पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सुरक्षा और ठिकाने को लेकर अफवाहें थम नहीं रही हैं। इमरान खान के छोटे बेटे क़ासिम ख़ान ने सार्वजनिक रूप से एक भावनात्मक अपील जारी करते हुए आरोप लगाया है कि उनके पिता को छह सप्ताह से रावलपिंडी की अडियाला जेल में 'डेथ-रो सेल' (मौत की कोठरी) में पूरी तरह से एकांतवास में रखा गया है। परिवार को उनकी 'प्रूफ ऑफ लाइफ' (जीवित होने का प्रमाण) तक नहीं दिया जा रहा है।

बेटे ने लगाए गंभीर आरोप 

ब्रिटेन में अपनी माँ जेमिमा गोल्डस्मिथ के साथ रहने वाले कासिम खान, जो आमतौर पर पाकिस्तानी राजनीति से दूर रहते हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक तीखी पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि उनके पिता को गिरफ्तार हुए 845 दिन हो चुके हैं, और पिछले छह सप्ताह से उन्हें 'डेथ सेल' में रखा गया है। कोई बात साफ नहीं की जा रही, सबकुछ छिपाया जा रहा है।
क़ासिम ने आरोप लगाया कि अदालत के आदेशों के बावजूद, इमरान खान की बहनों को भी मिलने नहीं दिया जा रहा है, न कोई फोन कॉल या मीटिंग हो रही है। उन्होंने इस पूर्ण ब्लैकआउट को जानबूझकर किया गया प्रयास बताया ताकि उनके पिता की वास्तविक स्थिति को छुपाया जा सके। कासिम ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि "पाकिस्तानी सरकार और उसके हैंडलर्स" को इमरान खान की सुरक्षा और इस "अमानवीय एकांतवास" के हर नतीजे के लिए कानूनी और नैतिक रूप से पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से भी हस्तक्षेप की अपील की।

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पीटीआई का विरोध प्रदर्शन और मुलाकात की मांग 

क़ासिम खान की अपील के बाद, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी ने तुरंत सरकार से आधिकारिक प्रतिक्रिया और परिवार के लिए तत्काल मुलाकात की व्यवस्था करने की मांग की। पीटीआई का कहना है कि अनिश्चितता के कारण इमरान खान की मौत तक की अफवाहें फैल रही हैं, जिन्हें जेल प्रशासन द्वारा निराधार बताया गया है।

बुधवार को, इमरान खान की तीन बहनों और पीटीआई कार्यकर्ताओं ने उन्हें देखने की मांग करते हुए अडियाला जेल के बाहर धरना दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस पर पिछली झड़पों के दौरान बहनों और पार्टी सदस्यों पर हमला करने के भी आरोप लगे थे। यह विरोध प्रदर्शन जेल अधिकारियों द्वारा इमरान की बहन अलीमा खान को जल्द ही मुलाकात की व्यवस्था करने के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ।

जेल प्रशासन और सरकार की सफाई 

इन आरोपों और अफवाहों के बीच, अडियाला जेल प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी कर सभी अटकलों को खारिज कर दिया। जियो न्यूज को दिए गए बयान में अधिकारियों ने कहा कि इमरान खान को कहीं भी ट्रांसफर नहीं किया गया है, और उनकी मौत या सेहत के बिगड़ने की सभी अफवाहें "पूरी तरह निराधार" हैं। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि पूर्व प्रधान मंत्री "पूरी तरह सेहतमंद हैं और उन्हें सारी मेडिकल सुविधाएँ मिल रही हैं।"
वहीं, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि इमरान खान जेल में अधिकांश कैदियों से बेहतर सुविधाएं पा रहे हैं। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि इमरान को जेल में "फाइव-स्टार होटल" जैसा मेन्यू, एक टेलीविजन, वर्जिश उपकरण और एक मखमली गद्दा (velvet mattress) उपलब्ध है, जिसे पीटीआई ने झूठ करार दिया है।

गौरतलब है कि खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी सहित कई पीटीआई नेताओं को भी पिछले दिनों इमरान खान से मिलने की अनुमति नहीं दी गई थी, जिससे परिवार की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।

इमरान के लिए पाकिस्तान में इतनी दिवानगी क्यों

इमरान खान की लोकप्रियता का आधार केवल राजनीति नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय नायक के रूप में उनकी छवि है जो क्रिकेट की दुनिया से शुरू हुई। 1992 में क्रिकेट विश्व कप जिताने वाले कप्तान के रूप में उन्होंने देश के युवाओं और व्यापक जनसमूह के बीच एक अटूट विश्वास स्थापित किया। राजनीति में आने के बाद, उन्होंने खुद को भ्रष्टाचार विरोधी और न्याय के एकमात्र मसीहा के रूप में पेश किया। जिसने उन्हें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के लिए एक कट्टर और भावुक समर्थक आधार दिया। 
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यह लोकप्रियता आज भी स्पष्ट रूप से दिखती है, जब जेल में होने के बावजूद, उनकी पार्टी के कार्यकर्ता और परिवार के सदस्य उनके समर्थन में नियमित रूप से विरोध प्रदर्शन करते रहते हैं, जो उनके जमीनी स्तर के प्रभाव को प्रमाणित करता है। पाकिस्तान सरकार और सेना उन्हें सख्त नापसंद करती है। इसलिए इमरान समर्थकों पर कार्रवाई भी होती रहती है।
कैद में होने के बावजूद इमरान खान का राजनीतिक कद कम नहीं हुआ है, बल्कि कई मायनों में बढ़ा है। उनके बेटे कासिम खान द्वारा उन्हें 'पाकिस्तान का सबसे लोकप्रिय राजनीतिक नेता' बताना उनके निरंतर महत्व को रेखांकित करता है। सरकार द्वारा उन्हें कथित तौर पर डेथ सेल में रखने और परिवार व यहां तक कि खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री को भी उनसे मिलने से रोकने के प्रयास यह दर्शाते हैं कि सत्ताधारी दल भी उनकी लोकप्रियता और जेल के भीतर से उनके राजनीतिक प्रभाव की शक्ति को पहचानते हैं। 
एकांतवास और सूचना के पूर्ण ब्लैकआउट ने उन्हें विपक्ष के लिए एक शक्तिशाली राजनीतिक शहीद में बदल दिया है, जिससे उनके समर्थकों के बीच आक्रोश और सहानुभूति की लहर पैदा हुई है, जो उनकी निरंतर लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण है।