कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा दोबारा प्रोटेस्ट की चेतावनी देने के बाद बिहार सरकार ने जो सभी मुक़दमे वापस लेने की घोषणा की थी उसमें से पुलिस ने कुछ एफ़आईआर ही वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार के आदेश के बाद राज्यभर में दर्ज 64 एफआईआर वापस ली जा रही है, जबकि सीवान हिंसा से जुड़े 21 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे नहीं हटाए जा रहे हैं। बिहार पुलिस ने कहा है कि उन्होंने केवल अपने अधिकारियों द्वारा दर्ज कराए गए मामले ही वापस लिए, न कि आम लोगों द्वारा दर्ज कराए गए मामले। इसके अलावा पुलिस का दावा है कि उनके ख़िलाफ़ आपराधिक गतिविधियों के पर्याप्त सबूत हैं और उनका छात्र आंदोलन से कोई संबंध नहीं है।

एफ़आईआर वापस लेने की यह कार्रवाई तब की गई जब कॉकरोच जनता पार्टी ने मंगलवार को आरोप लगाया है कि सरकार अपने वादे से पीछे हट रही है और चेतावनी दी है कि यदि सभी एफ़आईआर वापस नहीं ली गईं और छात्रों को पुलिस द्वारा परेशान किया जाता रहा तो वह जल्द ही देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन फिर से शुरू करेगा। इसके बाद बिहार सरकार ने सभी मुक़दमे वापस लेने की घोषणा की थी।

64 एफआईआर वापस लेने का आदेश

बिहार सरकार ने पहले घोषणा की थी कि 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मामलों को वापस लिया जाएगा। इसके बाद बिहार के महाधिवक्ता एस.डी. संजय ने सभी जिलाधिकारियों और लोक अभियोजकों को पत्र लिखकर सरकार के फ़ैसले को लागू करने के निर्देश दिए। पत्र में कहा गया कि सरकार के निर्णय के अनुसार 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे से पहले नीट-यूजी आंदोलन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।

किन जिलों में कितने मामले वापस होंगे?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जिन 64 मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हुई है, उनमें पटना में 27 मामले, सारण में 6 मामले, सीवान में 6 मामले और इसके अलावा अन्य जिलों में दर्ज 15 मामले शामिल हैं। इन मामलों को अदालत के माध्यम से वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

पुलिस ने क्या कहा?

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बिहार पुलिस ने साफ़ किया है कि सरकार केवल वे मामले वापस ले रही है, जो पुलिस अधिकारियों द्वारा दर्ज कराए गए थे। यदि किसी निजी व्यक्ति ने अलग से शिकायत या एफआईआर दर्ज कराई है तो वे मामले स्वतः वापस नहीं होंगे और उनकी कानूनी प्रक्रिया अलग रहेगी।

सरकार जिन मामलों को वापस ले रही है, उनमें किशनगंज निवासी सदाक़त का मामला भी शामिल है। सदाक़त का दावा था कि आंदोलन के दौरान वह रूस में रह रहा था, लेकिन उसके खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया था।

सीवान हिंसा के 21 मामलों में कार्रवाई जारी

हालाँकि सभी प्रदर्शनकारियों को राहत नहीं मिली है। बिहार पुलिस का कहना है कि सीवान हिंसा में शामिल 21 लोगों के खिलाफ मुकदमे वापस नहीं लिए जाएंगे। सीवान पुलिस ने इन लोगों की सूची भी जारी की है।

पुलिस का दावा है कि इन लोगों के खिलाफ वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। कई आरोपियों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है। इनका छात्र आंदोलन से कोई संबंध नहीं है। सीवान के पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा भी आंदोलन के दौरान घायल हुए थे। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, 'जिन लोगों का आपराधिक इतिहास है और जिनके खिलाफ पर्याप्त वीडियो एवं अन्य सबूत हैं, उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा। उनका छात्र आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है।'

विपक्ष ने उठाए सवाल

दूसरी ओर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि कई गिरफ्तारियां मनमाने ढंग से की गईं और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी एआईएसए के कई कार्यकर्ता अब भी जेल में हैं।
पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक सभी छात्र कार्यकर्ताओं को रिहा नहीं किया जाता, तब तक सरकार के दावों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता।

सीजेपी की आंदोलन की चेतावनी

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी ने एक दिन पहले ही सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। संगठन ने कहा है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं ली गईं और छात्रों को पुलिस द्वारा परेशान किया जाता रहा, तो वह जल्द ही देशभर में नया आंदोलन शुरू करेगा। सीजेपी का कहना है कि उसने 25 जुलाई को केंद्र सरकार के आश्वासन पर ही अपना आंदोलन समाप्त किया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जताई चिंता

सीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर भी चिंता जताई है, जिसमें सरकारों को पहले से दर्ज मामलों की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है। संगठन का कहना है कि इस आदेश का गलत इस्तेमाल कर छात्रों को लंबे समय तक कानूनी मामलों में उलझाया जा सकता है।
सीजेपी का दावा है कि 25 जुलाई को केंद्र सरकार ने भरोसा दिया था कि सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी, किसी भी छात्र के खिलाफ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं होगी और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को किसी प्रकार से परेशान नहीं किया जाएगा।

'सरकार अपना वादा निभाए'

सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने मंगलवार को कहा था, 'सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का राजनीतिकरण नहीं किया जा सकता। अदालत के आदेशों का इस्तेमाल छात्रों को निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। देश के सामने सरकार ने जो वादा किया था, उसका सम्मान होना चाहिए। सभी एफआईआर वापस ली जानी चाहिए।'

बिहार सरकार ने बड़ी संख्या में मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन सीवान हिंसा से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रखने का फैसला नई बहस को जन्म दे सकता है। एक ओर सरकार का कहना है कि केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत दी जा रही है, जबकि हिंसा में शामिल लोगों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। वहीं सीजेपी और विपक्षी दलों का आरोप है कि अब भी कई छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में यदि सभी मामलों पर सहमति नहीं बनती, तो छात्र आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर तेज हो सकता है।