सत्ता से हटाए जाने के दो साल बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। नई दिल्ली से वर्चुअल संबोधन में उन्होंने दावा किया कि 2024 में हुआ आंदोलन कोई छात्र आंदोलन नहीं था, बल्कि उनकी सरकार को हटाने के लिए पहले से रची गई एक सुनियोजित साजिश थी। उन्होंने कहा कि चाहे उन्हें बांग्लादेश लौटने पर गिरफ्तार कर लिया जाए या उनकी हत्या कर दी जाए, फिर भी वह अपने देश और अपने लोगों के बीच जरूर लौटेंगी।

शेख हसीना ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी सरकार को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध राजनीतिक अभियान के जरिए सत्ता से बेदखल किया गया। अपने संबोधन में हसीना ने कहा कि जुलाई-अगस्त 2024 का आंदोलन शुरुआत से ही शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं था। उनके मुताबिक़, आरक्षण विवाद को एक बहाने की तरह इस्तेमाल किया गया और बाद में इसे उनकी सरकार को हटाने की एकमात्र मांग में बदल दिया गया।
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उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने छात्रों से बातचीत की कोशिश की थी। हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की गई थी और छात्र नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन को राजनीतिक दिशा दे दी गई। हसीना का दावा था कि पूरी प्रक्रिया पहले से तय की गई थी और इसका उद्देश्य चुनाव के बिना सत्ता परिवर्तन कराना था।

'यह सुनियोजित सत्ता परिवर्तन था'

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि जो कुछ छात्र आंदोलन के रूप में दिखाई दिया, वह वास्तव में सरकार बदलने की एक 'सुनियोजित योजना' थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार के तत्कालीन प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के बयानों से भी इस साज़िश की सच्चाई सामने आती है। उनका कहना था कि आंदोलन को इस तरह तैयार किया गया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को दरकिनार कर सत्ता पर कब्जा किया जा सके।

अंतरिम सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

शेख हसीना ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को अवैध बताते हुए उस पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 18 जुलाई 2024 को हिंसा और मौतों की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित किया था, लेकिन सरकार बदलते ही उस जांच को रोक दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया, 'अगर किसी को सच्चाई से डर नहीं था तो जांच पूरी क्यों नहीं होने दी गई?'

हसीना ने आरोप लगाया कि उनके सत्ता से हटने के बाद अवामी लीग के नेताओं, कार्यकर्ताओं, पुलिस अधिकारियों, पत्रकारों, वकीलों, न्यायाधीशों और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई दोषी चरमपंथियों को रिहा कर दिया गया है।

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर भी साधा निशाना

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार के दौरान बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है। उनके अनुसार, कई उद्योग बंद हो गए हैं। उद्योगपति देश छोड़कर चले गए या छिपने को मजबूर हैं। बैंकिंग व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। गरीबी बढ़ी है। निजी निवेश में गिरावट आई है। आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार हर महीने सैकड़ों करोड़ टका उधार लेकर व्यवस्था चला रही है।

'मुजीबुर रहमान की विरासत मिटाने की कोशिश'

अपने संबोधन की शुरुआत में शेख हसीना ने बांग्लादेश के संस्थापक और अपने पिता शेख मुजीबुर रहमान को श्रद्धांजलि दी। 1975 में हुए सैन्य तख्तापलट में अपने परिवार के कई सदस्यों की हत्या को याद करते हुए वह भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बांग्लादेश के इतिहास से शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को मिटाना चाहते हैं। उन्होंने अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को हटाने की भी मांग की।

'गिरफ्तार कर लें या मार दें, फिर भी लौटूंगी'

जब उनसे बांग्लादेश लौटने की संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'हो सकता है कि मुझे लौटते ही गिरफ्तार कर लिया जाए। यह भी हो सकता है कि मेरी हत्या कर दी जाए। लेकिन मुझे अपने लोगों के पास लौटना ही है। मुझे अपने देश पर भरोसा है।' उन्होंने कहा कि उनकी वापसी सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि देश में सुरक्षा, विकास, शांति और लोकतंत्र बहाल करने के लिए होगी।

2024 से भारत में रह रही हैं

शेख हसीना अगस्त 2024 में सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से वह यहीं रह रही हैं। बांग्लादेश की सरकार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी है, जबकि हसीना अपने खिलाफ दर्ज मामलों को राजनीतिक बताते हुए लगातार उन्हें खारिज करती रही हैं।

हसीना के बेटे ने भी उठाए सवाल

कार्यक्रम में शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने भी 2024 के आंदोलन के दौरान हुई मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने क़रीब 1400 मौतों का ज़िक्र किया है, जबकि बांग्लादेश सरकार का आँकड़ा इससे काफ़ी कम है। वाजेद ने कहा कि उनकी पार्टी और वकीलों ने संयुक्त राष्ट्र से बार-बार मृतकों की सूची मांगी, लेकिन अब तक पूरी सूची उपलब्ध नहीं कराई गई।
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट केवल 15 अगस्त 2024 तक की घटनाओं को कवर करती है, जबकि उसके बाद भी हिंसा और मौतों की घटनाएं होती रहीं।

शेख हसीना के इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर 2024 के आंदोलन की प्रकृति, सत्ता परिवर्तन, लोकतंत्र और जवाबदेही को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। हालाँकि, उनके दावों पर वर्तमान बांग्लादेश सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, 2024 के आंदोलन को लेकर अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने नैरेटिव हैं और इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद अब भी बने हुए हैं।