H-1B visa Trump order 2026- ट्रंप प्रशासन ने एक साल के लिए एच 1 बी वीज़ा पर फीस और नियम कानून और कड़े कर दिये हैं। ट्रंप के नए आदेश में आरोप लगाया गया है कि कुछ कंपनियों ने बड़ी संख्या में कुशल अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया है। इसके तहत ऐसी अमेरिकी कंपनियों के H-1B वीजा आवेदनों की ज्यादा सख्ती से जांच की जाएगी, जो हाल में अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं या भविष्य में ऐसे कर्मचारियों की नौकरियां कम करने की योजना बना रही हैं। यह कदम ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन ने कुछ नए H-1B कर्मचारियों के लिए 1 लाख डॉलर की फीस की व्यवस्था को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है।
अमेरिकी कर्मचारियों को निकालकर H-1B कर्मचारियों को रखने का आरोप
ट्रंप के नए आदेश में आरोप लगाया गया है कि कुछ कंपनियां बड़ी संख्या में कुशल अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बाद H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं। आदेश के मुताबिक, कई मामलों में विदेशी कर्मचारियों को कम कौशल और कम वेतन वाली नौकरियों में लगाया जाता है।आदेश में दावा किया गया है कि 2022 से 2026 के बीच 8 लाख से 13 लाख तक अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी हुई। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ कंपनियों ने नौकरी से निकाले गए अमेरिकी कर्मचारियों से उनके स्थान पर आने वाले विदेशी कर्मचारियों को प्रशिक्षण तक दिलवाया। ये आंकड़े और आरोप ट्रंप प्रशासन के आदेश में दिए गए हैं।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कुछ IT स्टाफिंग और आउटसोर्सिंग कंपनियां H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए करती हैं। दूसरी ओर, कारोबारी और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े समूहों का कहना है कि H-1B कार्यक्रम कंपनियों को उन क्षेत्रों में विशेषज्ञ प्रतिभा उपलब्ध कराता है, जहां स्थानीय स्तर पर पर्याप्त कुशल कर्मचारी नहीं मिलते।
कंपनियों पर सीधा प्रतिबंध नहीं
नए आदेश का मतलब यह नहीं है कि जिस कंपनी ने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है, वह H-1B कर्मचारियों को नियुक्त ही नहीं कर सकेगी।
इसके बजाय अमेरिकी प्रशासनिक एजेंसियों को ऐसे मामलों में अतिरिक्त जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग, श्रम विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को H-1B आवेदन, Labour Condition Application (LCA), वीजा और अमेरिका में प्रवेश से जुड़े मामलों में यह देखना होगा कि संबंधित कंपनी ने पिछले एक साल में समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या भविष्य में ऐसी छंटनी की योजना बनाई है।अमेरिकी श्रम विभाग को पहले से दाखिल LCAs के आंकड़ों की समीक्षा शुरू करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। समीक्षा में यह तय किया जाएगा कि किसी कंपनी के खिलाफ आगे कार्रवाई की जरूरत है या नहीं।
भारतीय IT पेशेवरों पर क्यों पड़ सकता है असरः H-1B कार्यक्रम भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत H-1B वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी देशों में है। India Today के अनुसार, करीब चार में से तीन स्वीकृत H-1B वीजा भारतीय नागरिकों को मिलते हैं। इसलिए यदि अमेरिकी कंपनियां हाल की छंटनी के बाद H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करने में ज्यादा सावधानी बरतती हैं, तो भारतीय IT पेशेवरों पर इसका असर पड़ सकता है।विशेष रूप से उन भारतीय कर्मचारियों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है जिनका संभावित अमेरिकी नियोक्ता पहले ही उसी तरह के पदों पर अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी कर चुका हो।
हालांकि, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी एजेंसियां नए आदेश को किस तरह लागू करती हैं। सरकार ने संबंधित विभागों को इसके लिए विस्तृत नियम और संचालन संबंधी दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा है।
AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों पर क्या असर?
Foundation for India and Indian Diaspora Studies (FIIDS) ने आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अत्यधिक विशेषज्ञता वाले कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों को तत्काल घरेलू स्तर पर उपयुक्त कर्मचारी नहीं मिलते। FIIDS ने खास तौर पर AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ कर्मचारियों की जरूरत का उल्लेख किया और कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों तथा उच्च-कुशल विदेशी पेशेवरों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना समाधान नहीं है। यह संस्था का पक्ष है, न कि अमेरिकी सरकार का निष्कर्ष।
ट्रंप ने H-1B पर 1 लाख डॉलर की फीस भी बढ़ाई
नए जांच संबंधी आदेश के साथ ही ट्रंप प्रशासन ने H-1B पर लगाई गई 1 लाख डॉलर की भुगतान आवश्यकता को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है। यह व्यवस्था सितंबर 2025 में शुरू की गई थी और अब इसे 21 सितंबर 2027 तक बढ़ाया गया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, 2025 में यह व्यवस्था लागू होने के बाद बड़ी IT आउटसोर्सिंग कंपनियों के H-1B रजिस्ट्रेशन में 92 प्रतिशत की गिरावट आई। प्रशासन ने बताया कि इन बड़ी IT स्टाफिंग और आउटसोर्सिंग कंपनियों का संयुक्त H-1B रजिस्ट्रेशन 24,946 से घटकर 2,055 रह गया।
व्हाइट हाउस ने यह भी कहा है कि FY2027 में कम से कम अमेरिकी मास्टर डिग्री वाले उम्मीदवारों का हिस्सा H-1B रजिस्ट्रेशन में 45.1 प्रतिशत से बढ़कर 66.1 प्रतिशत हुआ। हालांकि, ये आंकड़े और उनके प्रभाव की व्याख्या अमेरिकी प्रशासन के आधिकारिक दस्तावेज में दी गई है।
1 लाख डॉलर की फीस पर अदालत में चुनौती
H-1B फीस बढ़ाने का मामला अभी कानूनी विवाद में भी है। एक संघीय न्यायाधीश ने जून 2026 में प्रशासन की 1 लाख डॉलर की फीस लगाने की कार्रवाई को अधिकार से बाहर बताते हुए रोक दिया था। बाद में अपील अदालत ने उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया। अमेरिकी Chamber of Commerce की ओर से भी इस नीति को चुनौती दी गई है। इसलिए फीस बढ़ाने की अवधि बढ़ा दिए जाने का मतलब यह नहीं है कि अदालतों में चल रही चुनौती खत्म हो गई है। मौजूदा कानूनी स्थिति के कारण फीस की वास्तविक वसूली अलग सवाल है।
भारतीयों के लिए बड़ा सवाल
ट्रंप प्रशासन के नए कदमों से H-1B कार्यक्रम में दो स्तरों पर बदलाव दिखाई दे रहा है—पहला, विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका लाने की लागत और शर्तों को कड़ा करना; दूसरा, उन कंपनियों की ज्यादा जांच करना जो अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के बाद H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं। चूंकि भारतीय नागरिक H-1B कार्यक्रम में सबसे बड़ा समूह हैं, इसलिए अमेरिकी इमिग्रेशन नीति में बदलाव का भारतीय IT पेशेवरों, अमेरिका में करियर बनाने वाले छात्रों और भारत की IT कंपनियों पर असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव नए नियमों के लागू होने और अदालतों में लंबित मामलों के नतीजों पर निर्भर करेगा।ट्रंप के नए आदेश ने H-1B वीजा पर पूर्ण रोक नहीं लगाई है। बल्कि अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने वाली कंपनियों के H-1B आवेदनों पर अतिरिक्त जांच का रास्ता खोला है, जबकि 1 लाख डॉलर वाली H-1B व्यवस्था को 21 सितंबर 2027 तक बढ़ाया गया है।