ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और अमेरिकी मानवरहित अंडरवॉटर व्हीकल (UUV/AUV) को पकड़ लिया है। यह इस महीने अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन को कब्जे में लेने का ईरान का दूसरा दावा है। हालांकि, अमेरिकी सेना ने अभी तक इस ताजा दावे की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है।

IRGC ने कैसे पकड़ा अमेरिकी ड्रोन?

IRGC की नौसेना के मुताबिक, अमेरिकी ड्रोन को एक “मुश्किल अभियान” के जरिए पकड़ा गया। इसमें ईरानी सैन्य खुफिया क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का इस्तेमाल किया गया। ईरान का आरोप है कि यह अंडरवॉटर वाहन होर्मुज समुद्री रास्ते में जासूसी के मकसद से काम कर रहा था। ईरानी पक्ष ने शुरुआत में पकड़े गए ड्रोन की पहचान REMUS 600 के रूप में की। IRGC ने कहा कि ड्रोन अब उसके विशेषज्ञों के कब्जे में है और उससे सूचनाएं तथा डेटा हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
बाद में IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहब्बी ने सोशल मीडिया पर इसे Mk 18 Mod 2 Kingfish बताया। उन्होंने इसे अमेरिकी नौसेना का एडवांस ऑटोनामस अंडरवॉटर व्हीकल बताया, जिसमें सोनार और सटीक नेविगेशन सिस्टम हैं।
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IRGC प्रवक्ता मोहब्बी ने होर्मुज को लेकर बेहद आक्रामक संदेश दिया। उनके मुताबिक, जलडमरूमध्य अब अमेरिकी अंडरवॉटर सिस्टम के लिए IRGC Navy की “हंटिंग ग्राउंड” यानी शिकारगाह बन गया है। उन्होंने इसे IRGC की “दूसरी पकड़” बताते हुए कहा कि यह केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि तकनीक और खुफिया जानकारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 

दूसरी बार पकड़ा गया अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन

यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने इस महीने किसी अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन को कब्जे में लेने का दावा किया है। 8 सितंबर 2026 को IRGC ने होर्मुज के प्रवेश क्षेत्र के पास एक अमेरिकी Dive-LD autonomous underwater vehicle को पकड़ने का दावा किया था। उस मामले में अमेरिका ने ड्रोन के ईरानी कब्जे में जाने की बात स्वीकार की थी, लेकिन घटना का ईरानी संस्करण खारिज किया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ड्रोन में खराबी आ गई थी और वह पानी में निष्क्रिय हो गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा था कि उसमें संवेदनशील डेटा या वर्गीकृत सोनार अथवा रडार सिस्टम नहीं था।

रॉयटर्स के मुताबिक, वह Dive-LD करीब 5.8 मीटर लंबा स्वायत्त अंडरवॉटर व्हीकल है और समुद्री माइन की पहचान, समुद्र तल की मैपिंग, खुफिया निगरानी और समुद्र के नीचे मौजूद बुनियादी ढांचे की जांच जैसे कामों में इस्तेमाल हो सकता है।

REMUS 600 कितना महत्वपूर्ण है?

इस बार ईरान जिस REMUS 600 का दावा कर रहा है, वह एक स्वायत्त अंडरवॉटर व्हीकल है। इसका इस्तेमाल समुद्र तल की मैपिंग, माइन डिटेक्शन, निगरानी और खुफिया-सर्विलांस जैसे अभियानों में किया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक REMUS 600 करीब 3.25 मीटर लंबा है और लगभग 600 मीटर तक की गहराई में काम कर सकता है। इसमें मिशन के अनुसार सोनार, कैमरा और दूसरे सेंसर लगाए जा सकते हैं।
यही वजह है कि यदि ईरान वास्तव में इस सिस्टम को अपने कब्जे में लेकर उसके डेटा और हार्डवेयर का अध्ययन करता है, तो इससे उसे अमेरिकी अंडरवॉटर निगरानी तकनीक के बारे में जानकारी मिल सकती है। हालांकि इस दावे का वास्तविक तकनीकी महत्व अभी स्वतंत्र रूप से स्पष्ट नहीं है।
ताजा घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी रक्षा विभाग या अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के दूसरे ड्रोन कब्जे के दावे की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों ने भी इसे फिलहाल ईरानी दावा ही बताया है। यह उस घटना से अलग है जो 8 सितंबर को हुई थी, जब अमेरिकी अधिकारियों ने पहले ड्रोन के नुकसान को स्वीकार किया था और कहा था कि वह खराब हो गया था। 
अमेरिकी ड्रोन को पकड़ने का दावा ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बेहद गंभीर बना हुआ है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच जहाजों, तेल टैंकरों और समुद्री आवाजाही को लेकर टकराव बढ़ा है। ईरान का IRGC लगातार कह रहा है कि वह होर्मुज में किसी भी “खतरनाक गतिविधि” या बिना अनुमति के आवागमन के खिलाफ कार्रवाई करेगा। IRGC ने ताजा बयान में भी दोहराया है कि उसके मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है।
उधर, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर कूटनीतिक प्रयास भी चल रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की होर्मुज संबंधी पेशकश को स्वीकार नहीं किया है और दोनों देशों के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

ईरान का यह दावा क्यों महत्वपूर्ण है

इस घटनाक्रम का महत्व सिर्फ एक ड्रोन पकड़े जाने तक सीमित नहीं है। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। वहां अमेरिकी और ईरानी सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से समुद्री सुरक्षा, तेल टैंकरों की आवाजाही और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है। ईरान पहले भी कब्जे में आए अमेरिकी सैन्य उपकरणों का अध्ययन करने की कोशिश करता रहा है। सितंबर की शुरुआत में पकड़े गए Dive-LD को लेकर रॉयटर्स ने बताया था कि विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान उसके हार्डवेयर का अध्ययन कर सकता है, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने उसके संवेदनशील सैन्य तकनीक से लैस होने की बात से इनकार किया था।
फिलहाल तस्वीर यह है कि ईरान दूसरे अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन को पकड़ने का दावा कर रहा है, उसकी पहचान को लेकर भी REMUS 600 से Mk 18 Mod 2 Kingfish तक बदलाव सामने आया है, जबकि वॉशिंगटन की ओर से इस ताजा दावे की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन अमेरिका ने इसका खंडन भी नहीं किया है।