टीएमसी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को निकाल दिया है। कार्रवाई तब हुई जब अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद होने वाली ममता बनर्जी की बैठक से 60 विधायक नदारद रहे थे। पार्टी के लिए यह बड़ा संकट बताया जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को अपने दो विधायकों- संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निकाल दिया। यह कार्रवाई तब हुई जब अभिषेक बनर्जी पर हमले के एक दिन बाद ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई विधायकों की बैठक में भारी अनुपस्थिति रही। कुल 80 टीएमसी विधायकों में से केवल 20 ही बैठक में पहुंचे, जबकि क़रीब 60 विधायक नदारद रहे थे। पार्टी के अंदर यह बड़ा संकट माना जा रहा है।
टीएमसी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया कि दोनों विधायकों को पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुना गया था, लेकिन वे बार-बार पार्टी की बैठक में नहीं आए और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे। इसके साथ ही उन्होंने ऐसे बयान दिए और काम किए जो पार्टी के हित के खिलाफ थे। नोटिस में कहा गया, 'सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद पार्टी के सक्षम अधिकारी ने फ़ैसला लिया है कि आपको तुरंत प्रभाव से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निकाला जाता है।' यह नोटिस पार्टी की उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने जारी किया है।
बैठक क्यों रद्द हुई?
अभिषेक बनर्जी पर हमले के अगले दिन ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित घर पर विधायकों की बैठक बुलाई गई थी। लेकिन 60 से ज़्यादा विधायक नहीं पहुँचे। इसकी वजह से बैठक रद्द कर दी गई। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने दावा किया है कि कई विधायक मैदान में विरोध-प्रदर्शन करने में व्यस्त थे। अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी पर हमले तथा पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमलों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन चल रहे थे। इसलिए वे बैठक में नहीं आ पाए।
रिपोर्टों के अनुसार कुणाल घोष ने कहा, 'बैठक पहले से तय थी, लेकिन हमलों के बाद स्थिति बदल गई। कार्यकर्ता गिरफ़्तार हो रहे थे, पुलिस कार्रवाई हो रही थी। ऐसे में स्थानीय स्तर पर विधायकों को स्थिति संभालनी पड़ी। उन्होंने विधायक दल को बताया और बैठक टालने का अनुरोध किया। पार्टी ने इसे मान लिया।' कुणाल घोष ने बताया कि जो 20 विधायक पहुँच गए थे, उनसे ममता बनर्जी ने अनौपचारिक चर्चा की। सभी विधायकों ने पार्टी के साथ पूरी निष्ठा जताई है।
टीएमसी की रणनीति क्या?
टीएमसी अब सड़क पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन करेगी। ब्लॉक स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों और वार्ड स्तर पर शहरी क्षेत्रों में रैलियाँ निकालने की योजना बनाई गई। मंगलवार को कोलकाता के रानी रशमोनी रोड पर ममता बनर्जी के नेतृत्व में एक दिन का धरना होगा। इस धरने में पोस्ट-पोल हिंसा, अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई और पार्टी नेताओं पर हमलों के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी। 2 जून को धरना स्थल से पार्टी अपना अगला कार्यक्रम घोषित करेगी।
विधायकों के निष्कासन की अन्य वजहें भी?
यह पूरा घटनाक्रम विधानसभा में कथित 'फर्जी सिग्नेचर' मामले से भी जुड़ा है। दोनों विधायकों के निष्कासन का आदेश मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के उस बयान के कुछ ही मिनट बाद आया, जो उन्होंने राज्य सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया था। उन्होंने बताया था कि उन दोनों ने राज्य विधानसभा में 'फर्जी हस्ताक्षर' मामले के संबंध में शिकायतें दर्ज कराई थीं, जहाँ टीएमसी ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के तौर पर समर्थन दिया था।पश्चिम बंगाल से और ख़बरें
टीएमसी के लिए संकट की स्थिति?
इन घटनाक्रमों के बीच सत्तारूढ़ टीएमसी के लिए यह बड़ी चुनौती है क्योंकि पार्टी के अंदर असंतोष के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन बड़ा संकट अभी पूरी तरह फूटा नहीं है। यह पार्टी की कमजोर स्थिति, आंतरिक असंतोष और संगठनात्मक कमजोरी का संकेत है। ये संकेत तब मिलने शुरू हुए जब 2026 विधानसभा चुनाव में टीएमसी बुरी तरह हारी। बीजेपी ने क़रीब 208 सीटें जीतीं, टीएमसी मात्र 80 पर सिमट गई। ममता बनर्जी समेत कई मंत्री हारे, पार्टी सत्ता से बाहर हो गई।
विधायकों के नहीं आने की वजह क्या?
ममता द्वारा बुलाई गई बैठक में अधिकतर विधायकों के नहीं आने पर टीएमसी ने आधिकारिक बयान में कहा है कि कई विधायक अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हमले के बाद ज़मीनी स्तर पर विरोध-प्रदर्शन और गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की मदद में व्यस्त थे। कहा गया कि इसको वैध कारण माना गया और बैठक को स्थगित कर दिया गया। लेकिन इस पर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव हार के बाद पहले भी कुछ बैठकें हुईं, लेकिन अनुपस्थिति की शिकायतें रही हैं। कहा जा रहा है कि यह आंतरिक बगावत का संकेत भी हो सकता है है। इधर, बीजेपी दावा कर रही है कि कई टीएमसी विधायक, सांसद उसके संपर्क में हैं और दलबदल के लिए तैयार हो सकते हैं। सत्ता में रहते हुए टीएमसी मजबूत दिखती थी, लेकिन अब स्थिति बलदती दिख रही है। हार के बाद क्षेत्रीय दलों में आमतौर पर स्थिति बेहद कमजोर नज़र आने लगती है। बहरहाल, अब यदि विधायकों में असंतोष गहराया तो और दलबदल, बगावत या निष्क्रियता हो सकती है। हालाँकि, टीएमसी को इतने हल्के में नहीं लिया जा सकता है। टीएमसी अभी भी 80 विधायकों वाली मुख्य विपक्षी पार्टी है। बंगाल में उनकी जमीनी स्तर पर मौजूदगी बनी हुई है। अभी पार्टी इसे 'बाहरी साजिश बताकर मैनेज करने की कोशिश कर रही है, लेकिन पार्टी में नये घटनाक्रम कुछ और ही इशारा करते हैं।