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हथियारों की ख़रीद: क्या अमेरिका में चुनाव बाद ख़ून-ख़राबा होगा?

क्या अमेरिका में गृहयुद्ध की तैयारियाँ चल रही हैं? क्या वहाँ बड़े पैमाने पर चुनाव पश्चात ख़ून-ख़राबा की आशंका है? क्या राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप वाकई चुनाव नतीजा उनके अनुकूल नहीं होने पर उसे नहीं मानेंगे और पद से नहीं हटेंगे? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि अमेरिका में बड़े पैमाने पर हथियारों की ख़रीद हुई है। एक अनुमान के मुताबिक़, अमेरिका में बीते दिनों 50 लाख बंदूकें खरीदी गई हैं।  
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, हालत इतनी बुरी है कि अमेज़ॉन ने अपने सेल्स स्टोर से तमाम तरह के हथियार हटा लिए हैं। बता दें, अमेरिका में एक सीमा के स्तर तक हथियारों की ख़रीद के लिए लाइसेंस की ज़रूरत नहीं पड़ती है और लाइसेंस लेना भी आसान है। वहां हथियार काउंटर पर मिलते हैं। नतीजा यह है कि अमेरिका में प्रति 100 व्यक्ति पर 120.5 बंदूकें हैं, जो इस मामले में दूसरे नंबर पर यमन का दूनी है। 

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ख़ून-ख़राबा?

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, आर्म्ड कनफ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट और मिलिशियावॉच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पेनसिलवेनिया, जॉर्जिया, मिशिगन और विस्कोन्सिन जैसे बैटलग्राउंड स्टेट्स यानी कांटे की टक्कर वाले राज्यों में हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। 

दक्षिणपंथी मिलिशिया यानी हथियारबंद समूहों से डोनल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन की नज़दीकी जगज़ाहिर है। इसके अलावा ट्रंप ने पहले ही एक बार संकेत दिया था कि कोई ज़रूरी नहीं कि चुनाव के नतीजे उनके अनुकूल न हुए तो वे उसे मान ही लें।

ट्रंप के समर्थक?

ये मिलिशिया या हथियारबंद खुले आम हिंसा और ख़ून-ख़राबा की वकालत करते हैं। कम से कम 9 मिलिशिया ऐसे हैं जो खुले आम ट्रंप का समर्थन भी करते हैं। इनमें से कुछ चर्चित समूह हैं- प्राउड बॉयज़, पैट्रियट प्रेयर, ओथ कीपर्स, लाइट फ़ुट मिलिशिया, सिविलियन डिफेन्स फोर्स, अमेरिकन कंटेनजेन्सी और बुगालू बॉयज़।
कल ट्रंप ने एक और ऐसी बात कह दी, जिससे हडकंप मचा हुआ है। उन्होंने कहा कि युनाइटेड पोस्टल सर्विस का एक कर्मचारी पद से हटा दिया गया 100 से अधिक पोस्टल बैलट एक कूड़े के ढेर पर गिरे हुए मिले। हालांकि अमेरिका में बैलट में घपले से चुनाव के नतीजों के प्रभावित होने का अब तक का रिकार्ड नहीं है। लेकिन ऐसा कह कर अमेरिकी राष्ट्रपति पूरी चुनाव प्रक्रिया को अभी से ही अविश्वसनीय साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी संविधान के दूसरे संशोधन की भी बात की है, उस संशोधन में लोगों के बेरोकटोक हथियार रखने की बात कही गई है। 

जो बाइडन आगे 

यह मामला अहम इसलिए भी है कि हालांकि डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन चुनाव पूर्व अनुमानों और सर्वे में आगे चल रहे हैं, पर कोई भी चुनाव पंडित ट्रंप की जीत की संभावनाओं को सिरे से खारिज नहीं कर रहा है। 

अमेरिका में ‘विनर गेट्स ऑल’ का सिद्धांत है, यानी जिस राज्य में जिस उम्मीदवार को आधे से अधिक सीटें मिलती हैं, उसके खाते में उस राज्य की सभी सीटें मिल जाती हैं। जैसे फ़्लोरिडा में 29 सीटे हैं, यदि ट्रंप को 15 सीटें मिलती हैं तो उनके खाते में सभी 29 सीटें जाएंगी। यानी कुल 538 इलेक्टोरल वोट्स में से जिसे 270 सीटें मिल जाएंगी, वह जीत जाएगा।
यदि पॉपुलर वोट यानी कुल वोट किसी उम्मीदवार को कम मिले तो भी वह जीत सकता है, यदि उसे इलेक्टोरल वोट अधिक मिले हों। पिछली बार के चुनाव में डोनल्ड ट्रंप को पॉपुलर वोट हिलेरी क्लिंटन से कम मिले थे, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप बने क्योंकि इलेक्टोरल वोट उन्हें ज़्यादा मिले थे।

अश्वेत भी पीछे नहीं

लॉस एंजिलिस टाइम्स के अनुसार, स्माल आर्म्स एनलिटिक्स एंड फ़ोरकास्टिंग का अनुमान है कि 2020 में साल भर में अमेरिका में 17 मिलियन बंदूकें खरीदी जा सकती हैं। इसका कहना है कि इस बार की हथियार ख़रीद पहले से हट कर इस मामले में है कि अश्वेत अमेरिकियों ने भी बड़े पैमाने पर हथियार खरीदी हैं। 

लॉस एंजिलिस टाइम्स का कहना है कि रिटायर किए हुए लोग बड़ी तादाद में ये हथियार ख़रीद रहे हैं।
सांता फे के लेखक इनेज़ रसेल ने इस अख़बार से कहा कि डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों को लगता है कि यह  चुनाव वे हार गए तो देश बर्बाद हो जाएगा। वे पूरी तरह से कमर कस रहे हैं।
लॉस एंजिलिस टाइम्स के मुताबिक़, अमेरिकी जाँच एजेन्सी एफ़बीआई ने 2.88 करोड़ अश्वेतों की पृष्ठभूमि की जाँच की है।

धड़ल्ले से हथियारों की ख़रीद

लॉस रैंचोज डी अल्बुकर्क स्थित लॉस रैंचोज़ गन शॉप के मालिक ने अख़बार से कहा कि अब लोग पहले की तुलना में अधिक आसानी से, बिल्कुल टहलते हुए आते हैं और हथियार ख़रीद कर ले जाते हैं।  

तमाम चुनाव-पूर्व सर्वेक्षणों में डोनल्ड ट्रंप जो बाइडन से पीछे चल रहे हैं। तो क्या वह चुनाव हारने जा रहे हैं, बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष। 
सवाल यह उठता है कि हथियारों की ख़रीद क्या इसलिए की गई है कि चुनाव पश्चात नतीजों को सिरे से खारिज कर दिया जाए, या हारने वाला जीतने वाले से भिड़ जाए। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी, 3 नवंबर को सबकुछ साफ़ हो जाएगा।    

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