प्लांट पर हमला नहीं करने के डोनाल्ड ट्रंप के आश्वासन के बावजूद इसराइल ने सोमवार को ईरान के सबसे अहम साउथ पार्स पेट्रोकेमिकल प्लांट पर हमला कर दिया है। इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने खुद इस हमले की पुष्टि की और कहा कि इसराइली सेना को ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर 'पूरी ताक़त' से हमले जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
रक्षा मंत्री काट्ज़ ने इसे 'ईरान की सबसे बड़ी पेट्रोकेमिकल सुविधा पर शक्तिशाली हमला' बताया। उन्होंने कहा कि यह प्लांट ईरान के कुल पेट्रोकेमिकल उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा तैयार करता है। अब दो प्रमुख सुविधाओं को पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया गया है और ये काम नहीं कर रही हैं। इनसे ईरान के 85% पेट्रोकेमिकल निर्यात होते थे। इसराइल के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नादाव शोशानी ने कहा कि ईरान को कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी, भले ही बातचीत चल रही हो।
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ट्रंप का आश्वासन और फिर भी हमला

इससे पहले मार्च में इसराइल ने साउथ पार्स पर हमला किया था। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि इसराइल इस जगह पर दोबारा हमला नहीं करेगा। लेकिन ट्रंप ने चेतावनी भी दी थी कि अगर ईरान क़तर की ऊर्जा सुविधाओं पर हमला करता रहा तो अमेरिका खुद 'पूरी तरह से' साउथ पार्स को उड़ा देगा। बहरहाल, सोमवार को इसराइल ने फिर हमला कर ही दिया।
इसराइल का यह हमला तब हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की बातचीत चल रही है। रायटर्स ने यह ख़बर दी है। इससे पहले यूएस मीडिया एक्सियोस ने भी रिपोर्ट दी थी कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक समूह संभावित 45 दिनों के सीजफायर की शर्तों पर बातचीत कर रहे हैं। हालाँकि, ईरान अमेरिका की शर्तें मानने को तैयार नहीं है।

ईरान ने कहा है कि इस समय वह वाशिंगटन और ईरान के बीच किसी भी सीधी बातचीत में शामिल नहीं होगा। दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता के माध्यम से बातचीत की कोशिश हो रही है।

साउथ पार्स क्या है?

साउथ पार्स दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र है, जो ईरान और कतर के बीच फारस की खाड़ी में है। ईरान का हिस्सा साउथ पार्स कहलाता है और यह देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यहां से पेट्रोकेमिकल उत्पाद और गैस निर्यात होते हैं।

पिछले हमलों का सिलसिला

इस साल मार्च में इसराइल के पहले हमले के बाद ईरान ने बदला लिया और क़तर के ऊर्जा कॉम्प्लेक्स पर मिसाइलें दागीं। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र की अन्य ऊर्जा सुविधाओं को भी निशाना बनाया। ईरान ने महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया, जिससे दुनिया भर में तेल परिवहन प्रभावित हुआ। इस बीच इसराइल ने पार्स पर हमला किया तो ईरान ने भी जवाब दिया। फिर ट्रंप ने आश्वासन दिया कि इस पर फिर हमला नहीं होगा। उस समय इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि इसराइल ने अकेले हमला किया और ऊर्जा लक्ष्यों पर आगे ऐसे हमले नहीं होंगे। लेकिन अब इसराइल ने अपना रुख बदल दिया है और हमले जारी रखने की बात कही है।
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हमले का असर

ईरान के पेट्रोकेमिकल उत्पादन और निर्यात पर बड़ा झटका लगा है। वैश्विक तेल और गैस की कीमतों पर असर पड़ सकता है। क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसराइल का कहना है कि यह हमला ईरान की सैन्य और आर्थिक क्षमता को कमजोर करने का हिस्सा है। वहीं ईरान इस हमले को गंभीर बताते हुए जवाबी कार्रवाई की तैयारी में है।
जानकारों का मानना है कि साउथ पार्स जैसे अहम ऊर्जा केंद्रों पर हमले से न सिर्फ ईरान-इसराइल युद्ध बढ़ सकता है, बल्कि पूरा खाड़ी क्षेत्र और दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा मंडरा सकता है।