कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सत्य हिंदी के एडिटोरियल डायरेक्टर आशुतोष के साथ खास बातचीत में कहा कि सरकार छात्रों से किए वादे से मुकर रही है। उन्होंने एफआईआर वापसी और पुलिस बर्बरता पर केंद्र को घेरा।
पत्रकार आशुतोष के साथ सीजेपी आशुतोष रांका
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर हटाए जाने और छात्रों को प्रताड़ित नहीं किए जाने की मांग पर सरकार के वादे का सच क्या है? इस सवाल पर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा है कि 'केंद्रीय मंत्री ने ही साफ़ कहा था कि एफआईआर विल बी विड्रॉन एंड नो फ्यूचर केसेस विल बी फाइल्ड। तो अब अगर एक कैबिनेट मिनिस्टर की बात पे हम यकीन नहीं कर सकते तो फिर तो ये पूरा हो गया कि सरकार पर आप भरोसा नहीं कर सकते।'
आशुतोष रांका उस सवाल का जवाब दे रहे थे जिसमें सत्य हिंदी के एडिटोरियल डाइरेक्टर आशुतोष ने पूछा कि 'आपकी जब जेपी नड्डा और जितेंद्र जी से मुलाकात हुई थी तो क्या उस वक्त उन्होंने साफ़ तौर पर यह वादा किया था कि जितने भी केसेस छात्रों के खिलाफ है एफआईआर दर्ज वो सारे के सारे वापस लिए जाएंगे? इस पर रांका ने कहा, "बिल्कुल। बिल्कुल, मतलब हमसे तो जो वादा किया वह किया। आप उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस की रिकॉर्डिंग सुन लीजिए। उनकी जो ट्वीट है वो देख लीजिए। उसमें बहुत क्लियरली उन्होंने कहा है कि एफआईआर विल बी विड्रॉन एंड नो फ्यूचर केसेस विल बी फाइल्ड। तो अब अगर एक कैबिनेट मिनिस्टर की बात पर हम यकीन नहीं कर सकते तो फिर तो ये पूरा हो गया कि सरकार पर आप भरोसा नहीं कर सकते।"
आशुतोष रांका ने सत्य हिंदी के आशुतोष के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में हुए सफल आंदोलन ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिलाकर यह साबित कर दिया है कि युवाओं का आक्रोश अब चुप बैठने वाला नहीं है। इस साक्षात्कार में आशुतोष रांका ने आंदोलन के अगले चरणों, सरकार की वादाखिलाफी और पुलिस की बर्बरता पर खुलकर अपनी बात रखी।
आशुतोष रांका ने साक्षात्कार में केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने छात्रों से जो वादे किए थे, उनसे पीछे हट रही है। रांका ने कहा, 'सरकार के साथ जो एग्रीमेंट हुआ था, उसे लिखित रूप में लाकर इस मुद्दे को खत्म करना चाहिए था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गई हैं।'
रांका ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश और सरकार की चुप्पी पर भी निराशा जताई। रांका ने साफ़ किया कि जब एक कैबिनेट मंत्री सार्वजनिक तौर पर एफ़आईआर वापस लेने का आश्वासन देता है तो उसे निभाया जाना चाहिए।
रांका ने साफ़ चेतावनी दी कि अगर लिखित समझौता नहीं हुआ तो आंदोलन फिर तेज होगा। इंटरव्यू में रांका ने कहा, 'अभी पिछले दो-तीन दिन से जो हो रहा है, वह इसी ओर इशारा कर रहा है। बंगाल, असम, बिहार, यूपी, गोवा से खबरें आ रही हैं। कुछ राज्यों में केस वापस लेने के डायरेक्टिव आए हैं, लेकिन केंद्र सरकार से जो एग्रीमेंट हुआ था, उसे लिखित रूप में लाकर मुद्दा जल्द खत्म करें। वरना हम फिर से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।'
'आंदोलन को डिस्क्रेडिट करने की कोशिशें विफल'
जब पत्रकार आशुतोष ने आंदोलन को लेकर उठ रहे सवालों—जैसे इसे 'अराजक' बताना या 'गटर' शब्द का इस्तेमाल करना—पर बात की, तो रांका ने तल्ख तेवर में कहा, "आप उस जनरेशन को गटर बोल रहे हैं जिसने 12 साल में वो कर दिखाया जो आज तक कोई नहीं कर पाया। इस 'गटर जनरेशन' ने एक केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा दिलवा दिया।" उन्होंने कहा कि सरकार समर्थकों द्वारा आंदोलन को बदनाम करने की कोशिशें नाकाम रही हैं, क्योंकि यह आंदोलन देश के युवाओं की हकीकत और उनके भविष्य की लड़ाई है।पुलिस की जवाबदेही
साक्षात्कार का एक मुख्य हिस्सा 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर था। रांका ने दिल्ली पुलिस द्वारा 'पैलट गन' के इस्तेमाल को शर्मनाक बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कश्मीर के बाद हिंदुस्तान में पहली बार छात्रों पर पैलट गन का इस्तेमाल करना सही था? उन्होंने कहा, "दिल्ली पुलिस की बर्बरता ने सारी हदें पार कर दी थीं। इसकी जवाबदेही गृह मंत्रालय (अमित शाह) की बनती है। पुलिस ने न केवल छात्रों को पीटा, बल्कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को भी निशाना बनाया। पुलिस का काम लोगों का भरोसा जीतना है, न कि उन्हें डराना।"
20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई को 'बर्बरता' बताते हुए रांका ने कहा कि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल, लाठियां बरसाना, स्वयंसेवकों की पसलियां तोड़ना और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, 'आप अपने ही बच्चों पर पैलेट गन चलाएंगे? दिल्ली पुलिस के अपने पेपर लीक हुए हैं, फिर भी यह बर्बरता?' उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर जवाबदेही तय करने की मांग की, क्योंकि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन आती है। उन्होंने कहा, 'अमित शाह को जवाब देना पड़ेगा। संसद क्यों नहीं आ रहे? कम से कम एक रील तो बना दीजिए।'
कॉकरोच जनता पार्टी कैसे बनी?
'कॉकरोच जनता पार्टी' के नाम और आंदोलन की शुरुआत पर बात करते हुए रांका ने स्वीकार किया कि यह सब एक मजाक और व्यंग्य से शुरू हुआ था। उन्होंने कहा, "हम कोई 'सीजन्ड प्रोटेस्टर' नहीं थे। हमने पहली बार जंतर-मंतर देखा था। यह आंदोलन इसलिए सफल हुआ क्योंकि इसमें एक 'जेन्युइन एजेंडा' था। डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स और युवाओं ने इसे बिना किसी बड़े संगठन की बैकिंग के चलाया।" उन्होंने मुख्यधारा के मीडिया पर भी निशाना साधा और कहा कि जिन्होंने इस आंदोलन को इग्नोर किया, वे आज इसी आंदोलन से कवरेज पाने के लिए भाग रहे हैं।
भविष्य क्या होगा?
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या यह आंदोलन आगे चलकर एक राजनीतिक पार्टी का रूप लेगा तो रांका ने कहा कि अभी उनकी प्राथमिकता युवाओं को संगठित करना और सिस्टम में 'अकाउंटेबिलिटी' लाना है। उन्होंने साफ़ किया कि वे 'इश्यूज' (मुद्दों) को हल करने के लिए मैदान में हैं।
साक्षात्कार के अंत में पत्रकार आशुतोष ने कहा कि 2011 के अन्ना आंदोलन के बाद उन्होंने जिस सपने को मरते हुए देखा था, आशुतोष रांका और उनके साथियों ने उस उम्मीद को फिर से जिंदा कर दिया है।