संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र जाँच आयोग ने ग़ज़ा में इसराइल द्वारा बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने और मारने का गंभीर आरोप लगाया है। निशाना बनाए जाने से बड़े पैमाने पर बच्चों की मौत हुई और वे घायल हुए। आयोग ने कहा कि ये घटनाएँ नरसंहार, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर 2023 से इसराइल के गजा पर युद्ध शुरू होने के बाद वहां मारे गए कुल लोगों में करीब 30 प्रतिशत बच्चे थे। हालाँकि इसराइल ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और रिपोर्ट को 'पक्षपातपूर्ण और मानहानि करने वाला'बताया है।

संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग ने यह रिपोर्ट जारी की है। आयोग 2021 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा गठित किया गया था और इसका काम इसराइल-फिलिस्तीन संघर्ष से जुड़े मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच करना है।
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रिपोर्ट में क्या कहा गया?

रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2023 में शुरू हुए गजा युद्ध के बाद से मारे गए लोगों में क़रीब 30 प्रतिशत बच्चे थे। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार आयोग के अध्यक्ष श्रीनिवासन मुरलीधर ने कहा कि उपलब्ध सबूत यह संकेत देते हैं कि फिलिस्तीनी बच्चों को इसराइली सुरक्षा बलों द्वारा जानबूझकर निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि युद्धविराम लागू होने के बाद भी बच्चों की मौत और घायल होने की घटनाएं जारी रहीं।

बच्चों पर युद्ध का सबसे ज्यादा असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि गजा में अस्पतालों, प्रसूति केंद्रों और नवजात शिशुओं की देखभाल करने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर हमलों का गंभीर प्रभाव पड़ा। इसके कारण गर्भपात के मामलों में वृद्धि हुई, नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा, जन्मजात विकृतियों का खतरा बढ़ा और मातृ स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। आयोग का कहना है कि इससे फिलिस्तीनी समाज के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों पर भी असर पड़ रहा है।

सहायता रोकने से बढ़ी भूखमरी

रिपोर्ट में इसराइल पर यह भी आरोप लगाया गया कि उसने मानवीय सहायता की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाए, जिससे गजा में बच्चों की स्थिति और खराब हुई।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इसराइल द्वारा सहायता रोके जाने से गजा में खाद्य संकट गहरा गया, कुपोषण और भूख से मौतों में वृद्धि हुई, टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हुए और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध और नाकेबंदी का सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ा है।

50 हजार से ज्यादा बच्चे प्रभावित

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यानी UNICEF के आँकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से 50 हज़ार से अधिक फिलिस्तीनी बच्चे या तो मारे गए हैं या घायल हुए हैं। यूनीसेफ का कहना है कि पिछले आठ महीनों से औसतन प्रतिदिन एक से अधिक फिलिस्तीनी बच्चे की मौत हो रही है।

संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में चेतावनी भी दी थी कि मानवीय संगठनों की गतिविधियाँ सीमित होने से गजा के बच्चे पहले की तुलना में और अधिक असुरक्षित हो गए हैं।

बच्चों की गिरफ्तारी और यातना के आरोप

रिपोर्ट में सिर्फ युद्ध के दौरान हुई मौतों का ही नहीं बल्कि हिरासत में लिए गए बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी ज़िक्र किया गया है। आयोग के अनुसार कई फिलिस्तीनी बच्चों को गिरफ्तार किया गया, हिरासत के दौरान कथित यातनाएं दी गईं, कुछ मामलों में यौन उत्पीड़न और अपमानजनक व्यवहार की शिकायतें सामने आईं।

मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि कई बच्चों को बिना मुकदमे के लंबे समय तक हिरासत में रखा गया। एक फिलिस्तीनी अधिकार संगठन के अनुसार, पिछले वर्ष के अंत तक इसराइली जेलों में बंद आधे से अधिक बच्चों के खिलाफ कोई औपचारिक आरोप या मुकदमा नहीं चल रहा था।

वेस्ट बैंक में भी बच्चों पर असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि गजा के अलावा कब्जे वाले वेस्ट बैंक में भी बच्चों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। जांच आयोग के अनुसार अनाथालयों को नुकसान पहुंचा, स्कूलों और शिक्षा संस्थानों को तबाह किया गया, बच्चों की शिक्षा और मानसिक विकास प्रभावित हुआ और सामाजिक व भावनात्मक सहायता व्यवस्था कमजोर हुई।

आयोग के अध्यक्ष मुरलीधर ने कहा कि यदि आज युद्ध ख़त्म भी हो जाए, तब भी फिलिस्तीनी बच्चों को सामान्य जीवन में लौटने में वर्षों लग सकते हैं। बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार से जुड़ा हुआ है। बच्चों को निशाना बनाना किसी समाज के भविष्य को निशाना बनाने जैसा है।

इसराइल ने आरोपों को किया खारिज

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार इसराइल के जिनेवा मिशन ने रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इसराइल का कहना है कि यह रिपोर्ट एकतरफा है और इसमें हमास की भूमिका को नजरअंदाज किया गया है। इसराइली अधिकारियों ने कहा कि हर बच्चे की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन रिपोर्ट में उन परिस्थितियों और हमास की रणनीतियों का उल्लेख नहीं किया गया जिनके कारण संघर्ष की स्थिति पैदा हुई।

बहरहाल, गजा युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से बहस चल रही है। कई मानवाधिकार संगठन इसराइल पर अत्यधिक सैन्य बल प्रयोग का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि इसराइल का कहना है कि उसकी कार्रवाई हमास के हमलों के जवाब में की जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र की यह नई रिपोर्ट इस बहस को और तेज कर सकती है।