पेरिस के मशहूर एफिल टावर में हिंदू धार्मिक संगठन BAPS के एक प्रतिनिधिमंडल के निजी दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर अपने कार्यस्थलों से हटने और प्रतिनिधिमंडल की नजरों से दूर रहने के लिए कहे जाने का मामला सामने आया है। घटना के विरोध में एफिल टावर के कर्मचारियों ने सोमवार को प्रदर्शन किया, जिसके चलते टावर को आगंतुकों के लिए बंद रखना पड़ा। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने मामले की तत्काल जांच कराने की घोषणा की है।

करीब 100 लोगों का था प्रतिनिधिमंडल

यह विवाद 5 सितंबर 2026 को हुए BAPS के एक निजी दौरे से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, Bochasanwasi Akshar Purushottam Swaminarayan Sanstha यानी BAPS से जुड़े करीब 100 लोग एफिल टावर पहुंचे थे। BAPS के प्रतिनिधि पेरिस के पास हिंदू मंदिर के उद्घाटन से जुड़े कार्यक्रमों के लिए फ्रांस में मौजूद थे।
कर्मचारी यूनियन की प्रतिनिधि डायने डावोइन के अनुसार, जब प्रतिनिधिमंडल टावर के अंदर से गुजर रहा था, तब महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थलों से हटने के लिए कहा गया ताकि उनकी जगह पुरुष कर्मचारी खड़े हो सकें। कर्मचारियों का आरोप है कि कुछ महिलाओं को अपनी पोस्ट छोड़कर दूसरे हिस्सों में जाने के लिए कहा गया, जबकि कुछ स्थानों पर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किया गया। महिला कर्मचारियों को प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी के दौरान कुछ खास इलाकों में जाने या उन्हें पार करने से भी रोका गया।
ताज़ा ख़बरें

कर्मचारियों ने कड़ा विरोध किया

एफिल टावर के कर्मचारियों ने घटना को लेकर कड़ा विरोध जताया। उनके बयान के मुताबिक, महिला कर्मचारियों और ठेकेदार कंपनियों में काम करने वाली महिलाओं को प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के दौरान ‘अदृश्य’ रहने के निर्देश दिए गए थे। कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें इस तरह की स्थिति में डालना बेहद आपत्तिजनक था और इससे उन्हें लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। घटना के बाद कर्मचारियों में तनाव बढ़ा और सोमवार को उन्होंने प्रबंधन के साथ बैठक कर विरोध दर्ज कराया।

एफिल टावर चलाने वाली कंपनी ने भी माना ग़लती

एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी SETE ने माना कि हिंदू प्रतिनिधिमंडल की ओर से महिलाओं के साथ बातचीत या संपर्क को सीमित रखने की मांग की गई थी। कंपनी ने कहा कि ऐसी शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था। SETE के अध्यक्ष एरियल वेल ने इसे अस्वीकार्य बताया और कहा कि एफिल टावर फ्रांस के गणतांत्रिक मूल्यों तथा महिला और पुरुषों की समानता के सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था उसके मूल्यों और लैंगिक समानता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी तथा मामले में जांच की जाएगी।

विरोध के कारण बंद रहा एफिल टावर

घटना के विरोध में कर्मचारियों ने सोमवार को बैठक और प्रदर्शन किया। इसके कारण एफिल टावर का संचालन प्रभावित हुआ और टावर को पूरे दिन आगंतुकों के लिए बंद रखना पड़ा। प्रवेश द्वार पर लगाए गए नोटिस में कहा गया कि टावर का खुलना ‘ऑपरेशनल कारणों’ से टाल दिया गया है। कर्मचारियों के प्रतिनिधि के मुताबिक, मंगलवार से टावर सामान्य रूप से खुलने की उम्मीद थी। एफिल टावर दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है और इसकी वेबसाइट के अनुसार यहां हर साल करीब 70 लाख लोग आते हैं।

पेरिस के मेयर ने जांच के आदेश दिएः पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का आक्रोश जायज है और यह पता लगाना जरूरी है कि आखिर किन परिस्थितियों में ऐसी व्यवस्था को स्वीकार किया गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि घटना से जुड़े तथ्यों को जल्द से जल्द सामने लाना जरूरी है और इसके लिए जांच शुरू की जाएगी।

फ्रांस की संसद की अध्यक्ष ने भी जताई आपत्ति

फ्रांस की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्राउन-पिवे ने भी घटना की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विदेशी मेहमानों की मांग पूरी करने के लिए महिलाओं को पीछे हटने या सार्वजनिक जीवन से ‘अदृश्य’ होने के लिए नहीं कहा जा सकता। उनका कहना था कि दूसरे लोगों का स्वागत करने का अर्थ यह नहीं है कि फ्रांस अपने मूल्यों से समझौता करे।

फ्रांस की समानता मंत्री ऑरोर बर्जे ने भी कहा कि फ्रांस में महिलाओं से खुद को ‘मिटा देने’ या पीछे हटने के लिए नहीं कहा जाता और कोई भी धार्मिक विचार गणराज्य के कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता।

हिन्दू संगठन ने क्या कहा?

विवाद के बाद BAPS ने एक बयान जारी कर कहा कि वह कर्मचारियों की ओर से उठाई गई चिंताओं को गंभीरता से लेता है। संगठन के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल का आकार बड़ा होने के कारण एफिल टावर की टीम के साथ समन्वय कर दौरा सामान्य समय शुरू होने पर कराया गया था, ताकि दूसरे पर्यटकों को कम से कम असुविधा हो।
BAPS ने कहा कि उसकी जानकारी के अनुसार किसी व्यक्ति को एफिल टावर में प्रवेश करने से नहीं रोका गया। हालांकि, संगठन ने इस स्थिति से किसी को हुई परेशानी या तकलीफ के लिए ईमानदारी से माफी मांगी और कहा कि वह आपसी सम्मान और दूसरों की सेवा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है।

विवाद का केंद्र क्या है?

इस पूरे मामले में फिलहाल दो अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि महिलाओं को केवल उनके लिंग के आधार पर प्रतिनिधिमंडल से दूर किया गया और कुछ जगहों पर पुरुष कर्मचारियों से उनकी जगह भरवाई गई। वहीं BAPS का कहना है कि उसकी जानकारी में किसी को टावर में प्रवेश से नहीं रोका गया और दौरा बड़े प्रतिनिधिमंडल के कारण व्यवस्थित तरीके से किया गया था। 
अब पेरिस प्रशासन और एफिल टावर की ऑपरेटिंग कंपनी की जांच से यह स्पष्ट होगा कि महिलाओं को हटाने या उनसे दूरी बनाए रखने के निर्देश किसने दिए, किस स्तर पर इन्हें मंजूरी मिली और वास्तव में घटनाक्रम क्या था। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पेरिस के पास BAPS के एक बड़े हिंदू मंदिर का उद्घाटन हुआ है। इसलिए इस मामले ने फ्रांस में धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक सम्मान और लैंगिक समानता के बीच संतुलन को लेकर भी बहस छेड़ दी है।