ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिकी जनता को संबोधित एक खुला पत्र लिखकर उनसे अपील की है कि वे "गढ़ी हुई कहानियों" से परे देखें और यह सवाल करें कि मौजूदा युद्ध वास्तव में किसके हितों की सेवा कर रहा है। पेजेश्कियान का पत्र ईरान के प्रेस टीवी के ज़रिए सामने आया। इस पत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" नीति पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या यह नीति आज अमेरिकी सरकार की वास्तविक प्राथमिकताओं में शामिल है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने लिखा, "अमेरिकी लोगों के हितों में से कौन से हित वास्तव में इस युद्ध द्वारा पूरे हो रहे हैं? क्या निर्दोष बच्चों का नरसंहार, कैंसर की दवा बनाने वाली कंपनियों का विनाश, या किसी देश को 'पत्थर के युग' में वापस भेजने की डींग हांकना, अमेरिका की वैश्विक प्रतिष्ठा को और नुकसान पहुंचाने के अलावा कोई अन्य उद्देश्य पूरा कर रहा है?" 
पेजेश्कियान ने यह पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के संबोधन से पहले लिखा था। ट्रंप ने गुरुवार सुबह दिए गए भाषण में इस युद्ध को खत्म में दो-तीन हफ्ते की बात कही। उन्होंने ईरान को पूरी तरह तबाह करने का दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरान में हम अपना लक्ष्य पूरा करने के करीब है। वहां रिजीम चेंज हमारा मकसद नहीं था। कुल मिलाकर ट्रंप के राष्ट्र के नाम संबोधन में कोई खास बात नहीं थी।
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ईरानी राष्ट्रपति ने तेहरान को खतरे के रूप में चित्रित करने वाली तस्वीरों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान जब बहुपक्षीय परमाणु वार्ताओं में भाग ले रहा था, उस समय दो बार हमले किए गए। पहला हमला जून 2025 में इसराइल द्वारा शुरू किए गए 12 दिनों के युद्ध के रूप में हुआ, जिसमें अमेरिका ने भी संक्षिप्त रूप से हिस्सा लिया। दूसरा हमला इस साल फरवरी के अंत में हुआ। 
उन्होंने कहा, "ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे- जिसमें ऊर्जा और औद्योगिक सुविधाएं शामिल हैं, पर हमला सीधे ईरानी लोगों को निशाना बनाता है। यह युद्ध अपराध के अलावा और कुछ नहीं है और इसके परिणाम ईरान की सीमाओं से कहीं आगे तक फैलते हैं। ये अस्थिरता पैदा करते हैं, मानवीय और आर्थिक लागत बढ़ाते हैं तथा तनाव के चक्रों को जारी रखते हैं, जो वर्षों तक जनता में अलगाववाद और आक्रोश के बीज बोते रहेंगे। यह शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि रणनीतिक भ्रम और स्थायी समाधान हासिल करने में असमर्थता का संकेत है।"
यह पत्र ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर तेहरान को नई धमकी देते हुए लिखा कि अगर होर्मुज की खाड़ी दोबारा नहीं खोली गई तो अमेरिका ईरान को उड़ा देगा या "पत्थर के युग" में वापस भेज देगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के "नए शासन के राष्ट्रपति" ने युद्ध समाप्त करने के लिए संघर्ष विराम की मांग की है, जिसे ईरानी अधिकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया है।

पेजेश्कियान ने अपने पत्र में यह भी सवाल किया कि क्या ट्रंप प्रशासन को अमेरिका के प्रमुख मध्य पूर्वी सहयोगी इसराइल द्वारा "manipulated" किया गया है, जिसने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया।

इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लंबे समय से अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए उकसा रहे हैं और वाशिंगटन-तेहरान के बीच कूटनीति को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद इसराइली सेना ने ईरान की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर कई हमलों की जिम्मेदारी ली है।
पेजेश्कियान ने लिखा, "क्या अमेरिका इस आक्रामकता में इसराइल के लिए एक प्रॉक्सी के रूप में नहीं कूद पड़ा है?" उन्होंने आगे पूछा कि क्या "ईरानी खतरे" को गढ़कर इसराइल फिलिस्तीनियों के खिलाफ अपने अपराधों से वैश्विक ध्यान हटाना चाहता है।
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ईरानी राष्ट्रपति ने कहा- "क्या यह स्पष्ट नहीं है कि इसराइल अब ईरान से लड़ना चाहता है। वो भी आखिरी अमेरिकी सैनिक और आखिरी अमेरिकी टैक्सपेयर के डॉलर तक। वो अपने अवैध हितों का बोझ ईरान, इस क्षेत्र और अमेरिकी जनता पर डालना चाहता है।" ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकी जनता से अपील की है कि वे इस युद्ध के पीछे के वास्तविकता पर गौर करें।

ईरान की राजधानी तेहरान से रिपोर्टिंग करते हुए अल जजीरा संवाददाता अली हाशिम ने कहा कि अमेरिकी और ईरानी सरकारें घातक संघर्ष के बीच "कथाओं का युद्ध" लड़ रही हैं। पेजेश्कियान के पत्र का एक प्रमुख हिस्सा यह है कि ईरान अमेरिका-इसराइल हमलों से खुद को बचाने का अधिकार रखता है। राष्ट्रपति ने जोर दिया कि ईरान का अन्य राष्ट्रों या अमेरिकी लोगों से कोई दुश्मनी नहीं है।