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कांग्रेस को आख़िर कब मिलेगा नया अध्यक्ष? 

सोनिया गांधी को कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बने पूरा एक साल हो गया है। पिछले साल 10 अगस्त को उन्हें पार्टी का नया अध्यक्ष चुने जाने तक अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन इस एक साल में पार्टी का नया अध्यक्ष चुने जाने को लेकर एक बार भी गंभीर कोशिश नहीं हुई। न तो राहुल गांधी को ही दोबारा पार्टी की कमान सौंपने की कोशिश हुई और न ही किसी नए नाम पर विचार हुआ। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि आख़िर कांग्रेस को नया पूर्णकालिक अध्यक्ष कब मिलेगा?

क्या चल रहा है कांग्रेस में?

इस महत्वपूर्ण सवाल का कांग्रेस के किसी नेता के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं है। जवाब इसलिए भी नहीं है क्योंकि किसी को पता ही नहीं है कि पार्टी के भीतर आख़िर चल क्या रहा है?
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पिछले 5 महीने से तो कोरोना वायरस की वजह से देश में फैली महामारी के चलते तमाम राजनीतिक गतिविधियाँ लगभग बंद सी हैं। इस बीच कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए दो बार कार्यसमिति की बैठक बुलाई।
कई  बार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ देश के राजनीतिक हालात पर चर्चा भी की। लेकिन पार्टी का नया चुनने या फिर राहुल गांधी को ही दोबारा अध्यक्ष बनाने के मुद्दे पर कोई बैठक नहीं हुई।

राहुल को अध्यक्ष बनाने की माँग

हालांकि पार्टी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए हुईं बठकों में कई बार कई नेताओं ने सोनिया गांधी से राहुल गांधी को दोबारा पार्टी अध्यक्ष बनाने की मांग की। कई नेताओं ने राहुल गांधी से भी दोबारा अध्यक्ष पद संभालने की मांग की। 
लेकिन इन नेताओं को या तो सही समय पर फ़ैसला लेने का भरोसा देकर चुप करा दिया गया। या फिर पार्टी के उचित फोरम पर इस मुद्दे पर चर्चा की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया गया। 

रविवार को कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बारे में सवाल किए जाने पर पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने साफ़ संकेत दिए कि फ़िलहाल पार्टी नया अध्यक्ष चुनने के मूड में नहीं है।

सोनिया पर भार

इसके बजाय पार्टी बतौर अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी का ही कार्यकाल एक साल और बढ़ा सकती है। सिंघवी के मुताबिक़, सोनिया गांधी को पार्टी के अंतरिम अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी संभाले एक साल पूरा हो रहा है। पर इसका मतलब यह नहीं है पद खाली हो जाता है। 

पार्टी का कहना है कि कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्लूसी) की जल्द बैठक बुलाकर अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी के कार्यकाल को बढ़ा दिया जाएगा। बैठक इसी महीने की शुरुआत में होनी थी, पर किसी वजह से नहीं हो सकी।
इसका यही मतलब है कि सोनिया गांधी फिलहाल कांग्रेस के अतंरिम अध्यक्ष के पद पर बनी रहेंगी। पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि नया अध्यक्ष चुनने के लिए जल्द ही प्रक्रिया शुरु की जाएगी। तब तक कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी ज़िम्मेदारी निभाती रहेंगी।

अब फ़ैसला हो जाए!

बता दें कि पार्टी के अंदर पूर्णकालिक अध्यक्ष चुने जाने की माँग लगातार ज़ोर पकड़ रही है। पार्टी में अब नेताओं ने कहना शुरू कर दिया है कि या तो राहुल गांधी फिर से अध्यक्ष का पद संभालें या पार्टी किसी और को जल्द से जल्द नया अध्यक्ष चुने। लंबे समय तक बगैर अध्यक्ष के रहना पार्टी के लिए ठीक नहीं है।

कांग्रेस के लोकसभा सांसद शशि थरूर का कहना है कि राहुल गांधी के पास साहस, क्षमता और योग्यता है। उन्हें बतौर पार्टी अध्यक्ष यह ज़िम्मेदारी संभालनी चाहिए। उन्हें दिसंबर 2022 तक अध्यक्ष पद के लिए चुना गया था। उन्हें अपना इस्तीफ़ा वापस लेकर इस ज़िम्मेदारी को संभालना चाहिए। अगर वह इस ज़िम्मेदारी को नहीं उठाना चाहते हैं, तो पार्टी को नया अध्यक्ष चुनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 

चुनाव कराने की माँग

उन्होंने कहा कि वह मानते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से अनिश्चितकाल तक ज़िम्मेदारी को उठाने की उम्मीद करना उचित नहीं है। शशि थरूर काफ़ी समय से कांग्रेस कार्य समिति और अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराने की माँग कर रहे हैं।

शशि थरूर के अलावा कई और वरिष्ठ नेता भी इस हक़ में हैं। फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि शरूर सामने आकर अपना बात मीडिया के ज़रिए कह देते हैं बाक़ी नेता मुंह बंद किए हुए हैं और ज़ुबान सिले हुए बैठे हैं। 
कांग्रेस के ज़्यादातर नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी को इस्तीफ़ा वापस लेने के लिए काफ़ी समय दिया जा चुका है। अगर वह तैयार नहीं हैं तो पार्टी को उनकी राय का सम्मान का करते हुए आगे बढ़ जाना चाहिए।
कई नेता दबी ज़ुबान में तो यह बात कहते हैं लेकिन सेनिया गांधी के सामने न उनका मुंह खुलता है और न ही ज़ुबान चलती है। सिर्फ सिर हिलता है, उनकी हां में हां मिलाने के लिए।

ऊहापोह में कांग्रेस

दरअसल कांग्रेस में अध्यक्ष पद का मामला सांप के मुँह में छंछुदर की तरह होकर रह गया है। न निगलते बन रहा है और न ही उगलते। इसकी वजह से कांग्रेस की साख़ पर ऐसा बट्टा लगा है जिसकी भरपाई बेहद मुश्किल है। 
जब कभी कांग्रेस केंद्र सरकार के किसी फ़ैसले पर सवाल उठाती है तो बीजेपी तंज़ करती है जो पार्टी अपने अध्यक्ष पर फ़ैसला नहीं कर सकती, वह हमें सही फ़ैसला लेने की सीख भला कैसे दे सकती है?
कांग्रेस साल भर से यही ताना सुन रही है। लेकिन नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए उसके कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
ग़ौरतलब है कि पिछले साल 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बुलाई गई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी ने हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। तब उन्होंने माँ सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा किसी और को पार्टी अध्यक्ष चुनने के लिए एक महीने का समय दिया था।

राहुल की नाराज़गी

इस पर राहुल की खूब मान मनौव्वल हुई। लेकिन वह टस से मस नहीं हुए। जब पार्टी महीने भर बाद भी किसी को अध्यक्ष नहीं चुन पाई तो राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यक्ताओं के नाम एक खुला ख़त लिखकर आरोप लगाया था कि वह मोदी से अकेले लड़ते रहे। पार्टी के बड़े नेताओं ने कभी उनका साथ नहीं दिया।
राहुल गांधी ने चिट्ठी में साफ़ कर दिया था कि वह किसी भी सूरत में अध्यक्ष पद पर नहीं लौटेंगे। क़रीब महीने भर बाद 10 अगस्त को हुई बैठक में सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष चुना गया था।

बँटी हुई कांग्रेस

तब कहा गया था पार्टी में नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए जल्द ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लेकिन अभी तक इस बाबत कोई क़दम नहीं उठाया गया। निकट भविष्य में भी ऐसी कोई उम्मीद नज़र आती।

पार्टी फिलहाल सोनिया गांधी और राहुल गांधी ख़ेमे में बंटी नज़र आती है। सोनिया के क़रीबी चाहते हैं कि वह ही पार्टी की बागडोर संभाले रहें। राहुल ख़ेमा चाहता है कि वह अध्यक्ष पद पर जल्द ही लौटकर पार्टी की बागडोर संभालें।
उनके क़रीबियों का दावा तो यहां तक है कि राहुल वापसी के लिए तैयार हैं। अध्यक्ष पद के लिए चुनाव क़वायद शुरू होते ही वह हरी झंडी दे देंगे। लेकिन  वरिष्ठ नेताओं का गुट यह प्रक्रिया शुरू ही नहीं होने देना चाहता। ऐसा लगता है कि फिलहाल कांग्रेस में ‘युवा जोश’ पर ‘तजुर्बा’ भारी पड़ रहा है।

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यूसुफ़ अंसारी
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