पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के अलावा उनके भाई माहेर अल-असद और उनके कज़न ब्रदर आतिफ़ नजीब को भी मौत की सज़ा सुनाई गई है। 2011 में शुरू हुए विद्रोह के बाद पाँच लाख से ज़्यादा लोग मारे गए। 2024 में तख्तापलट के बाद असद ने मॉस्को में शरण ली।
सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को मानवता के खिलाफ अपराधों और युद्ध अपराधों से जुड़े मामलों में मौत की सजा सुनाई गई है। अदालत ने यह सजा उनकी गैरमौजूदगी में सुनाई। असद के छोटे भाई और पूर्व सैन्य कमांडर माहेर अल-असद तथा कज़न ब्रदर आतिफ नजीब को भी इसी मामले में मौत की सजा दी गई है।
यह फ़ैसला सीरिया की नई अंतरिम सरकार द्वारा पूर्व असद शासन के अधिकारियों और सुरक्षा तंत्र से जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ शुरू की गई क़ानूनी कार्रवाई के तहत आया है। बशर अल-असद फिलहाल सीरिया में नहीं हैं। दिसंबर 2024 में विद्रोही ताक़तों के दमिश्क की ओर बढ़ने के बाद वह अपने परिवार के साथ रूस चले गए थे और उन्हें मॉस्को में शरण मिली।
2011 के विद्रोह से शुरू हुआ था खूनी संघर्ष
सीरिया में बशर अल-असद के शासन के ख़िलाफ़ 2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। दक्षिणी सीरिया के दारा इलाके में सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद आंदोलन तेजी से फैल गया था।
बाद में यह आंदोलन एक लंबे और बेहद हिंसक गृहयुद्ध में बदल गया। करीब 13-14 साल तक चले इस संघर्ष में पांच लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जबकि लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ी। सीरिया की क़रीब 2.3 करोड़ की आबादी वाले देश में शुरू हुआ यह संघर्ष धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय ताक़तों और अलग-अलग सशस्त्र संगठनों के हस्तक्षेप वाला जटिल युद्ध बन गया था।
अदालत ने बशर अल-असद के रिश्तेदार आतिफ नजीब को भी मौत की सजा सुनाई है। 2011 में नजीब दक्षिणी सीरिया के दारा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा शाखा के प्रमुख थे और बाद में ब्रिगेडियर जनरल के पद पर रहे।
अदालत के अनुसार, नजीब ने दारा में विद्रोह को दबाने के लिए चलाए गए अभियान में बड़ी भूमिका निभाई। अदालत ने उन पर 15 साल से कम उम्र के बच्चों की जानबूझकर हत्या और ऐसी यातना देने का आरोप मढ़ा, जिससे लोगों की मौत हुई। अदालत ने इन कृत्यों को मानवता के खिलाफ अपराध माना और उन्हें सबसे कठोर सजा यानी मौत की सजा सुनाई।
बशर अल-असद के छोटे भाई माहेर अल-असद लंबे समय तक सीरियाई सैन्य तंत्र में एक प्रभावशाली व्यक्ति रहे। उन पर सरकार विरोधी आंदोलन और विद्रोह को दबाने के लिए सुरक्षा बलों तथा सैन्य इकाइयों के इस्तेमाल में भूमिका निभाने के आरोप लगते रहे हैं। अब नई सीरियाई सत्ता द्वारा पूर्व शासन के ख़िलाफ़ शुरू की गई क़ानूनी प्रक्रिया में माहेर को भी मौत की सजा सुनाई गई है।
असद परिवार का पाँच दशक तक रहा था शासन
सीरिया में असद परिवार का शासन पांच दशक से ज्यादा समय तक चला। पहले हाफिज अल-असद ने सत्ता संभाली और उनके बाद 2000 में उनके बेटे बशर अल-असद राष्ट्रपति बने।
बशर अल-असद के शासन के खिलाफ 2011 में शुरू हुए आंदोलन ने अंततः पूरे देश को गृहयुद्ध में झोंक दिया। सरकार के खिलाफ लड़ने वाले कई सशस्त्र समूहों के अलावा विदेशी शक्तियां भी संघर्ष में शामिल हुईं। दिसंबर 2024 में विद्रोही ताक़तों के दमिश्क पर कब्जे के बाद असद शासन का अंत हो गया। इसके बाद असद रूस चले गए।
यातना देने, जबरन ग़ायब करने के आरोप
गृहयुद्ध के दौरान असद सरकार पर बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे। अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने सरकारी बलों पर गैरकानूनी हत्याओं, यातना, मनमानी हिरासत, जबरन गायब करने और नागरिक इलाकों पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
पूर्व सरकार पर जेलों में कैदियों को यातना देने और हिरासत में लोगों की मौत के मामलों के भी आरोप लगे। यूरोप के कई देशों में असद सरकार से जुड़े पूर्व सुरक्षा अधिकारियों के खिलाफ भी कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर मुकदमे चले हैं। हालांकि, सीरियाई संघर्ष में केवल सरकार पर ही आरोप नहीं लगे। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने असद शासन के अलावा अलग-अलग सशस्त्र विपक्षी समूहों और अन्य पक्षों द्वारा भी मानवाधिकार उल्लंघनों को दर्ज किया था।
रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के आरोप भी
असद सरकार पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के गंभीर आरोप भी लगे। ऑर्गनाइजेशन फॉर द प्रोहिबिशन ऑफ केमिकल वेपन्स यानी ओपीसीडब्ल्यू और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े जांच तंत्रों ने सीरिया में कई रासायनिक हमलों की जांच की।
2013 में दमिश्क के पास ईस्टर्न घूटा इलाके में हुए सरिन गैस हमले को लेकर भी सीरियाई सरकारी बलों पर आरोप लगाए गए थे। बाद में इस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और कानूनी कार्रवाई की कोशिशें हुईं। असद के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े कुछ मामलों में अंतरराष्ट्रीय अदालतों और देशों में भी कानूनी कार्रवाई की मांग उठती रही है।
नई सरकार ने पूर्व शासन के खिलाफ शुरू की कार्रवाई
असद शासन के पतन के साथ ही सीरिया में सत्ता परिवर्तन हुआ। नई अंतरिम सत्ता ने पूर्व सरकार के अधिकारियों और सुरक्षा तंत्र से जुड़े लोगों के खिलाफ मुकदमे शुरू किए हैं। बशर अल-असद के खिलाफ सुनाया गया यह फैसला इस प्रक्रिया में अहम माना जा रहा है क्योंकि वह देश से बाहर हैं और उनके खिलाफ मुकदमा गैरहाजिरी में चला।लाखों विस्थापित लोगों के लिए न्याय का सवाल
सीरिया का गृहयुद्ध सिर्फ सत्ता संघर्ष नहीं था। इसने लाखों परिवारों को प्रभावित किया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और लाखों लोग तुर्की, लेबनान, जॉर्डन और यूरोप सहित दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शरण लेने के लिए मजबूर हुए। अब पूर्व शासन के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमों के जरिए नई सीरियाई सत्ता यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि युद्ध के दौरान हुए गंभीर अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाएगा।
हालांकि, असद और उनके भाई माहेर जैसे देश से बाहर मौजूद लोगों के खिलाफ सुनाई गई सजा को लागू करना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। फिलहाल यह फैसला सीरिया में असद शासन के दौरान हुए कथित अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम के रूप में सामने आया है।