रोहिंग्या के ख़िलाफ़ कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाओं के बावजूद उनके देश में उनकी प्रसिद्धि शायद कम नहीं हुई है।
संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही संसद में भी सेना की थोड़ी बहुत पकड़ रहती है। संविधान में संसद में सेना के लिए 25% सीटों के आरक्षण की व्यवस्था है और सू की के प्रशासन में तीन प्रमुख मंत्रालय सैन्य नियंत्रण में हैं।