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माँ प्रिंसिपल व पिता प्रोफ़ेसर, कर्मकांड में बेटियों को मार डाला

दूर-दराज के गाँवों में कम पढ़े-लिखे लोगों के अजीबोगरीब धार्मिक कर्मकांडों के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या प्रोफ़ेसर, प्रिंसिपल माता-पिता के बारे में ऐसी कल्पना भी की जा सकती है कि बेटियों को मार डाला जाए? 

माँ स्कूल की प्रिंसिपल। पिता कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफ़ेसर। एक बेटी एमबीए पूरा कर आईएएस की तैयारी में जुटी थी। दूसरी बेटी डांसिंग की छात्रा थी। और उस परिवार में कथित तौर पर ऐसा धार्मिक कर्मकांड हुआ कि दोनों बेटियों को डंबल से सर कुचलकर मार दिया गया। कथित तौर पर यह सोचकर कि मारने से बुराई से छुटकारा मिल जाएगा और वे दोनों बेटियाँ फिर से जिंदा हो जाएँगी। इस मामले में पुलिस ने तो हत्या का केस दर्ज किया है।

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पुलिस भले ही कुछ भी माने, लेकिन वह भी अजीब स्थिति में है। ऐसा इसलिए कि पुलिस को परिचितों और रिश्तेदारों से धार्मिक कर्मकांड के बारे में जानकारी मिली है। हालाँकि, यह तय नहीं हो पा रहा है कि धार्मिक कर्मकांड माता-पिता की ओर से किए गए या दोनों बेटियों की ओर से।

मामला आँध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले के मदनपल्ली शहर का है। पुलिस ने हत्या के आरोप में मास्टरमाइंड्स आईआईटी टैलेंट स्कूल की प्रिंसिपल वी पदमजा और सरकारी डिग्री कॉलेज के उपाध्यक्ष और केमिस्ट्री के एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. वी पुरुषोत्तम नायडू को गिरफ़्तार किया है। यह गिरफ़्तारी 24 जनवरी को उनकी अपनी बेटियों- 25 वर्षीय आलेख्या और 22 वर्षीय साई दिव्या को डंबल से कुचलकर हत्या के लिए की गई है।

पुलिस के सामने अजीब स्थिति गिरफ़्तारी से पहले भी तब आई जब दोनों को कोरोना संक्रमण की जाँच के लिए लाया गया था। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही मेडिकल स्टाफ़ ने टेस्ट के लिए सैंपल लेना चाहा, वी पदमजा ने बेसुधी हालत में बोला- 'कोरोना चीन से नहीं आया ...यह शिव से आया था। मैं शिव हूँ और कोरोना मार्च तक चला जाएगा।' हालाँकि जब पूछा गया तो पदमजा के पति डॉ. वी पुरुषोत्तम नायडू ने इतना ही कहा कि उन्हें कुछ नहीं कहना है।

रिपोर्ट के अनुसार, मदनपल्ली तालुक के डीएसपी रवि मनोहर अचारी ने कहा कि ऐसा लगता है कि पूरा परिवार किसी धार्मिक कर्मकांड में शामिल था। उन्होंने कहा कि ये मौतें उसी कारण हुई हैं।

पुलिस का कहना है कि हत्या के बारे में उसे मास्टरमाइंड्स स्कूल के एक पूर्व शिक्षक से सूचना मिली थी। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, जब पुलिस उस घर में पहुँची तो आलेख्या का सर डंबल से कुचला गया था, बाल जलाए गए थे और उसके मुँह में कुछ धातु डाला हुआ था। चेन्नई में ए आर रहमान म्यूजिक एकेडमी में डांस की छात्रा रही उसकी छोटी बहन साई दिव्या का सर भी डंबल से कुचला हुआ था।

रिपोर्ट के अनुसार एक पुलिस अधिकारी ने कहा, 'माता-पिता पर कोई चोट नहीं थी, लेकिन ऐसा लग रहा था कि वे यह मान रही थीं कि लड़कियाँ वापस लौट आएँगी।'

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ऐसा उस परिवार का मानना है जो अच्छे-ख़ासे पढ़े लिखे परिवार के हैं। ऐसा नहीं है कि परिवार में सिर्फ़ एक कोई इतना ज़्यादा पढ़ा-लिखा है। परिवार के चारों सदस्य काफ़ी पढ़े-लिखे थे।

हालाँकि यह साफ़ नहीं है कि पूरा परिवार ही धार्मिक कर्मकांड में लिप्त था या सिर्फ़ माता-पिता या बेटियाँ ही। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार पदमजा के रिश्तेदार ने कहा, 'वे तार्किक लोग थे। वे कोरोना और अन्य चीजों के बारे में तर्कसंगत थे। वे आध्यात्मिक लोग थे, लेकिन अतिवादी नहीं थे।' मास्टरमाइंड्स स्कूल में साथ काम करने वाले एक सहकर्मी ने कहा कि वह 25 सालों से प्रिंसिपल को जानते हैं और वह इस पर विश्वास नहीं कर सकते कि वह ऐसा कर सकती हैं। 

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मदनपल्ली में एक और चर्चा यह है कि बेटियों में से एक धार्मिक कर्मकांडों के प्रति आकर्षित थी और अक्सर ख़ुद को भगवान के रूप में मान बैठती थी। उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में भी कुछ ऐसा ही लगता है।

नाम नहीं बताने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने कहा है, 'ऐसा लगता है कि लड़कियों में से एक ने माता-पिता से कहा कि वे केवल उन्हें (बेटियों को) मारकर बुराई से छुटकारा पा सकते हैं, लेकिन वे (बेटियाँ) मरेंगी नहीं।'

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पहले परिवार में से किसी का मानसिक बीमारी का इलाज तो नहीं किया गया था। 

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