ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूएस और यूरोप के बीच आर्थिक टकराव शुरू हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकी के जवाब में यूरोपीय देशों ने 'ट्रेड बाज़ूका' लागू करने पर विचार कर रहा है। इससे यूएस और यूरोप में आर्थिक युद्ध शुरू हो सकता है।
ग्रीनलैंड में रविवार को अमेरिका के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन हुए
ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की मांग को लेकर यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ की धमकी दी तो EU ने 'ट्रेड बाजूका' सक्रिय करने पर विचार शुरू कर दिया है।
यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच ग्रीनलैंड को लेकर जारी विवाद अब एक बड़े व्यापारिक युद्ध में तब्दील होता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद यूरोपीय संघ (EU) ने अपने सबसे शक्तिशाली आर्थिक हथियार 'एंटी-कोअर्सन इंस्ट्रूमेंट' (ACI) को सक्रिय करने की तैयारी कर ली है, जिसे कूटनीतिक हलकों में 'ट्रेड बाज़ूका' कहा जा रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड के अमेरिकी अधिग्रहण के प्रयासों का समर्थन नहीं किया, तो 1 फरवरी से उन पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जिसे 1 जून तक बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक किया जा सकता है।
यूरोपीय देशों की आपात बैठक
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच ब्रुसेल्स में यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों की एक आपातकालीन बैठक रविवार को आयोजित की गई, जिसमें अमेरिका के खिलाफ सख्त जवाबी कार्रवाई करने पर चर्चा हुई। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अब समय आ गया है जब यूरोपीय संघ को पहली बार अपने 'ट्रेड बाज़ूका' का इस्तेमाल करना चाहिए। इस विशेष कानून के तहत यूरोपीय संघ अमेरिकी वस्तुओं पर जवाबी टैरिफ लगाने के साथ-साथ अमेरिकी कंपनियों की यूरोपीय बाजार तक पहुंच को प्रतिबंधित कर सकता है और उन्हें सार्वजनिक निविदाओं (पब्लिक टेंडर्स) में भाग लेने से रोक सकता है। इसके अलावा 93 अरब यूरो मूल्य के पुराने जवाबी शुल्कों को भी फिर से लागू करने पर विचार किया जा रहा है जिन्हें पिछले साल एक व्यापार समझौते के बाद निलंबित कर दिया गया था।यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप की इस मांग को 'आर्थिक ब्लैकमेल' करार दिया है। डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और नीदरलैंड सहित आठ देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ग्रीनलैंड के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की है और स्पष्ट किया है कि संप्रभुता के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी चेतावनी दी है कि अमेरिका के इस कदम से पार-अटलांटिक संबंधों में गिरावट आएगी और इससे नाटो सहयोगियों के बीच दरार पैदा हो सकती है। फिलहाल यूरोपीय संघ इस सप्ताह होने वाले एक असाधारण शिखर सम्मेलन में अंतिम निर्णय लेने की तैयारी में है, जबकि राजनयिक स्तर पर तनाव कम करने के प्रयास भी जारी हैं।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा, "NATO पिछले 20 वर्षों से डेनमार्क को कह रहा है कि 'ग्रीनलैंड से रूसी खतरे को दूर करना होगा।' दुर्भाग्य से, डेनमार्क इसमें कुछ नहीं कर पाया। अब समय आ गया है, और यह किया जाएगा!" यह बयान ग्रीनलैंड के सामरिक महत्व को रेखांकित करता है, जहां NATO रूसी प्रभाव को लेकर चिंतित है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और ट्रंप पहले भी इसे खरीदने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।
ट्रंप की घोषणा के अनुसार, 1 फरवरी से डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम से आने वाले सामानों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा। यह 1 जून से 25% हो जाएगा, जब तक ग्रीनलैंड की "पूर्ण खरीद" के लिए डील नहीं हो जाती।
EU के कुछ करीबी सहयोगियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ये धमकियां ट्रांसअटलांटिक संबंधों को कमजोर करती हैं और "खतरनाक downward spiral" का जोखिम पैदा करती हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने NATO महासचिव मार्क रुट्टे, मैक्रों, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ और इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से बात की।
EU पिछले अगस्त में अमेरिका पर लगाए गए 93 अरब यूरो के टैरिफ को छह महीने के लिए निलंबित कर चुका है, जो 6 फरवरी से अपने आप लागू हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति मेगा ट्रेड वॉर में बदल सकती है, जिससे दोनों पक्षों की अर्थव्यवस्थाओं को गहरा नुकसान होगा।
ट्रंप के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रविवार को बचाव करते हुए कहा कि यूरोप की "कमजोरी" के कारण ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण जरूरी है ताकि राष्ट्रीय आपातकाल टाला जा सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि यूरोपीय नेता अंततः इसे समझेंगे। यह घटनाक्रम ट्रांसअटलांटिक संबंधों में तनाव का नया अध्याय है, जहां ग्रीनलैंड का मुद्दा अब व्यापार युद्ध की ओर बढ़ रहा है। दोनों पक्षों ने अभी तक कोई समझौता नहीं दिखाया है। इस बीच ग्रीनलैंड में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। रविवार को भी ग्रीनलैंड में अमेरिका के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन हुए। ग्रीनलैंड के नागरिक जोरशोर से कह रहा है कि उनका ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।