AfD Germany election victory- जर्मनी में AfD की ऐतिहासिक जीत से यूरोप में दक्षिणपंथ के बढ़ते प्रभाव की बहस तेज हुई है। जानिए रूस, यूक्रेन, NATO और अमेरिका पर इसका क्या असर होगा।
जर्मनी में दक्षिणपंथी एएफडी की भारी जीत हुई है
जर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सोनी-आनहाल्ट के चुनाव में दक्षिणपंथी और प्रवासी-विरोधी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) की ऐतिहासिक जीत ने सिर्फ जर्मन राजनीति को नहीं, बल्कि पूरे यूरोप की राजनीतिक दिशा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। AfD ने करीब 43.8 फीसदी वोट हासिल किए, जबकि चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की सेंटर-राइट CDU महज करीब 17.2 फीसदी वोट पर सिमट गई।
यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध और नाजी दौर के बाद जर्मनी में मुख्यधारा की पार्टियां लंबे समय से दक्षिणपंथी कट्टरपंथी दलों को सत्ता से दूर रखने की नीति अपनाती रही हैं। अब AfD पहली बार किसी जर्मन राज्य में सरकार बनाने के वास्तविक करीब पहुंच गई है। हालांकि उसके पास 83 सदस्यीय विधानसभा में 39 सीटें हैं और बहुमत के लिए उसे दूसरे दलों के समर्थन की जरूरत होगी।
मर्ज के लिए बड़ा राजनीतिक झटका
सैक्सोनी-आनहाल्ट का चुनाव परिणाम चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। CDU ने AfD के साथ किसी भी तरह का गठबंधन करने से इनकार किया है। जर्मन राजनीति में इसे अब तक 'फायरवॉल' कहा जाता रहा है यानी मुख्यधारा की पार्टियां AfD के साथ सत्ता साझा नहीं करेंगी। लेकिन AfD की करीब 44 फीसदी वोट हिस्सेदारी ने इस व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। पार्टी नेता एलिस वाइडल ने इसे सरकार बनाने का स्पष्ट जनादेश बताया है और संकेत दिया है कि AfD अब संघीय सत्ता पर भी दावा मजबूत करना चाहती है।AfD का अभियान मुख्य रूप से प्रवासियों के खिलाफ कड़े कदम, सीमाओं पर नियंत्रण, अवैध प्रवासियों को वापस भेजने और यूक्रेन को जर्मनी की मदद रोकने जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा है। पार्टी रूस के साथ संबंध सुधारने की भी समर्थक रही है।
क्या यूरोप तेजी से दक्षिणपंथ की ओर बढ़ रहा है?
जर्मनी का यह परिणाम यूरोप में दक्षिणपंथी राजनीति के बढ़ते प्रभाव की व्यापक तस्वीर का हिस्सा है। फ्रांस, स्पेन, इटली और पोलैंड जैसे देशों में भी राष्ट्रवादी और प्रवासी-विरोधी दलों का प्रभाव बढ़ा है। लेकिन यूरोप के दक्षिणपंथ को एक ही रंग में देखना सही नहीं होगा। अलग-अलग देशों में दक्षिणपंथी दलों के रूस, नाटो, यूक्रेन और यूरोपीय संघ को लेकर अलग-अलग विचार हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के विश्लेषण के मुताबिक, आने वाले समय में असली सवाल यह होगा कि यूरोप में किस तरह का दक्षिणपंथ प्रभावी होता है।इटली में मेलोनी का मॉडल अलग
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का उदाहरण बताता है कि हर दक्षिणपंथी सरकार रूस समर्थक नहीं होती। मेलोनी का राजनीतिक रुख प्रवासन के मामले में कठोर और सामाजिक मुद्दों पर रूढ़िवादी है, लेकिन वह नाटो के साथ मजबूती से खड़ी हैं और यूक्रेन का समर्थन भी करती हैं। इसलिए यूरोप में एक ऐसा दक्षिणपंथ भी उभर रहा है जो राष्ट्रवादी और प्रवासी-विरोधी होने के साथ-साथ अमेरिका और नाटो के करीब रहना चाहता है। दूसरी तरफ AfD जैसी ताकतें रूस के साथ संबंध सुधारने और यूक्रेन को सहायता रोकने की वकालत करती हैं।स्पेन में Vox बन सकता है 'किंगमेकर'
स्पेन में दक्षिणपंथी People's Party चुनावी राजनीति में मजबूत है, लेकिन उसके लिए Vox महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। Vox के नेता सैंटियागो अबास्कल ने AfD की जीत का स्वागत किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर देश में दक्षिणपंथी पार्टी अकेले सत्ता में आएगी। लेकिन अगर पारंपरिक कंजरवेटिव पार्टियों को सरकार बनाने के लिए कट्टर दक्षिणपंथी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ती है, तो उनकी नीतियों पर इन दलों का प्रभाव तेजी से बढ़ सकता है।पोलैंड में दक्षिणपंथ मजबूत, लेकिन रूस बड़ा मुद्दा
पोलैंड यूरोप के बदलते दक्षिणपंथी राजनीतिक परिदृश्य का अलग उदाहरण है। वहां राष्ट्रवादी और रूढ़िवादी ताकतें मजबूत हैं, लेकिन रूस को लेकर उनका रुख AfD से बिल्कुल अलग है। यूक्रेन युद्ध और रूस की भौगोलिक निकटता के कारण पोलैंड में रूस को बड़ा सुरक्षा खतरा माना जाता है। यही वजह है कि पोलिश प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने AfD की जीत का जश्न मनाने वालों पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। यूरोप के दूसरे राष्ट्रवादी दलों ने जहां AfD की जीत का स्वागत किया, वहीं पोलैंड में इसे यूरोपीय सुरक्षा के लिए चिंता के तौर पर देखा गया।पोलैंड में दक्षिणपंथ मजबूत, लेकिन रूस बड़ा मुद्दा
पोलैंड यूरोप के बदलते दक्षिणपंथी राजनीतिक परिदृश्य का अलग उदाहरण है। वहां राष्ट्रवादी और रूढ़िवादी ताकतें मजबूत हैं, लेकिन रूस को लेकर उनका रुख AfD से बिल्कुल अलग है। यूक्रेन युद्ध और रूस की भौगोलिक निकटता के कारण पोलैंड में रूस को बड़ा सुरक्षा खतरा माना जाता है। यही वजह है कि पोलिश प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने AfD की जीत का जश्न मनाने वालों पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। यूरोप के दूसरे राष्ट्रवादी दलों ने जहां AfD की जीत का स्वागत किया, वहीं पोलैंड में इसे यूरोपीय सुरक्षा के लिए चिंता के तौर पर देखा गया।ट्रंप के लिए भी राजनीतिक संदेश
जर्मनी में AfD की सफलता अमेरिका की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से यूरोप के राष्ट्रवादी और दक्षिणपंथी दलों के साथ वैचारिक समानता दिखाते रहे हैं। प्रवासन नियंत्रण, राष्ट्रीय संप्रभुता और पारंपरिक राजनीतिक प्रतिष्ठान के विरोध जैसे मुद्दे दोनों के एजेंडे में दिखाई देते हैं।
AfD की सफलता ट्रंप के लिए इस अर्थ में राजनीतिक रूप से उपयोगी है कि वह इसे यूरोपीय मतदाताओं के पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था से मोहभंग के उदाहरण के तौर पर पेश कर सकते हैं।लेकिन यहां एक विरोधाभास भी है। ट्रंप चाहते हैं कि यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर कम निर्भर हो और ज्यादा खर्च करे। अगर यूरोपीय देश रक्षा पर ज्यादा खर्च करते हैं तो यह अमेरिकी नीति के अनुकूल है। लेकिन यदि राष्ट्रवाद के कारण वे रूस, यूक्रेन और नाटो जैसे मुद्दों पर आपस में बंट जाते हैं, तो अमेरिका को एक ऐसा यूरोप मिल सकता है जो ज्यादा सैन्य खर्च तो करता हो, लेकिन मिलकर कार्रवाई करने में कम सक्षम हो।