मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इसराइल के साथ चल रहे टकराव को समाप्त करने की इच्छा जताई है, लेकिन इसके साथ कड़ी शर्तें भी रखी हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि उनका देश “जरूरी राजनीतिक इच्छाशक्ति” रखता है, बशर्ते भविष्य में संघर्ष दोबारा न हो, इसके ठोस और विश्वसनीय सुरक्षा आश्वासन दिए जाएं।
ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष के साथ एक टेलीफोन वार्ता के दौरान सामने आया, जिसकी जानकारी ईरानी सरकारी मीडिया ने दी। इस बयान के बाद अमेरिकी बाजारों में पॉजिटिव प्रतिक्रिया देखी गई और निवेशकों में उम्मीद जगी कि लंबे समय से जारी तनाव कम हो सकता है।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की सत्ता में राष्ट्रपति की भूमिका सीमित होती है और वास्तविक नियंत्रण कट्टरपंथी धार्मिक नेतृत्व के हाथों में रहता है। ऐसे में इस “इच्छाशक्ति” के बयान के बावजूद जमीन पर स्थिति में बड़ा बदलाव तुरंत संभव नहीं दिखता। वैसे भी अब आईआरजीसी का पूरा नियंत्रण ईरानी सरकार पर है।
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शर्तों के साथ शांति की पेशकश

ईरान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी समझौते के लिए यह जरूरी होगा कि भविष्य में सैन्य कार्रवाई न दोहराने की गारंटी दी जाए। यह मांग पहले भी अमेरिका की 15-सूत्रीय शांति योजना के जवाब में उठाई जा चुकी है। यानी, ईरान का रुख मूलतः पहले जैसा ही बना हुआ है। ईरान अपने पुराने स्टैंड पर कायम है लेकिन अमेरिका और ट्रंप का स्टैंड अब तक कई बार बदल चुका है। अब ट्रंप इस युद्ध से हटने की बात कह रहे हैं, लेकिन किसी को भी उनकी बातों पर यकीन नहीं है।

रिवोल्यूशनरी गार्ड का सख्त रुख

जहां एक ओर कूटनीतिक संकेत दिए जा रहे हैं, वहीं ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का रुख अब भी आक्रामक है। IRGC से जुड़े तत्वों ने चेतावनी दी है कि जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ाकर अमेरिकी टेक कंपनियों कर दिया गया है। क्योंकि अमेरिकी टेक कंपनियां गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, अमेजन, एप्पल आदि इस युद्ध में अमेरिका-इसराइल की तरफ से सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नया विवाद

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहीम अज़ीज़ी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि “हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलेगा, लेकिन आपके लिए नहीं।” उन्होंने यह भी कहा कि यह मार्ग केवल उन देशों के लिए उपलब्ध होगा जो ईरान के नए नियमों का पालन करेंगे। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
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विदेश मंत्री का बयान: अमेरिका पर भरोसा नहीं

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की औपचारिक बातचीत से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि कुछ संदेश सीधे या मध्यस्थों के जरिए जरूर पहुंचे हैं, लेकिन इसे बातचीत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “अमेरिका पर हमारा भरोसा शून्य है। हमें नहीं लगता कि बातचीत से कोई नतीजा निकलेगा। हमें ईमानदारी नजर नहीं आती।” अरागची ने इस अविश्वास की वजह बताते हुए 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने का हवाला दिया, जो ट्रंप के पिछले कार्यकाल में हुआ था।
कुल मिलाकर, ईरान की ओर से शांति की इच्छा जताने के बावजूद सख्त शर्तें, आक्रामक सैन्य बयानबाजी और अमेरिका के प्रति गहरा अविश्वास यह संकेत देते हैं कि हालात फिलहाल जटिल बने रहेंगे। कूटनीतिक रास्ता खुला जरूर है, लेकिन उसमें आगे बढ़ने के लिए भरोसे की बड़ी खाई को पाटना सबसे बड़ी चुनौती होगी।