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एफ़एटीएफ़ से कब तक बचेगा पाक? भारत ने भी दी चेतावनी

पाकिस्तान इस बार तो फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) के तीन सदस्य देशों का साथ पाकर ब्लैक लिस्ट होने से बच गया लेकिन लंबे समय तक उसका बच पाना मुमकिन नहीं दिखता। पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में ही रहेगा या ब्लैक लिस्ट होगा, इस बारे में अंतिम घोषणा इस साल अक्टूबर में होगी। पाकिस्तान को बचाने वाले तीन देशों में चीन, तुर्की और मलेशिया शामिल हैं। गुरुवार को ओरलैंडों में हुई एफ़एटीएफ़ की बैठक में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट किए जाने को लेकर चर्चा हुई।
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इस बार भी चीन, पाकिस्तान की मदद के लिए आगे आया है। बता दें कि आंतकी संगठन हाफ़िज सईद को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के भारत के प्रयासों में चीन कई बार रोड़े अटका चुका था लेकिन अंतत: भारत को इसमें सफलता मिली थी। इसके अलावा पड़ोसी मुल्क आर्थिक संकट से जूझ रहा है और उसके हालात बेहद ख़राब हैं। 
भारत की ओर से गए प्रतिनिधिमंडल में शामिल वित्तीय ख़ुफ़िया विभाग के प्रमुख पीके मिश्रा ने एफ़एटीएफ़ की बैठक में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट किये जाने को लेकर दबाव डाला। भारत की ओर से आतंकवादी हाफ़िज़ सईद की संस्था फ़लाह-ए-इंसानियत और शाहिद महमूद के बारे में ताज़ा सबूत दिए गए।
बैठक में भारत की ओर से कहा गया कि पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी संगठन लगातार जम्मू-कश्मीर के अलावा अन्य राज्यों में भी अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
बता दें कि एफ़एटीएफ़ अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के वित्तपोषण की निगरानी करने वाली संस्था है। इसके कुल 38 सदस्य देश हैं, जिनमें भारत, अमरीका, रूस, ब्रिटेन, चीन भी शामिल हैं। पाकिस्तान अक्टूबर 2018 से ही एफ़एटीएफ़ की ग्रे लिस्ट में है। ऐसा पाकिस्तान के आतंकवाद को किए जाने वाले वित्त पोषण और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने की आशंका को देखते हुए किया गया था।
एफ़एटीएफ़ ने बेहद सख़्त शब्दों में पाकिस्तान से कहा है कि वह अंतिम समय सीमा समाप्त होने से पहले कार्य योजना को लागू करे। एफ़एटीएफ़ ने पहले भी कहा था कि पाकिस्तान पूरी तरह से आतंक का आर्थिक समर्थन रोकने में नाकाम रहा है।
हालाँकि पाकिस्तान ख़ुद को ब्लैक लिस्ट होने से बचाने के लिए क़दम उठाता दिख रहा है। पुलवामा में आतंकी हमले के बाद जब भारत ने वैश्विक स्तर पर यह मामला उठाया था और इस हमले में हाफ़िज़ सईद के होने का आरोप लगाया था। तब पाकिस्तान को कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
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पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने हाफ़िज़ सईद के संगठनों जमात-उद-दावा और फ़लाह-ए-इंसानियत फ़ाउंडेशन के मुख्यालय को अपने कब्जे में ले लिया था। इसके अलावा भी इमरान ख़ान सरकार ने सैकड़ों मदरसों का नियंत्रण अपने हाथ में लिया था और आतंकवादी समूहों से जुड़े कई लोगों की धरपकड़ की थी।

बता दें कि एफ़एटीएफ़ कह चुका है कि वह इस बात को लेकर चिंतित है कि पाकिस्तान दो बार आंतकवाद के ख़िलाफ़ कार्य योजना को पूरा करने में विफल रहा है। इस बार पाकिस्तान से कहा गया है कि वह अक्टूबर 2019 तक कार्य योजना को पूरा कर ले। वरना, एफ़एटीएफ़ को अपने अगले क़दम के बारे में फ़ैसला लेना होगा। 

एफ़एटीएफ़ की इस चेतावनी को पाकिस्तान के लिए ख़तरे की घंटी माना जा रहा है। अगर एफ़एटीएफ़ पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करता है तो इसका सीधा असर होगा कि वैश्विक दुनिया में पाक पूरी तरह अलग-थलग हो जाएगा।
एफ़एटीएफ़ की ओर से पहले भी कहा जा चुका है कि आतंक का वित्त पोषण रोकने में पाकिस्तान ने ठीक प्रदर्शन नहीं किया है। जमात-उद-दावा, लश्कर-ए-तैयबा और तालिबान से जुड़े आतंकी संगठनों को आर्थिक आधार पर कमजोर करने के लिए पाकिस्तान ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
भारत ने भी पाकिस्तान को चेताते हुए कहा है कि ऐसी उम्मीद है कि वह एफ़एटीएफ़ की चेतावनी के बाद उसकी कार्य योजना को बेहतर ढंग से लागू करेगा। भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद को लेकर कड़े एक्शन लेने को कहा है।

आर्थिक मोर्चे पर हालात बेहद ख़राब

बता दें कि पाकिस्तान के आर्थिक हालात बेहद ख़राब हैं और मुल्क कभी भी दिवालिया हो सकता है। पाकिस्तान को जीडीपी और ऋण के अनुपात को कम करना पड़ेगा। पैसों की कमी से जूझ रही इमरान ख़ान सरकार कोशिश कर रही है कि उसे कुछ बेलआउट पैकेज मिल जाए। आईएमएफ़ ने पाकिस्‍तान को इन ख़राब हालात से उबारने के लिए छह बिलियन डॉलर के बेलआउट पैकेज को मंजूरी दे दी है। लेकिन उसके बाद भी पड़ोसी देश के सामने चुनौतियाँ कम नहीं हैं।
पाकिस्तान में हाल ही में बजट पेश किया गया। इसके मुताबिक़, पाकिस्तान पर इतना कर्ज है कि उसके बजट का बड़ा हिस्सा यानी 42 फ़ीसदी तो कर्ज का ब्याज चुकाने में ख़र्च हो जाता है. जबकि भारत अपने बजट का 18 फ़ीसदी कर्ज चुकाने पर ख़र्च करता है। वित्त वर्ष 2018-19 में पाकिस्तान की जीडीपी सिर्फ़ 3.3 फ़ीसदी की दर से आगे बढ़ रही है।
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पाकिस्‍तान का विदेशी मुद्रा भंडार भी घटकर 8.8 अरब डॉलर पर पहुँच गया है। पाकिस्‍तान सरकार ने सेंट्रल बैंक स्‍टेट बैंक ऑफ पाकिस्‍तान से इस वित्‍त वर्ष में अब तक 4.8 लाख करोड़ रुपये का कर्ज ले लिया है। सेंट्रल बैंक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर महँगाई को नहीं रोका गया तो देश के आर्थिक हालात क़ाबू से बाहर हो जाएँगे।
एफ़एटीएफ़ की चेतावनी के बाद यह तय है कि पाकिस्तान को अगर ब्लैक लिस्ट होने से बचना है तो उसे आतंकवाद के ख़िलाफ़ ठोस क़दम उठाने ही होंगे। एफ़एटीएफ़ ने उसे इस बार तो अस्थायी राहत दे दी है लेकिन कुछ ही महीनों के भीतर पाकिस्तान को यह दिखाना होगा कि वह वास्तव में आतंकवादी संगठनों के ख़िलाफ़ सख़्त है, वरना फिर उसकी मुश्किलें काफ़ी हद तक बढ़ जाएँगी। क्योंकि ब्लैक लिस्ट में आने के बाद उसे बाहर से जो कर्ज मिलने की उम्मीद है, वह भी ख़त्म हो जाएगी।
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