कांग्रेस पार्टी असम में अपने सबसे बड़े नेताओं में से एक को खोने की कगार पर है। असम के दो बार के लोकसभा सांसद और पूर्व मंत्री प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार रात (17 मार्च 2026) को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा भेज दिया। इस्तीफे में उन्होंने लिखा, “आज अत्यधिक दुख के साथ मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं।”

क्या हिमंता के दबाव में हैं बोरदोलोई

इससे पहले रविवार (15 मार्च 2026) को बोरदोलोई ने असम प्रभारी जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर पार्टी में “अपमान” होने का आरोप लगाया था। वे सोमवार से दिल्ली में थे और मंगलवार रात असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने उनसे मुलाकात की। गोगोई ने इस्तीफे की खबर की निंदा करते हुए कहा, “मीडिया के माध्यम से असम के मुख्यमंत्री बार-बार हमारे वरिष्ठ सांसद प्रदीप्त बोरदोलोई को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब मेरे महासचिव जितेंद्र सिंह और मैंने उनसे विस्तृत चर्चा की है कि आगामी चुनाव में हम कैसे लोगों तक पहुंचेंगे और नया असम कैसे बनाएंगे।” असम में यह चर्चा आम है कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के दबाव बनाने पर ही बोरदोलोई ने कांग्रेस को ऐन मौके पर झटका दिया है, ताकि चुनाव में बीजेपी को इसका फायदा दिया जा सके।
बोरदोलोई नौगांव से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकारों में कई बार मंत्री रहे हैं। वे असम कांग्रेस के तीन लोकसभा सांसदों में से एक हैं। अन्य दो सांसद असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई और धुबरी से रकीबुल हुसैन हैं। उनके बेटे प्रतीक बोरदोलोई को कांग्रेस ने मरघेरिटा सीट से उम्मीदवार बनाया है।
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इस्तीफे की वजहों में अजीबोगरीब कारण

बोरदोलोई ने इस्तीफे का कारण बताया कि लाहरीघाट विधानसभा क्षेत्र (जो उनके नौगांव संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है) के उम्मीदवार चयन पर चर्चा के दौरान उनका अपमान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि लाहरीघाट से मौजूदा कांग्रेस विधायक आसिफ नजर ने उन पर हमले के आरोपी एमदादुल इस्लाम को संरक्षण दिया। अप्रैल 2025 में पंचायत चुनाव प्रचार के दौरान नौगांव जिले के ढिंग में बोरदोलोई और विधायक शिवमोनी बोरा पर भीड़ ने हमला किया था, जिसमें दोनों घायल हुए थे। पुलिस ने एमदादुल इस्लाम को गिरफ्तार किया था। बोरदोलोई ने आरोप लगाया कि इस्लाम विधायक नजर का “घनिष्ठ सहयोगी” है और जमानत पर छूटने पर नजर ने उसे “हीरो” की तरह स्वागत किया। उन्होंने गोगोई को इस बारे में बताया, लेकिन गोगोई ने जिले में एक कार्यक्रम में आरोपी और नजर के साथ मंच साझा किया।
बोरदोलोई के अनुसार, आखिरी झटका तब लगा जब 13 मार्च 2026 को दिल्ली में कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में यूपी सांसद इमरान मसूद (जो असम चुनाव के लिए स्क्रीनिंग कमिटी के सदस्य हैं) ने उनके आरोपों को “झूठा” करार दिया और गोगोई चुप रहे। इससे उनके “आत्म-सम्मान” को ठेस पहुंची।
गौरव गोगोई ने मुलाकात के बाद कहा कि बोरदोलोई को मनाने की कोशिशें की जा रही हैं। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को संकेत दिया कि भाजपा बोरदोलोई का स्वागत करने को तैयार है। उल्लेखनीय है कि एक महीने पहले पूर्व असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा भी “आत्म-सम्मान” का हवाला देकर पार्टी छोड़ चुके हैं और बाद में भाजपा में शामिल हो गए।
बोरदोलोई फिलहाल किसी भी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हैं। कांग्रेस पार्टी इस संकट से निपटने के लिए प्रयास कर रही है, क्योंकि असम में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह बड़ा झटका माना जा रहा है।