असम के गुवाहाटी में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी एक्टिविस्टों की प्रस्तावित बैठक से पहले रविवार को पुलिस ने आशुतोष रांका सहित कई सदस्यों को हिरासत में लिया। सीजेपी का आरोप है कि पुलिस ने बैठक को रोकने के लिए आयोजन स्थल तक पहुँचने वाले लोगों को रास्ते में ही रोक दिया और बाद में रांका समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर किसी अज्ञात स्थान पर ले गई। संगठन ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि असम सरकार और प्रशासन सीजेपी एक्टिविस्टों की एक छोटी-सी बैठक से इतनी डरी हुई क्यों है?

हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल आशुतोष रांका शनिवार से ही असम में मौजूद थे। उन्हें रविवार को गुवाहाटी में होने वाली सीजेपी एक्टिविस्टों की बैठक को संबोधित करना था। रांका ने असम पहुंचने के बाद अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सीजेपी की गतिविधियों को लेकर जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि संगठन राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से प्रभावित परिवारों से मिलने की योजना बना रहा है। इसके अलावा सीजेपी की टीम सरकारी स्कूलों का दौरा कर उनकी स्थिति का जायजा लेने की भी योजना बना रही थी। उनकी घोषणा तब हुई जब सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दो अक्टूबर से देश भर में प्रदर्शन की घोषणा की है।
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रांका ने यह भी कहा था कि संगठन असम में अपने स्वयंसेवक नेटवर्क को मजबूत करना चाहता है और स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़े मुद्दों पर काम करना चाहता है। लेकिन इन मुद्दों को लेकर होने वाली बैठक से पहले ही सीजेपी एक्टिविस्टों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू कर दी गई।
 
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में आशुतोष रांका और सीजेपी की टीम को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि टीम असम में स्वयंसेवकों की एक छोटी बैठक करने जा रही थी तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।  दिपके ने कहा, 'असम पुलिस ने आशुतोष को एक निजी घर से हिरासत में लिया। उन्हें अभी तक यह नहीं बताया गया है कि किन आरोपों या किस आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया है। अगर आशुतोष को रिहा नहीं किया गया तो मैं सीजेपी के दूसरे सदस्यों के साथ असम जाऊँगा। हिमंता हम सभी को गिरफ़्तार कर सकते हैं।' 

इधर, हिरासत में लिये जाने के दौरान आशुतोष रांका के एक वीडियो बयान को पोस्ट करते हुए सीजेपी ने पूछा है कि 'असम सरकार आख़िर इतनी डरी हुई क्यों है?'

SIR, मतदाता सूची का मुद्दा भी उठाने की तैयारी

सीजेपी की प्रस्तावित गतिविधियों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मुद्दा भी शामिल था। रांका के मुताबिक संगठन उन परिवारों से मिलने वाला था जो मतदाता सूची में बदलाव या पुनरीक्षण की प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। सीजेपी का कहना है कि वह ऐसे परिवारों की समस्याओं को समझना और उनके सामने आने वाली दिक्कतों को दर्ज करना चाहती है।

रांका ने असम में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इस प्रक्रिया के ज़रिए राज्य में चुनाव से संबंधित कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आ सकती है। सीजेपी ने कहा है कि चुनाव आयोग ने 2024 से जेन ज़ी के मतदाताओं को वोट देने से रोकने की कोशिश की है। पार्टी सीईसी ज्ञानेश कुमार को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराती है और उनके इस्तीफ़े की मांग कर रही है। पार्टी ने गांधी जयंती के दिन 2 अक्टूबर से पूरे देश में प्रोटेस्ट की घोषणा की है।

सरकारी स्कूलों की स्थिति देखने की भी योजना

सीजेपी ने केवल चुनाव और मतदाता सूची को ही अपनी असम यात्रा का मुद्दा नहीं बनाया था। संगठन ने सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लेने की भी योजना बनाई। सीजेपी ने पिछले कई हफ़्तों से पूरे देश में 'स्कूल ठीक करो' अभियान चला रही है। पार्टी ने कई राज्यों में स्कूलों में बदतर सुविधाओं से लेकर पढ़ाई के हालात को उजागर किया है और कई राज्य सरकारों को इसके लिए बेहद मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा है।

रांका ने असम से किए गए अपने पोस्ट में दावा किया था कि संगठन राज्य के स्कूलों, जमीन और दूसरे स्थानीय मुद्दों पर सवाल उठाना चाहता है। उनका आरोप था कि प्रशासन सीजेपी को इन मुद्दों पर लोगों से बातचीत करने से रोकना चाहता है।

सीजेपी की योजना के मुताबिक, इसके एक्टिविस्ट स्थानीय लोगों से बातचीत करते और सरकारी स्कूलों की स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लेते। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर एक्टिविस्टों का नेटवर्क तैयार करना और स्थानीय समस्याओं को सामने लाना है।
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बैठक स्थल के आसपास पुलिस कार्रवाई का आरोप

सीजेपी का कहना है कि गुवाहाटी में बैठक के लिए तय जगह तक पहुंचने वाले लोगों को पुलिस ने रोकना शुरू कर दिया। संगठन के मुताबिक, कुछ लोगों को आयोजन स्थल तक पहुंचने से रोका गया और इसके बाद आशुतोष रांका तथा अन्य नेताओं और स्वयंसेवकों को हिरासत में ले लिया गया।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि असम पुलिस ने आशुतोष रांका और सीजेपी की टीम को हिरासत में लिया और उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि उसे तत्काल यह जानकारी नहीं मिल सकी कि कितने स्वयंसेवकों को हिरासत में लिया गया है और उन्हें किस स्थान पर रखा गया है।

सीजेपी ने बैठक स्थल के आसपास आंसू गैस से संबंधित उपकरण तैनात किए जाने का भी आरोप लगाया है। संगठन ने यह भी दावा किया कि हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए पहुंचे उसके वकीलों को पुलिस ने अनुमति नहीं दी। असम पुलिस की ओर से कार्रवाई का विस्तृत कारण और हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या के बारे में आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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आशुतोष रांका और अन्य एक्टिविस्टों  की हिरासत के बाद सीजेपी ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है। संगठन ने कहा है कि पुलिस कार्रवाई से उसका अभियान नहीं रुकेगा और वह असम में मतदाता सूची, सरकारी स्कूलों, जमीन तथा दूसरे सार्वजनिक मुद्दों पर काम जारी रखेगा।


सीजेपी ने असम सरकार से हिरासत में लिए गए सभी लोगों की स्थिति स्पष्ट करने और उन्हें रिहा करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि असम में उसका जमीनी अभियान जारी रहेगा और वह मतदाता सूची में बदलाव से प्रभावित परिवारों, सरकारी स्कूलों तथा दूसरे सार्वजनिक मुद्दों पर लोगों से संवाद करेगा।