US Iran Israel Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अगले सप्ताह ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत की घोषणा की है। लेकिन इससे कुछ नतीजा निकलेगा या नई शर्तें सामने आएंगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के अधिकारी अगले सप्ताह बातचीत करेंगे, जिससे इसराइल और तेहरान के बीच हाल के 12-दिवसीय संघर्ष के बाद दीर्घकालिक शांति की उम्मीद जगी है। यह बयान नीदरलैंड में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान दिया गया, जहां ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के साथ परमाणु समझौते की वार्ता फिर से शुरू करने में विशेष रुचि नहीं रखते, क्योंकि अमेरिकी हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट कर दिया है। हालांकि इस बातचीत से यह उम्मीद नहीं है कि कोई नतीजा निकलेगा। क्योंकि ईरान ने साफ कर दिया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम जारी रहेगा। ऐसे में यूएस क्या नई शर्तें लगाएगा या फिर ईरान अड़ा रहेगा। ईरान की ओर से इस बातचीत को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखाया गया है।
ट्रंप का बयान और ईरान के कदम
ट्रंप ने मंगलवार (24 जून 2025) को घोषित युद्धविराम को "बेहद अच्छा" बताया और कहा कि ईरान अब परमाणु बम नहीं बनाएगा और न ही यूरेनियम संवर्धन करेगा। हालांकि, ईरान ने जोर देकर कहा कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को नहीं छोड़ेगा। ईरानी संसद ने बुधवार को एक प्रस्ताव को तेजी से मंजूरी दी, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सहयोग पर फिलहाल पाबंदी लगा दी गई और इसके निरीक्षकों को देश में प्रवेश से रोक दिया गया।ईरान के राष्ट्रपति की एमबीएस से बात
युद्धविराम की घोषणा के बाद दोनों पक्षों ने इसे बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) से बातचीत में कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ मतभेदों को सुलझाने के लिए तैयार है। दूसरी ओर, इसराइली रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज़ ने अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ से कहा कि इसराइल युद्धविराम का सम्मान करेगा, बशर्ते ईरान इसका उल्लंघन न करे।ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी प्राथमिकता अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को ईरान के परमाणु स्थलों पर वापस लाना है ताकि उनकी स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी हमलों को कूटनीति को पटरी से उतारने वाला बताया और कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है।
चीन और रूस, ईरान के करीबी सहयोगी, ने युद्धविराम का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि यह स्थायी होगा। ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत "उम्मीद जगाने वाली" है और एक व्यापक शांति समझौते की दिशा में काम किया जा रहा है।
ईरान-यूएस बातचीत में क्या शर्तें रखी जा सकती हैं
संभावना है कि बातचीत में ईरान से यूरेनियम संवर्धन को सीमित करने की मांग की जाएगी, जैसा कि ओमान द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट में सुझाया गया है, जिसमें एक से तीन साल तक संवर्धन निलंबन और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षणों की शर्त शामिल है। ईरान ने पहले संकेत दिया है कि वह सीमित संवर्धन निलंबन और आईएईए निरीक्षणों के लिए सहमत हो सकता है, बशर्ते इसराइल युद्धविराम का पालन करे और अमेरिका कुछ प्रतिबंधों को हटाए।
ट्रंप की टिप्पणियों से पता चलता है कि वह कूटनीति के लिए खुले हैं, लेकिन उनकी "अधिकतम दबाव" नीति कायम है। उनका ईरानी तेल निर्यात प्रतिबंध अभी भी लागू है। हालांकि उन्होंने चीन से कहा कि वो ईरान से तेल खरीदता रहे। ट्रंप ने संकेत दिया कि वह ईरान को पुनर्निर्माण के लिए कुछ आर्थिक राहत दे सकते हैं, लेकिन इसके बदले में परमाणु हथियारों से पूर्ण परहेज की मांग करेंगे।
ईरान ने संकेत दिया है कि वह परमाणु वार्ता में लचीलापन दिखा सकता है, बशर्ते अमेरिका कुछ प्रतिबंधों को हटाए और इसराइल हमले बंद करे।
तेहरान ने शांतिपूर्ण परमाणु अधिकारों की मान्यता और प्रतिबंधों में राहत की मांग की है। इसके अलावा, ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को वार्ता के दायरे से बाहर रखना चाहता है।
बातचीत में सफलता की कितनी संभावना
युद्धविराम का स्थिर रहना और दोनों पक्षों का आपसी विश्वास बातचीत की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा। ट्रंप की मध्यस्थता और कतर की भूमिका ने युद्धविराम को संभव बनाया, जो एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच गहरे अविश्वास, खासकर ट्रंप के 2018 में परमाणु समझौते से हटने के बाद, बातचीत को अभी भी जटिल बना सकता है। ईरान की संसद द्वारा आईएईए के साथ सहयोग निलंबित करने का फैसला भी एक बाधा है।
ईरान-यूएस बातचीत की सफलता कई वजहों पर निर्भर
यूएस-ईरान बातचीत मध्य पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है, लेकिन इसकी सफलता कई वजहों पर निर्भर करेगी। युद्धविराम का पालन, दोनों पक्षों की लचीलापन, और मध्यस्थों की प्रभावी भूमिका। नई शर्तें, जैसे सीमित परमाणु संवर्धन और प्रतिबंधों में राहत, बातचीत का मुख्य मुद्दा हो सकती हैं, लेकिन इसराइल और ईरान के बीच गहरे अविश्वास और परस्पर विरोधी लक्ष्य इसे चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। ट्रंप की कूटनीति और दबाव की रणनीति इस बातचीत के नतीजे को तय करेगी। लेकिन खुफिया रिपोर्टों और ईरान की दृढ़ता को देखते हुए, एक व्यापक समझौता अभी भी अनिश्चित है।
कतर की भूमिका
ट्रंप ने युद्धविराम की मध्यस्थता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी और कतरी प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने ईरान को समझौते के लिए राजी करने में मदद की। मिडिल ईस्ट में शांति को लेकर कतर की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, युद्धविराम शुरू होने के कुछ घंटों बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगाया। इसराइल ने तेहरान के पास एक रडार सिस्टम पर हमला किया, जबकि ईरान ने कतर में अमेरिकी हवाई अड्डे पर मिसाइल हमले किए, जिसे कतरी वायु रक्षा ने विफल कर दिया।
ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि इसराइल के हमलों में 610 लोग मारे गए और लगभग 5,000 घायल हुए, जबकि इसराइल में ईरानी मिसाइल हमलों से 28 लोगों की मौत हुई। इसके बावजूद, दोनों देश अब सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं। इजरायल में बेन गुरियन हवाई अड्डा फिर से खुल गया है, और ईरान ने भी अपने हवाई क्षेत्र को खोलने की घोषणा की है।