IRGC सलाहकार का कहना है कि ईरान तत्काल युद्धविराम के बजाय लंबे संघर्ष के जरिए अमेरिका को मजबूर करना चाहता है। ताकि यूएस की आर्थिक, सैन्य और रणनीतिक लागत बढ़ती जाए। इसके बाद वो भविष्य में ईरान से लड़ने की स्थिति में नहीं होगा।
ईरान लंबे समय तक युद्ध लड़ने पर कर रहा विचार। AI Photo
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर के वरिष्ठ सलाहकार मोहम्मद रज़ा नक़दी ने कहा है कि तेहरान अमेरिका के साथ युद्ध को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के अंत तक जारी रख सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान युद्ध को लंबा खींचकर अमेरिका को सैन्य और आर्थिक रूप से थकाने तथा भविष्य में ईरान पर हमला करने से रोकने के लिए एक मजबूत प्रतिरोधक क्षमता यानी ‘डिटरेंस’ स्थापित करना चाहता है।
नक़दी ने मंगलवार को PBS NewsHour से बातचीत में कहा कि युद्ध को लंबे समय तक जारी रखना एक विकल्प हो सकता है। उनके मुताबिक, ईरान युद्ध को इतना लंबा खींच सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के अगले कार्यकाल तक पहुंच जाए और इस दौरान अमेरिका को लगातार नुकसान और दबाव झेलना पड़े। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि अगर भविष्य में कोई भी देश ईरान पर हमला करने के बारे में सोचे तो उसे इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
नक़दी ने दावा किया कि ईरान फिलहाल युद्ध में खुद को विजेता मानता है, लेकिन उसका अंतिम लक्ष्य अभी हासिल नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि युद्ध को जारी रखने से ईरान को अमेरिकी सेना से लड़ने का और अनुभव मिलेगा तथा अमेरिका पर ऐसी लागत डाली जा सकेगी जो भविष्य में किसी संभावित हमले को रोकने में मदद करेगी। उनके अनुसार, ईरान के लिए सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य ऐसा प्रतिरोध स्थापित करना है जिससे “दुश्मन कभी हम पर हमला करने की हिम्मत न करे।”
जब नक़दी से सीधे पूछा गया कि क्या ईरान का उद्देश्य युद्ध को तब तक खींचना है जब तक ट्रंप सत्ता से बाहर नहीं हो जाते, तो उन्होंने जवाब को प्रतिरोध स्थापित करने के लक्ष्य से जोड़ा। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध से सीख रहा है और उसके आकलन के मुताबिक अमेरिकी सैन्य ताकत उतनी मजबूत नहीं है जितनी पहले समझी जाती थी।
IRGC सलाहकार ने ईरान की मिसाइल क्षमता को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरान हर दिन जितनी मिसाइलें दाग रहा है, उससे ज्यादा मिसाइलों का उत्पादन कर रहा है। उनके मुताबिक, ईरान अलग-अलग स्थानों पर मिसाइलों का निर्माण कर सकता है और अगर युद्ध वर्षों तक चलता है, तब भी वह लगातार रॉकेट और मिसाइलें लॉन्च करने की क्षमता बनाए रख सकता है।
हालांकि नक़दी ने एक और गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर कभी ऐसी स्थिति आती है जब ईरान के पास कोई मिसाइल नहीं बचती, तो अमेरिका के लिए खतरा और भी बड़ा हो सकता है। जब उनसे पूछा गया कि मिसाइलें खत्म होने के बाद ईरान अमेरिका के लिए अधिक खतरनाक कैसे हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि अमेरिका के दुनिया भर में हजारों आर्थिक हित हैं और उन सभी को आसानी से नष्ट किया जा सकता है।
हालांकि, नक़दी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे अमेरिका के किन आर्थिक ठिकानों या हितों की बात कर रहे थे और ईरान उन्हें किस तरह निशाना बना सकता है। इसलिए उनका यह बयान संभावित आर्थिक लक्ष्यों और भविष्य की रणनीति को लेकर एक व्यापक चेतावनी के रूप में सामने आया है।
नक़दी की टिप्पणी ईरान की युद्ध रणनीति को लेकर अब तक के सबसे स्पष्ट संकेतों में से एक मानी जा सकती है। खास तौर पर उन्होंने पहली बार इतने स्पष्ट तरीके से संघर्ष की अवधि को ट्रंप के मौजूदा राष्ट्रपति कार्यकाल के अंत से जोड़ते हुए युद्ध को ‘एट्रिशन’ यानी लगातार क्षरण की रणनीति के रूप में इस्तेमाल करने की बात कही है। इससे संकेत मिलता है कि ईरान तत्काल युद्धविराम के बजाय लंबे संघर्ष के जरिए अमेरिका को आर्थिक, सैन्य और रणनीतिक लागत उठाने के लिए मजबूर करने की रणनीति पर विचार कर रहा है।