भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया को चेताया है कि हर चीज का हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है और दुनिया विनाश की कगार पर खड़ी है। उन्होंने कहा कि फाइनेंस, बाजार तक पहुंच, सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी सहित लगभग हर चीज का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, 'हम निरंतर खतरों और दबावों के बीच विनाश की कगार पर खड़े हैं। बस एक और कदम हमें तबाही में धकेल सकता है।' उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के 80 साल बीतने के बाद स्थिरता, सुरक्षा को मजबूत करना हमारी आदत बन जानी चाहिए थी। लेकिन इसके बजाय 'हर चीज का हथियारों का तरह इस्तेमाल' हो रहा है।
उन्होंने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि संसाधन और कनेक्टिविटी का इस्तेमाल अब खास तौर पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जिससे देश जोखिम कम करने और अलग-अलग विकल्प तलाशने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'हालाँकि इससे कुछ हद तक उनके हित सुरक्षित हो सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर माहौल अब भरोसे या सद्भावना वाला नहीं रहा है।'

ग्लोबल साउथ का 4एफ संकट

विकासशील देशों की स्थिति सबसे ख़राब बताते हुए जयशंकर ने '4एफ संकट'– फूड, फ्यूल, फर्टिलाइजर और फाइनेंस का ज़िक्र किया। उन्होंने चेतावनी दी कि सुपर अल नीनो, उर्वरक की कमी और अनाज के व्यापार में रुकावटें मिलकर बहुत बड़ा ख़तरा पैदा कर रही हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स पर हो रही प्रगति पर दबाव बढ़ रहा है।
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पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी

जयशंकर ने आतंकवाद के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि एक 'आतंकवाद का बार-बार इस्तेमाल करने वाले देश' ने पिछले दिन महासभा के सामने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया। उसने आतंकवाद को सामान्य बताने और उसके परिणामों से बचने की कोशिश की। उन्होंने कहा, 'यह नहीं चलेगा। आतंकवाद के खिलाफ खुद को बचाने का हमारा अधिकार हम इस्तेमाल करेंगे।'

विदेश मंत्री ने जोर दिया कि दोस्ती और सद्भाव आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते। राज्य प्रायोजित और सीमा पार आतंकवाद वैश्विक व्यवस्था का सीधा अपमान है। ऐसे देशों को जवाबदेह ठहराना और आतंक वित्तपोषण को उजागर कर रोकना जरूरी है।

खाड़ी संकट पर क्या बोले?

खाड़ी क्षेत्र के संघर्ष को पहले से मुश्किल स्थिति और बिगाड़ने वाला बताते हुए जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाने को 'बिल्कुल अस्वीकार्य' क़रार दिया। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा व व्यापार की बेरोक-टोक आवाजाही सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने बताया कि रेड सी से ब्लैक सी तक हमले फैल गए हैं। भारतीय नाविकों समेत कई देशों के नाविकों की जान गई है। भारत ने लाइबेरिया और 23 अन्य देशों के साथ मिलकर ऐसे हमलों के खिलाफ वैश्विक जनमत जुटाने की पहल की है।

यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख

यूक्रेन युद्ध पर जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों को दोहराया- 'अनंत युद्ध अब युद्ध के अंत में बदलना चाहिए।' भारत शांति के प्रयासों का समर्थन करता है। साथ ही नाविकों की सुरक्षा, अनाज और ऊर्जा की आपूर्ति पर भी तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। भारत खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के लिए हर संभव मदद के लिए तैयार है।
पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के लिए भारत दो-राज्य समाधान का समर्थन करता है। भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता भी दे रहा है।

एआई के दुरुपयोग से पूर्वाग्रह बढ़ने और आपसी सम्मान घटने की बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि हर देश को अपने मॉडल और रणनीति खुद तय करने का अधिकार होना चाहिए। भारत ग्लोबल साउथ के साथ एआई साझेदारी आगे बढ़ाएगा।

भारत ने 78 देशों में 600 बड़े विकास प्रोजेक्ट चलाए हैं। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस का जिक्र करते हुए उन्होंने भारत की आपदाओं में पहली मदद पहुंचाने वाली भूमिका भी बताई।
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जयशंकर ने कहा कि 1945 के बाद का विश्व व्यवस्था नए हकीकत के आगे झुक रही है। बहुध्रुवीय दुनिया के अनुकूल होने में कठिनाई से आज की अशांति पैदा हो रही है। सुधारे गए बहुपक्षवाद की ज़रूरत रोज बढ़ रही है। आर्थिक और राजनीतिक संतुलन बदल रहा है, अब सांस्कृतिक संतुलन भी आगे बढ़ाना होगा।

उन्होंने महात्मा गांधी के शब्दों को याद दिलाया जो संयुक्त राष्ट्र भवन के बाहर लिखे हैं- 'शांति का कोई रास्ता नहीं है। शांति ही रास्ता है।' ये शब्द आज के समय के लिए प्रेरणा हैं। जयशंकर के इस भाषण में वैश्विक चुनौतियों पर भारत का साफ और मजबूत रुख दिखा। उन्होंने आतंकवाद, आर्थिक दबाव और संघर्षों पर कड़ी बात कही, साथ ही शांति और सहयोग की अपील भी की।