इस उद्योग के शीर्ष अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना कि अडानी के प्रवेश से आगामी 5G एयरवेव्स बिक्री में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सकता है, जिसमें हाल ही में मौन बोली देखे जाने की उम्मीद थी, क्योंकि मुकाबले में Jio और भारती एयरटेल दो प्रमुख बोलीदाता ही थे। मौन बोली का अर्थ यहां समझा जा सकता है। कहा जा रहा था कि रिलायंस जियो को 5 जी में एंट्री मिलने में कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन अब अडानी के इस खेल में कूदने से सीन बदल गया है।