ईरानी सेना IRGC ने कहा है कि इसने अमेरिका के कई फाइटर जेट और टैंकरों को निशाना बनाया है। ईरान के इस दावे से पहले अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान के रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' के आस-पास उसके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
ईरान ने कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। (फाइल फोटो)
ईरान ने अब अमेरिका के कई विमानों को तबाह करने का दावा किया है। इसने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला किया जिसमें कई अमेरिकी लड़ाकू विमान और ईंधन भरने वाले टैंकर विमान तबाह हो गए। इसके साथ ही इसने दावा किया है कि कई अन्य विमानों को भारी नुक़सान पहुँचा है। ईरानी सेना आईआरजीसी के इस दावे की अमेरिका और जॉर्डन ने अभी तक ईरान के इस दावे की पुष्टि नहीं की है। जॉर्डन की सेना का कहना है कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में घुसी तीन मिसाइलों को बीच रास्ते में ही मार गिराया।
ईरानी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने बयान जारी कर कहा कि यह हमला 'ऑपरेशन नस्र-2' के 14वें चरण के तहत किया गया। आईआरजीसी के अनुसार दो चरणों में किए गए इस हमले में कई बैलिस्टिक मिसाइलों और बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरान का दावा है कि इस हमले में कई अमेरिकी लड़ाकू विमान और हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर विमान भी तबाह हुए। कई अन्य सैन्य विमानों को गंभीर नुक़सान पहुँचा। ईरान के सरकारी टीवी ने भी दावा किया कि जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सैन्य विमानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिका और जॉर्डन ने नहीं की पुष्टि
ईरान के दावे के कुछ घंटे पहले जॉर्डन की सेना ने कहा था कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई तीन ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर मार गिराया। जॉर्डन के अनुसार किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई। किसी तरह का बड़ा नुक़सान नहीं हुआ। अब तक अमेरिका की ओर से भी यह नहीं कहा गया है कि उसके किसी विमान या सैन्य अड्डे को नुकसान पहुंचा है। इसलिए ईरान के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
आईआरजीसी ने अपने बयान में जॉर्डन के नागरिकों से भी अमेरिकी हितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की अपील की है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने उस पर हमला कर क्षेत्र में तनाव बढ़ाया है और अब उसके सहयोगी देशों को भी इसकी क़ीमत चुकानी पड़ेगी।
लगातार छठी रात अमेरिका के हमले
ईरान के दावे से पहले अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक़ इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना था। अमेरिका ने जिन ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया, उनमें तटीय निगरानी प्रणाली, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक केंद्र और समुद्री सैन्य ढांचा शामिल हैं।
ईरान का आरोप- नागरिक ठिकानों पर भी हमला
ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी हमले केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहे। ईरानी मीडिया के अनुसार हमले बंदर अब्बास, बुशेहर, क़ेश्म द्वीप, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन जैसे इलाकों में और कई पुल पर हुए।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ हालिया हमलों में अब तक कम से कम 38 लोगों की मौत हो चुकी है और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
ईरान का दावा- कई देशों में भी किए जवाबी हमले
तेहरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों के अलावा आसपास के अमेरिका के सहयोगी देशों पर भी हमले किए हैं। आईआरजीसी ने कहा है कि इसने ओमान में अमेरिकी समुद्री रडार ठिकानों पर हमला किया। कुवैत और बहरीन में कुछ ठिकानों को निशाना बनाया। सीरिया-जॉर्डन सीमा के पास स्थित अल-तनफ में अमेरिकी विशेष अभियान केंद्र पर भी हमला किया। इन दावों की भी फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चाबहार पोर्ट पर समुद्री निगरानी टावर तबाह
तेहरान का कहना है कि अमेरिका के हालिया हमलों ने ईरान के मकरान इलाके में चाबहार पोर्ट पर समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल टावर को तबाह कर दिया है। ईरान ने इसे मछुआरों की आजीविका और इलाके में आम लोगों के समुद्री आवागमन की सुरक्षा को निशाना बनाने वाला घिनौना हमला बताया गया है।
तस्नीम समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी सेना ने तीन मिसाइलें दागकर 'पूरी तरह से नागरिक ढांचे' को तबाह कर दिया। बयान में कहा गया है कि 'महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे' पर अमेरिकी हमले एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समझौतों के प्रति वॉशिंगटन की अनदेखी को दिखाते हैं।
हॉर्मुज बना सबसे बड़ा तनाव का केंद्र
इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र हॉर्मुज बना हुआ है। ईरान ने अमेरिकी और इसराइली सैन्य कार्रवाई के जवाब में इस अहम समुद्री मार्ग पर आवाजाही रोकने की कोशिश की है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ सप्ताह तक यही स्थिति बनी रही तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है। उधर, चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने अमेरिका और ईरान दोनों से सैन्य कार्रवाई रोककर बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है।
क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ा
पिछले महीने हुई अस्थायी युद्धविराम व्यवस्था अब पूरी तरह ख़त्म हो चुकी है। अमेरिका और ईरान दोनों लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ गई है। हालाँकि जॉर्डन में अमेरिकी विमानों के तबाह होने के ईरानी दावे की अभी तक किसी स्वतंत्र स्रोत या अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि नहीं की है।