असम में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा ने मतदाता सूची के विशेष संशोधन में फर्जी आपत्तियों के जरिए वास्तविक मतदाताओं को बाहर करने की साजिश रची है।
असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा
असम में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष संशोधन (स्पेशल रिवीजन) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने बीजेपी पर मतदाता सूची से नाम हटाने की सुनियोजित साजिश रचने का आरोप लगाया है। विपक्षी नेताओं ने दावा किया है कि फर्जी आपत्तियों के जरिए निर्दोष मतदाताओं के नाम गैरकानूनी तरीके से हटाए जा रहे हैं।
25 जनवरी 2026 को कांग्रेस, रायजोर दल, असम जतिया परिषद, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई), सीपीआई (मार्क्सवादी) और सीपीआई (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के नेताओं ने असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन 27 दिसंबर 2025 को प्रकाशित फोटो मतदाता सूची के ड्राफ्ट के बाद दायर की गई आपत्तियों और दावों की प्रक्रिया पर आधारित है।
विपक्ष का आरोप है कि दिसंबर 27, 2025 से जनवरी 22, 2026 तक चली आपत्ति और दावा अवधि में बड़े पैमाने पर फर्जी और अवैध आपत्तियां दर्ज की गईं। इन आपत्तियों में मृत्यु या स्थायी स्थानांतरण के आधार पर नाम हटाने की मांग की गई, लेकिन कई आपत्तिकर्ताओं ने खुद आगे आकर कहा कि उन्हें ऐसी आपत्ति दर्ज करने की कोई जानकारी नहीं थी। उनकी ईपीआईसी संख्या और मोबाइल नंबर का दुरुपयोग किया गया।
विपक्ष ने इसे "मनमाना, गैरकानूनी और असंवैधानिक" करार दिया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन नियमों की धारा 17 का उल्लंघन कर बिना उचित आधार के नोटिस जारी किए गए। विशेष रूप से बोको क्षेत्र (समरिया विधानसभा क्षेत्र) में बीजेपी नेताओं द्वारा चुनाव कार्यालय पर कब्जा कर "स्वतः संज्ञान में" लिखकर मतदाताओं के नाम काटने की कोशिश की गई। बूथ लेवल अधिकारियों पर दबाव डालने या उनके हस्ताक्षर का दुरुपयोग करने के आरोप भी लगे हैं।
ज्ञापन में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक बयान का हवाला दिया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार "कानून के दायरे में रहकर कुछ तो करेगी" ताकि 'मियां' समुदाय पर दबाव बनाया जा सके और उन्हें नोटिस जारी कर परेशान किया जा सके। विपक्ष ने इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने की मंशा बताते हुए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाया।
ड्राफ्ट मतदाता सूची में असम में कुल 2.51 करोड़ मतदाता हैं। संशोधन अभियान में 61 लाख से अधिक घरों की 100% जांच की गई। इसमें 4.78 लाख मतदाताओं को मृत घोषित किया गया, 5.23 लाख को स्थानांतरित पाया गया, जबकि 53,619 दोहरे प्रविष्टियों को हटाया गया। अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।
विपक्ष ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मांग की है कि अवैध आपत्तियों को खारिज किया जाए, फर्जी आपत्ति दर्ज करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो, नाम हटाने से रोका जाए, बेदखली पीड़ित मतदाताओं को फॉर्म 8 दाखिल करने की अनुमति दी जाए, राजनीतिक हस्तक्षेप रोका जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। साथ ही बोको में तीन बीजेपी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
यह विवाद असम विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।