पाकिस्तान में शांति वार्ती के लिए जहाँ अमेरिकी टीम इस्लामाबाद पहुँच रही है वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़े हमले की चेतावनी दी है। ट्रंप की यह चेतावनी तब आई है जब ईरान से वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है। अब आगे क्या होगा?
मुजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर बुधवार तक कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान पर बहुत सारे बम गिरने शुरू हो जाएंगे। पहले सीजफायर मंगलवार को खत्म होने वाला था। ट्रंप ने कहा कि आगे बढ़ाने की संभावना बहुत कम है। यह सीजफायर दो हफ्ते का था, जो 7 अप्रैल की शाम को शुरू हुआ था। अगर दोनों पक्षों में कोई डील नहीं हुई तो लड़ाई तुरंत फिर शुरू हो सकती है।
साफ़ है कि ट्रंप ईरान को दबाव बना रहे हैं कि जल्दी समझौता कर लो, वरना फिर से भारी बमबारी शुरू हो जाएगी। लेकिन वे कह रहे हैं कि समय उनके पास है और वे कोई गलत डील नहीं करेंगे। ब्लूमबर्ग को फोन पर दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वे किसी भी खराब डील में जल्दबाजी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, 'हमारे पास दुनिया भर का समय है।'
ट्रंप ने ये भी कहा कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से वे क्या-क्या उम्मीद करते हैं। ईरान ने इन बातचीत को ठुकरा दिया है। उन्होंने गैस की कीमतों पर भी बात की। ट्रंप ने यह भी कहा कि वे ईरान के नए नेताओं से व्यक्तिगत रूप से मिलने को तैयार हैं, ताकि युद्ध खत्म हो सके।
अमेरिका इस युद्ध में कैसे शामिल हुआ?
ट्रंप ने साफ़ कहा कि वे इसराइल की वजह से इस युद्ध में नहीं शामिल हुए। असल वजह 7 अक्टूबर का हमास का हमला था, जिसमें लगभग 1200 इसराइलियों की मौत हुई थी। इस घटना ने ट्रंप की पुरानी राय और मज़बूत कर दी कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए।
ट्रूथ सोशल पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि ईरान युद्ध में अद्भुत नतीजे आने वाले हैं। उन्होंने कहा, 'अगर ईरान के नए नेता समझदार हैं, तो ईरान का भविष्य बहुत अच्छा और समृद्ध हो सकता है!'
ईरान-यूएस बातचीत संकट मेंः मुनीर ने फोन पर राष्ट्रपति ट्रंप से बात की
पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ईरान-अमेरिका बातचीत में आ रही रुकावट का जिक्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से किया है। उन्होंने बातचीत के दूसरे दौर में एक बड़ी बाधा का जिक्र किया है। रॉयटर्स ने पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया कि आसिम मुनीर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की और चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी "इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता के दूसरे दौर में एक बड़ी रुकावट" है। मुनीर का यह कदम तेहरान की उनकी हालिया तीन दिवसीय यात्रा के बाद आया है, जहां उन्होंने राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और शीर्ष सैन्य अधिकारियों सहित ईरान के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात की थी। मुनीर वहां ईरान को बातचीत के लिए फिर से तैयार करने गए थे। लेकिन ईरान ने अपने हितों को महत्व दिया। अमेरिकी दल को आज 20 अप्रैल को इस्लामाबाद पहुंचना था। दूसरे तरफ से ईरानी दल को आना था। लेकिन इस्लामाबाद में सुरक्षा उपाय पहले जैसे कड़े हैं लेकिन फिलहाल बातचीत करने वाले अधिकारियों का अभी पता नहीं लग रहा है।
चीन ने ईरानी जहाज पर अमेरिकी हमले और ज़ब्त करने की निन्दा की
चीन ने ईरानी मालवाहक जहाज पर अमेरिकी कब्जे की निंदा करते हुए इसे 'जबरन कब्जा' बताया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अमेरिकी ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज पर अमेरिका द्वारा किए गए "जबरन कब्जे" पर चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से युद्धविराम समझौते का जिम्मेदारीपूर्वक पालन करने का आग्रह किया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति संवेदनशील और जटिल है। संबंधित पक्षों को तनाव बढ़ाने से बचना चाहिए और "जलडमरूमध्य से सामान्य आवागमन फिर से शुरू करने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ बनानी चाहिए।" इससे पहले, अमेरिका ने कहा कि उसने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी से बचने की कोशिश कर रहे एक ईरानी मालवाहक जहाज पर गोलीबारी की और उसे जब्त कर लिया। ईरान की सेना ने कहा कि जहाज चीन से आ रहा था और उसने इसे "अमेरिकी सेना द्वारा सशस्त्र डकैती" बताते हुए जवाबी कार्रवाई की कसम खाई।
ईरान ने स्पष्ट किया- यूएस से बातचीत को लेकर कोई योजना नहीं
ईरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोमवार 20 अप्रैल को कहा है कि ईरान की अमेरिका के साथ बातचीत के नए दौर को लेकर कोई योजना नहीं है। अमेरिका अपने अनुभवों से सबक नहीं सीख रहा है, और इससे कभी अच्छे नतीजे नहीं निकलेंगे। अमेरिका ने युद्धविराम के लागू होने के पहले ही दौर से इसका उल्लंघन किया, और हमने इस बारे में पाकिस्तानी मध्यस्थ को सूचित कर दिया था। उसने हम पर नौसैनिक नाकाबंदी लगाकर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया। हम पिछली वार्ताओं के दौरान हम पर हुए अमेरिकी हमलों को नहीं भूल सकते। हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते रहेंगे। अगर अमेरिका और इसराइल नए हमले शुरू करना चाहते हैं, तो हमारी सशस्त्र सेनाएँ उसी के अनुरूप जवाब देंगी।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमने 10 सूत्री प्रस्ताव प्रस्तुत किया था जिस पर इस्लामाबाद में चर्चा हुई थी। अमेरिका-इसराइली हमलों से पहले होर्मुज़ जलडमरूमध्य सुरक्षित था। ईरान द्वारा पाकिस्तानी मध्यस्थ को स्पष्टीकरण देने के बावजूद, अमेरिका ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम किसी समझौते का हिस्सा नहीं था। अमेरिका ने समुद्री नाकाबंदी की और एक ईरानी जहाज पर हमला किया, जो युद्धविराम और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। अमेरिका ने दो बार बातचीत का उल्लंघन किया है, ईरान पर हमला किया है, ईरानी लोगों को मारा है और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "अमेरिकी ईरान पर दोष मढ़ने का खेल खेल रहे हैं। सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय वे यह खेल जारी रखे हुए हैं। लेकिन हम अमेरिकियों से सच बोलने की उम्मीद नहीं कर सकते, वे हमेशा हम पर ही आरोप लगाते रहते हैं। ऐसा लगता है कि अमेरिका बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।"
ईरान ने अमेरिका के जहाज़ों पर हमला किया
ईरान ने ओमान सागर में अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले किए हैं। यह कार्रवाई अमेरिकी सेना द्वारा हॉर्मुज के पास एक ईरानी कार्गो जहाज को रोके जाने और उस पर गोलीबारी करने के बाद की गई है। ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम ने इसकी जानकारी दी है।
ईरानी सेना ने अमेरिकी जहाजों पर ड्रोन हमले अमेरिकी कार्रवाई की प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया में किए। तस्नीम ने बताया कि हमले ईरानी झंडे वाले जहाज पर अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में किए गए। हालांकि, रिपोर्ट में हमलों की तीव्रता, इस्तेमाल किए गए ड्रोनों की संख्या या अमेरिकी संपत्तियों को हुए नुकसान की कोई जानकारी नहीं दी गई है।
ईरानी जहाज पर गोलीबारी कर कब्जा किया
अमेरिकी सेना ने ईरान के कार्गो जहाज 'टौस्का' (Touska) पर गोलीबारी की, जब वह ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह की ओर जा रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका द्वारा लगाए गए नौसैनिक ब्लॉकेड को तोड़ने की कोशिश कर रहा था।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "अभी अमेरिकी मरीन्स के पास जहाज की कस्टडी है। हमने जहाज की पूरी कस्टडी ले ली है और देख रहे हैं कि उसमें क्या है।" उन्होंने बताया कि जहाज अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की प्रतिबंध सूची में था और कथित अवैध गतिविधियों से जुड़ा था।अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस ऑपरेशन की पुष्टि की और अमेरिकी नौसेना कर्मियों द्वारा जहाज कब्जे का फुटेज जारी किया। जहाज चीन से आ रहा था।
ईरान ने कार्रवाई को 'सशस्त्र समुद्री डकैती' बताया
ईरान की सैन्य कमान 'खातम अल-अंबिया' ने वाशिंगटन पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और इस कार्रवाई को 'सशस्त्र समुद्री डकैती' करार दिया। एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी बलों ने जहाज पर गोलीबारी की और उसके नेविगेशन सिस्टम को अक्षम कर दिया, उसके बाद बोर्डिंग की। प्रवक्ता ने कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सशस्त्र सेनाएं इस सशस्त्र समुद्री डकैती के खिलाफ जल्द ही जवाब देंगी और प्रतिशोध लेंगी।" उसके बाद ईरान ने यूएस जहाज़ों पर हमले किए।
ईरान ने शुरुआत में जहाज के कब्जे से इनकार किया था और दावा किया था कि उसके नौसैनिक बलों ने अमेरिकी बलों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। लेकिन बाद में अमेरिकी पुष्टि के बाद ईरान ने इसकी आंशिक मंज़ूरी जताई। ईरान ने कहा कि जहाज चीन से आ रहा था और अमेरिका ने एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला कर युद्धविराम का उल्लंघन किया है।
युद्धविराम और बातचीत पर संकट
ये घटनाएं क्षेत्र में दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम को और भी संदिग्ध बना रही हैं। ईरान ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता में भाग लेने से इनकार कर दिया है। ईरान ने इसके लिए चल रहे ब्लॉकेड, अमेरिका की 'अत्यधिक मांगों' और वाशिंगटन के रुख में बदलाव को वजह बताया। इस्लामाबाद में मंगलवार को बातचीत प्रस्तावित है।
पाकिस्तान में बातचीत को लेकर अभी भी भ्रम
बातचीत के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को लेकर भी भ्रम बना हुआ है। पहले संकेत थे कि उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इस्लामाबाद में बातचीत का नेतृत्व करेंगे, लेकिन बाद में ट्रंप के बयानों से यह विरोधाभासी हो गया। मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने प्रस्तावित बैठक से पहले सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान उनकी शर्तों को ठुकराएगा तो अमेरिका ईरान की बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है, जिसमें पुल और पावर प्लांट शामिल हैं। ईरान ने जवाब में कहा कि उसके नागरिक बुनियादी ढांचे पर कोई हमला होने पर खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों वाले पावर और डेसालिनेशन प्लांटों पर हमले किए जाएंगे।
अभी तक ड्रोन हमलों या जहाज कब्जे में किसी हताहत या नुकसान की कोई पुष्टि नहीं हुई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की महत्वपूर्ण शिपिंग गलियारा है, जहां ये घटनाएं हुई हैं। यह तनाव ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम के दौरान बढ़ा है। पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है।