बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले ही सत्तारूढ़ NDA में अंदरूनी मतभेद सामने आते दिख रहे हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के तीन विधायकों ने पार्टी के प्रदेश महासचिव और मुख्य प्रवक्ता राम पुकार सिन्हा के समर्थन का ऐलान किया है। सिन्हा ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। खास बात यह है कि RLM NDA का हिस्सा है और इस सीट पर NDA ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के आनंद पुष्कर को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है।

तीन RLM विधायक राम पुकार सिन्हा के नामांकन में पहुंचे

राम पुकार सिन्हा ने सोमवार को सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया। उनके नामांकन के दौरान RLM के तीन विधायक मौजूद रहे और उन्होंने सिन्हा को अपना समर्थन देने की घोषणा की। इनमें RLM के प्रदेश अध्यक्ष और दिनारा से विधायक आलोक कुमार सिंह, मधुबनी से विधायक माधव आनंद और बाजपट्टी से विधायक रामेश्वर महतो शामिल हैं। इन तीन विधायकों के खुलकर सिन्हा के समर्थन में आने से बिहार NDA में अंदरूनी खींचतान की चर्चा शुरू हो गई है।

RLM NDA का हिस्सा, लेकिन आधिकारिक उम्मीदवार JDU का

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि RLM की अगुवाई राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा करते हैं और उनकी पार्टी बिहार में NDA गठबंधन का हिस्सा है। सारण शिक्षक सीट पर NDA ने JDU के आनंद पुष्कर को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में NDA के सहयोगी दल RLM के तीन विधायकों का गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवार के बजाय एक निर्दलीय प्रत्याशी का समर्थन करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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उपेंद्र कुशवाहा ने बगावत से किया इनकार

हालांकि RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी में किसी तरह की बगावत से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि RLM NDA के साथ मजबूती से खड़ी है और गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवारों का समर्थन कर रही है। कुशवाहा के मुताबिक पार्टी का कोई भी विधायक बागी नहीं हुआ है। इस तरह उन्होंने तीन विधायकों के राम पुकार सिन्हा के समर्थन को पार्टी के भीतर विद्रोह के तौर पर देखने की कोशिश को खारिज कर दिया।

विधायकों ने क्यों किया सिन्हा का समर्थन?

दूसरी ओर RLM प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह ने तीनों विधायकों के फैसले का कारण बताया। उनका कहना है कि राम पुकार सिन्हा का पार्टी के साथ लंबे समय से जुड़ाव रहा है और उनके समर्थन का उद्देश्य पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के हितों की रक्षा करना है। विधायकों ने यह भी स्पष्ट किया कि राम पुकार सिन्हा को समर्थन देने का मतलब बिहार की NDA सरकार से समर्थन वापस लेना नहीं है। यानी उनका दावा है कि वे सरकार और गठबंधन के साथ हैं, लेकिन सारण शिक्षक सीट पर अपने पुराने पार्टी सहयोगी के पक्ष में खड़े हुए हैं।

RLM के पास चार विधायक

बिहार विधानसभा में RLM के कुल चार विधायक हैं। इनमें उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता भी शामिल हैं। ऐसे में तीन विधायकों का एक निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में एक साथ खड़ा होना पार्टी के अंदर शक्ति संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

सारण शिक्षक सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में फिलहाल तीन प्रमुख उम्मीदवार मैदान में हैं। NDA की ओर से JDU के आनंद पुष्कर, निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राम पुकार सिन्हा और जन सुराज के अफाक अहमद चुनाव लड़ रहे हैं। इस वजह से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। NDA के आधिकारिक उम्मीदवार के सामने उसी गठबंधन के घटक दल के नेताओं द्वारा समर्थित उम्मीदवार के मैदान में होने से वोटों के बंटवारे का सवाल भी उठ रहा है।

23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को मतगणना

बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान 23 अक्टूबर 2026 को होगा। वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को की जाएगी।
इस चुनाव में सारण शिक्षक सीट पर होने वाला मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों की लोकप्रियता की परीक्षा नहीं होगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि RLM के तीन विधायकों का राम पुकार सिन्हा को समर्थन जमीन पर कितना असर डालता है और NDA अपने आधिकारिक उम्मीदवार के पक्ष में कितना प्रभावी ढंग से वोट जुटा पाता है।

NDA के लिए संकेत क्या हैं?

फिलहाल उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी में बगावत से इनकार किया है और तीनों विधायकों ने भी सरकार से समर्थन वापस लेने की बात नहीं कही है। इसलिए इसे सीधे तौर पर NDA सरकार के लिए संकट कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन एक ही गठबंधन के भीतर आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ सहयोगी दल के विधायकों का किसी निर्दलीय प्रत्याशी के साथ खड़ा होना राजनीतिक संदेश जरूर देता है। सारण शिक्षक सीट का परिणाम यह बताएगा कि यह सिर्फ स्थानीय और व्यक्तिगत समर्थन का मामला था या इसका असर NDA के चुनावी समीकरण पर भी पड़ा।