बिहार में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन संशोधन (Bihar SIR) को लेकर न केवल विपक्ष, बल्कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी चिंता में है। विपक्ष ने मतदाता सूची में "बड़े पैमाने पर वोट छिनने" और "चुनाव आयोग की जल्दबाजी" पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी को भी लगता है कि इस मुद्दे पर विपक्ष ने नैरेटिव को अपने पक्ष में कर लिया है। इस स्थिति को देखते हुए, बीजेपी ने मतदाताओं के बीच जागरूकता फैलाने और उनके समर्थकों को मतदाता सूची में नामांकन प्रक्रिया में मदद करने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करने का फैसला किया है।
बिहार बीजेपी के संगठन सचिव भिखु भाई दलसानिया ने 26 राज्य कार्यकर्ताओं के साथ सोमवार को एक बैठक की थी। जिसमें उन्हें पूरे राज्य में फैलकर मतदाताओं से मिलने, उनकी आशंकाओं को दूर करने और नामांकन प्रक्रिया में सहायता करने के निर्देश दिए गए। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी इस बात से चिंतित है कि विपक्ष ने बूथ स्तर पर अधिक सक्रियता दिखाई है और बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) की संख्या बढ़ाने में भी वह बीजेपी से आगे निकल गया है।

विपक्ष की सक्रियता और बीजेपी की चुनौती 

25 जून से 2 जुलाई के बीच, चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में सभी दलों के बीएलए की संख्या में 13% की वृद्धि हुई। विपक्षी इंडिया गठबंधन (जिसमें आरजेडी, कांग्रेस और वामपंथी दल शामिल हैं) ने अपने बीएलए की संख्या 56,038 से बढ़ाकर 65,853 कर ली, जो 17.51% की वृद्धि है। विशेष रूप से, कांग्रेस ने अपनी बीएलए संख्या को 8,586 से बढ़ाकर 16,500 कर लिया, जो 92.17% की भारी छलांग है। दूसरी ओर, एनडीए (बीजेपी और जेडी(यू) के नेतृत्व में) में बीएलए की संख्या केवल 10.86% बढ़ी, जो 80,083 से 88,781 हो गई। बीजेपी ने इस दौरान केवल 1.39% की वृद्धि के साथ 51,964 से 52,689 बीएलए जोड़े।
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बीजेपी की रणनीति और चिंताएँ 

एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने बताया कि दलसानिया की बैठक में मतदाताओं की मुख्य चिंताओं पर चर्चा हुई, विशेष रूप से चुनाव आयोग की जल्दबाजी और प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर। उन्होंने कहा, "लोगों को दूसरा गणना फॉर्म (रसीद) नहीं दिया जा रहा है, और अधिकांश लोगों का कहना है कि उनके फॉर्म अभी तक जमा नहीं किए गए हैं।" बीजेपी के पास 52,000 से अधिक बीएलए होने के बावजूद, पार्टी 73,000 मतदान केंद्रों को पूरी तरह से कवर नहीं कर पाई है, जिसे एक नेता ने "विपक्ष की तुलना में हमारी निष्क्रियता" के रूप में देखा।
नेता ने यह भी बताया कि केवल 30% लोगों ने नामांकन फॉर्म के साथ आवश्यक दस्तावेज जमा किए हैं, जबकि 70%-80% फॉर्म बिना किसी दस्तावेज के जमा हुए हैं, जो चुनाव आयोग द्वारा तय 11 दस्तावेजों में से किसी एक की गैरमौजूदगी को बताता है।

चुनाव आयोग की प्रक्रिया और आगामी कदम 

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को अंतिम रूप देने का जिम्मा इलेक्शन रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स को सौंपा है, जो जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेंगे। बीजेपी चाहती है कि उसके बीएलए इस प्रक्रिया में अंत तक शामिल रहें। 1 अगस्त के बाद, जब पूरक दस्तावेज अपलोड करने की समय सीमा शुरू होगी, यह प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। पिछले सप्ताहांत, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. संतोष बिहार में थे और उन्होंने राजगीर और मुजफ्फरपुर में शीर्ष स्तर की बैठकों में हिस्सा लिया। बीजेपी का मानना है कि विपक्ष द्वारा उठाए गए "वोट छिनने" के आरोपों का जवाब देने और मतदाताओं का भरोसा जीतने के लिए सक्रिय कदम उठाने की जरूरत है।

बीजेपी डरी क्यों

दरअसल, वरिष्ठ टीवी पत्रकार अजीत अंजुम और बिहार के कुछ अन्य पत्रकारों ने चुनाव आयोग की धांधली के वीडियो बनाकर सारी प्रक्रिया की पोल खोल दी। अजीत अंजुम बिहार के कई कस्बों, गांवों में पहुंचे और वहां से दिखाया कि बीएलओ सिर्फ खानापूरी कर रहे हैं। कई फॉर्मों में उनके सिर्फ हस्ताक्षर थे। फॉर्म पर मतदाता की पूरी जानकारी नहीं थी। कई क्षेत्र विशेष के मतदाताओं को विदेशी बताकर उनके नाम मतदाता सूची से उड़ाए जा रहे थे। कुछ पत्रकारों की सक्रियता ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया। चुनाव आयोग अभी तक अजीत अंजुम की एक भी वीडियो रिपोर्ट का खंडन नहीं कर पाया है। अलबत्ता उनके खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज कराई गई है।

तेजस्वी ने कहा अघोषित आपातकाल

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ईसीआई पर फिर हमला करते हुए कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में लगातार सामने आ रही धांधली, गड़बड़ी, लगातार बदलते नियम और विपक्ष तथा मतदाताओं द्वारा उठाए जा रहे सवालों के प्रति चुनाव आयोग बिल्कुल बेपरवाह है। चुनाव आयोग चाहता है कि वह गड़बड़ी करते जाए और उन पर कोई उंगली भी ना उठाए! वरिष्ठ अजीत अंजुम जी ने वही किया जो एक निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकार को मतदाताओं के मताधिकार से जुड़े लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर तुरंत करना चाहिए था। 
तेजस्वी ने एक्स पर अजीत अंजुम का वीडियो शेयर करते हुए लिखा है- जब मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया (SIR) में जानबूझकर की जा रही गड़बड़ी और खानापूर्ति को लेकर स्वाभाविक प्रश्न किया गया तो चोरी पकड़े जाने पर चुनाव आयोग ने किस नैतिक अधिकार के तहत अजीत अंजुम जी पर FIR दर्ज करवाया? एक वरिष्ठ निष्पक्ष पत्रकार पर नीतीश सरकार द्वारा FIR करना घोर निंदनीय है। देश में अघोषित आपातकाल लागू है और इस सरकार में जो सरकार अथवा उसका एजेंडा लागू कर एजेंसी या संगठन की आलोचना करेगा, तानाशाही मोदी सरकार उसे नहीं छोड़ेगी और हर संभव तरीके से उसे प्रताड़ित करेगी। अपने आप को गांधीवादी, समाजवादी और लोकतांत्रिक मुख्यमंत्री अचेत अवस्था में है। बीजेपी के हाथ में सारा सिस्टम है। वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम जी ने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिसके लिए उन पर FIR दर्ज किया जाए। मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर जो आम जनता के प्रश्न हैं, उन प्रश्नों का सीधा संबंध भारतीय लोकतंत्र की गरिमा और स्वास्थ्य से है।
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बहरहाल, बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची संशोधन को लेकर चल रही बहस और आशंकाओं के बीच, बीजेपी अब अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुट गई है। पार्टी का लक्ष्य है कि वह मतदाताओं के बीच जाकर उनकी शंकाओं को दूर करे और यह सुनिश्चित करे कि उसके समर्थकों का नाम मतदाता सूची में शामिल हो। इस बीच, विपक्ष की सक्रियता और चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल बीजेपी के लिए चुनौती बने हुए हैं।