टीडीपी सांसद कालिसेट्टी अप्पलानायडू (बायें) सीएम चंद्रबाबू नायडू के साथ।
टीडीपी का कहना है कि यह योजना राज्य में जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है। आंध्र प्रदेश में जन्म दर (Fertility Rate) में कमी और बढ़ती उम्रदराज आबादी (Ageing Population) को लेकर चिंता जताई जा रही है। यह कदम सामाजिक और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया है, ताकि भविष्य में श्रम शक्ति की कमी न हो।
परिसीमन से क्या संबंधः यदि आंध्र प्रदेश की जनसंख्या वृद्धि दर कम रही, तो भविष्य के परिसीमन में राज्य को मिलने वाली लोकसभा सीटों की संख्या में कमी आ सकती है। वर्तमान में आंध्र प्रदेश के पास 25 लोकसभा सीटें हैं। जनसंख्या में कमी से यह संख्या घट सकती है, जिससे राज्य का राष्ट्रीय स्तर पर उसका राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है। टीडीपी और उसके सहयोगी दलों का मानना है कि जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा देकर वे राज्य की लोकसभा सीटों को बनाए रखने या बढ़ाने में सक्षम हो सकते हैं।
अगला परिसीमन 2026 के बाद होने की संभावना है, जो 2031 की जनगणना पर आधारित होगा। यदि अभी से जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित किया जाए, तो अगले दो दशकों में आंध्र प्रदेश की जनसंख्या में बढ़ोतरी हो सकती है, जो परिसीमन में राज्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।