ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री और CIA निदेशक लियोन पनेटा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कड़ी आलोचना की है। ब्रिटिश अख़बार गार्जियन को दिए इंटरव्यू में पनेटा ने कहा कि ट्रंप “चट्टान और खाई के बीच फंस गए हैं” और दुनिया को कमजोरी का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि तीन हफ्तों से जारी इस युद्ध में अमेरिका के पास फिलहाल कोई स्पष्ट एग्जिट रणनीति (Exit Strategy) नहीं है।
पनेटा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा बैठकों में हमेशा यह आशंका जताई जाती रही है कि ईरान होर्मुज को बंद कर वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है- और अब वही हो रहा है। दुनिया के करीब 20% तेल का व्यापार इसी जलमार्ग से होता है, और इसके अवरुद्ध होने से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई है। पनेटा का कहना है कि यह संकट ट्रंप प्रशासन की तैयारी की कमी को बताता है।
तेल कीमतों में तेजी और गिरते जनसमर्थन के बीच ट्रंप को देश के भीतर भी आलोचना झेलनी पड़ रही है। पनेटा ने कहा कि ट्रंप युद्ध के लक्ष्यों और उसके अंत को लेकर मिले जुले संकेत दे रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा- “अगर ट्रम्प जीत की घोषणा भी कर दें, लेकिन युद्धविराम नहीं हो पाता, तो उसका कोई मतलब नहीं होगा।”
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युद्ध विस्तार या पीछे हटने की दुविधा

ट्रम्प ने भले ही ईरान में जमीनी सेना भेजने से इनकार किया है, लेकिन हजारों मरीन सैनिकों को मिडिल ईस्ट में भेजा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ईरान के खरग द्वीप पर कब्जा या नाकाबंदी जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है ताकि होर्मुज फिर से खुल सके।

पनेटा के अनुसार ट्रंप के सामने दो ही रास्ते हैं

  • युद्ध को और विस्तार देकर जलमार्ग खुलवाना
  • या पीछे हटकर जीत का दावा करना, जिसे दुनिया विफलता मानेगी

पनेटा ने कहा कि ट्रंप ने युद्ध योजनाओं में इसराइल को छोड़कर अन्य सहयोगियों को भरोसे में नहीं लिया। उन्होंने NATO को “पेपर टाइगर” बताकर उसकी आलोचना भी की, जिससे अब सहयोगियों का समर्थन जुटाना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध से ही यह सबक मिला है कि किसी बड़े सैन्य अभियान में गठबंधन महत्वपूर्ण होते हैं।

व्हाइट हाउस के प्रचार तरीकों पर भी सवाल

पूर्व सीआईए प्रमुख ने व्हाइट हाउस द्वारा जारी युद्ध से जुड़े मीम-स्टाइल वीडियो और सैनिकों की तस्वीरों के इस्तेमाल को “असंवेदनशील” बताया। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया में अमेरिका की छवि कमजोर हो रही है। पनेटा ने यह भी कहा कि अगर कोई अन्य राष्ट्रपति होता तो ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल हमले जैसी गलती के लिए माफी मांगता- लेकिन ट्रंप ने उल्टा ईरान को दोषी ठहराया।

पूरी दुनिया में मंदी का खतरा

पनेटा का मानना है कि अगर होर्मुज नहीं खुला तो न सिर्फ युद्ध लंबा चलेगा बल्कि फ्यूल कीमतों में उछाल से अमेरिका और दुनिया को आर्थिक नुकसान हो सकता है, यहां तक कि वैश्विक मंदी का खतरा भी पैदा हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा- “अब ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। अगर अमेरिका जलमार्ग खुलवा देता है तो युद्धविराम पर बातचीत की संभावना बन सकती है, वरना समाधान न खोज पाने की जिम्मेदारी ट्रम्प पर ही आएगी।”
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पनेटा ने बिल क्लिंटन और बराक ओबामा प्रशासन में अहम भूमिकाएं निभाईं। वे अब Panetta Institute for Public Policy के चेयरमैन हैं, जो California State University, Monterey Bay में स्थित है।
ईरान युद्ध अब केवल सैन्य टकराव नहीं बल्कि ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक कूटनीति का बड़ा संकट बन चुका है। पूर्व CIA प्रमुख की चेतावनी से साफ है कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका को कठिन फैसले लेने पड़ सकते हैं।