ मिलकर काम कर रहा है। राज्य में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं, जिससे ज़रूरी सेवाएँ प्रभावित हुई हैं और राज्य की स्वायत्तता यानी इसके फ़ैसले लेने के अधिकार को नुकसान पहुंचा है। इससे ऐसा लग रहा है जैसे चुनाव वाले राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया हो।
ममता ने कई आईएएस अधिकारियों को केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक बनाकर अनजान इलाक़ों में भेजने की आलोचना की। उन्होंने पूछा कि जो अधिकारी जमीनी हकीकत को नहीं जानते हैं उनको कैसे जिम्मेदारी दी जा सकती है?
उन्होंने कई चीजों की कमी के दौरान खाद्य विभाग के प्रधान सचिव के तबादले का उदाहरण दिया और कहा कि इससे सिस्टम में बड़ा व्यवधान पैदा हुआ है।
50 से ज़्यादा अफसर हटाए गए
चुनाव आयोग ने 15 मार्च को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीख़ें घोषित की थीं। घोषणा के कुछ घंटों के अंदर ही राज्य के कई बड़े अधिकारी बदल दिए गए। इनमें चीफ़ सेक्रेटरी, होम सेक्रेटरी, डीजीपी यानी पुलिस महानिदेशक जैसे बड़े नाम शामिल थे। पिछले चार दिनों में 50 से ज़्यादा वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को हटाया या ट्रांसफर किया गया। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में होंगे। पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी।
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'एसआईआर में खास समुदाय निशाने पर'
वोटर लिस्ट में बड़े बदलाव पर चिंता जताते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि विशेष गहन संशोधन यानी एसआईआर प्रक्रिया में लाखों नाम कट सकते हैं। उन्होंने बताया, 'मुझे पता चला है कि लगभग 60 लाख मामलों में से क़रीब 22 लाख निपटाए जा चुके हैं और लगभग 10 लाख नाम हटाए जा सकते हैं। सप्लीमेंटरी सूची जारी करने में देरी की जा रही है। पता नहीं चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी होगी भी या नहीं।'ममता ने आरोप लगाया कि संविधान अब देश में नहीं बचा है। एक खास समुदाय के लोगों पर एसआईआर प्रक्रिया में ज्यादा असर पड़ रहा है। इन लोगों को न्याय कैसे मिलेगा? उन्होंने बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है, लेकिन उन्हें पता है कि कुछ नहीं होगा। वे सिर्फ सबूत रख रहे हैं। उनका मक़सद मोदी की सरकार से देश को आज़ाद कराना है।
बंगाल को तोड़ने की साज़िश: ममता
ममता ने आरोप लगाया कि कुछ लोग उत्तर बंगाल को अलग करके बिहार के कुछ हिस्सों के साथ नया राज्य बनाने की योजना बना रहे हैं। ममता बनर्जी ने राज्य के लोगों से अपील की, 'एकजुट रहें और सतर्क रहें। डर को हावी न होने दें। रिश्वत या अन्य लालच न लें। बाहरी ताक़तें हमारे राज्य में दंगा भड़काने की कोशिश कर रही हैं।'
ममता बनर्जी ने केंद्र पर और भी कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र ने कोई वादा पूरा नहीं किया। वे कंपनियों को निजी हाथों में बेचकर निजीकरण की नीति चला रहे हैं। कुछ उद्योगपति पैसा लेकर विदेश भाग जाते हैं। अब वे बंगाल पर कब्जा करना चाहते हैं। राज्य की सीमाओं से हथियार और अवैध पैसा लाकर सांप्रदायिक असंतोष फैलाने की कोशिश हो रही है। यह क्षेत्र को अस्थिर करने और अप्रत्यक्ष केंद्र नियंत्रण का बहाना बनाने की साजिश है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होने हैं। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। टीएमसी ने घोषणा-पत्र में महिलाओं, युवाओं और अन्य वर्गों के लिए कई वादे किए हैं।
ममता के आरोपों पर बीजेपी और केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है, लेकिन ममता बनर्जी की ये बातें चुनावी माहौल को गर्म कर रही हैं।