दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन का असर बिहार में दिखा। पटना समेत कई जिलों में छात्रों ने पेपर लीक, NTA और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। पटना से समी अहमद की रिपोर्ट।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर पटना में प्रदर्शन।
दिल्ली में नौजवानों के आंदोलन की गूंज बिहार में भी है। जिस पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर मंतर पर इतना बड़ा आंदोलन हो रहा है, बिहार के छात्र बड़े पैमाने पर उसके भुक्तभोगी रहे हैं। बिहार को आंदोलन की धरती माना जाता है और जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से निकले प्रमुख छात्र नेताओं जैसे लालू प्रसाद, नीतीश कुमार और दिवंगत सुशील कुमार मोदी का बिहार की राजनीति में तीन दशकों से अधिक समय तक दबदबा रहा है।
30 जुलाई को पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव भी होना है और समझा जाता है कि इस आंदोलन का कुछ न कुछ असर होगा। ध्यान रहे कि यह सीट परंपरागत रूप से भारतीय जनता पार्टी की मानी जाती है और पिछले तीन दशकों से पिता-पुत्र की जोड़ी यहाँ से विधायक बनते आई है। भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने जब इस सीट से इस्तीफा दिया तो यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। इस चुनाव में सबसे चर्चित नाम प्रशांत किशोर का है जबकि भारत की जनता पार्टी ने अपने पहले उम्मीदवार का नाम वापस लेकर दूसरे को टिकट दिया है।
बिहार में भी लगातार पेपर लीक
नीट के अलावा बिहार में सिपाही भर्ती और दूसरी कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की जांच चल रही है। सोमवार को ही बिहार सरकार ने पेपर लीक के मामले में कानून लाने की घोषणा की है। समझा जाता है कि यह भी छात्रों के आक्रोश को कम करने का एक उपाय है। बिहार में पेपर लीक के अलावा दूसरे के नाम पर स्कॉलर को इम्तिहान में शामिल करने की धांधली की भी बड़े पैमाने पर शिकायत रहती है।
इस पृष्ठभूमि में दिल्ली के आंदोलन का असर बिहार के छात्रों पर भी है जिन्होंने विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन किया है और विपक्ष के नेताओं पर भी जिन्होंने विधानमंडल में अपनी आवाज़ बुलंद की है। बिहार में छात्र नेताओं का कहना है कि जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन केवल पेपर लीक के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त संस्थागत भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक व्यापक लोकतांत्रिक संघर्ष है।
बिहार में छात्रों का यह आंदोलन विशेष तौर पर उन शहरों में ज्यादा देखने को मिला जहाँ विश्वविद्यालय के मुख्यालय हैं। जिन जगहों में प्रदर्शन हुए और मार्च निकाले गए उनमें पटना, जहानाबाद, भोजपुर, सीवान, छपरा, दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, गया, रोहतास, जमुई और बेगूसराय सहित बिहार के कई जिले शामिल थे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
पटना विश्वविद्यालय में छात्रों ने पेपर लीक, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में चल रहे भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन किया। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ-साथ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को खत्म करने और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की। विद्यार्थियों के संगठन ‘आइसा’ ने पटना कॉलेज में आक्रोश दिवस के तहत पोस्टर प्रदर्शनी लगाई, गीत गाए और सभा का आयोजन किया। छात्र नेताओं का कहना है कि बिहार के छात्र दिल्ली के आंदोलन को ध्यान से देख रहे हैं। आइसा के अलावा एनएसयूआई और अन्य छात्र-युवा संगठनों ने भी आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन किए।
मगध विश्वविद्यालय के मुख्यालय बोधगया में विभिन्न छात्र संगठनों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की प्रतीकात्मक अर्थी यात्रा निकाल कर दाह संस्कार किया और उनके इस्तीफे की मांग की। यहां प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि लगातार पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ के खिलाफ युवा सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिए गए हैं। उनका यह भी कहना था कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तब तक आंदोलन चलता रहेगा।भागलपुुर में विरोध मार्च
भागलपुर में छात्र-छात्राओं ने दिल्ली के आंदोलन के समर्थन में विरोध मार्च निकाला और कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में युवाओं की आवास को दबाने की कोशिश की जा रही है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुजफ्फरपुर में भी दिल्ली में आयोजित संसद मार्च के दौरान लाठी चार्ज के खिलाफ आक्रोश दिवस मनाया गया। यहाँ के प्रतिष्ठित एलएस कॉलेज में छात्रों ने कहा कि मार्च पर लाठी चार्ज लोकतंत्र की हार है।
इधर, बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को विपक्ष के विधायकों और विधान पार्षदों ने दिल्ली में जेन जी और दूसरे छात्रों-नौजवानों के प्रदर्शन के समर्थन में मार्च किया। इस मार्च में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव तो नहीं थे लेकिन राजद के वरिष्ठ नेता भाई वीरेंद्र शामिल थे। उनके अलावा कांग्रेस, भाकपा (माले) इंक्लूसिव इंडियन पार्टी और एआईएमईएम के विधायक शामिल थे।
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद राजद के आलोक मेहता ने नीट पेपर लीक का मुद्दा उठाना चाहा लेकिन विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने उन्हें करने से रोक दिया। राजद के विधान पार्षद सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि 12 साल में 152 बार पेपर लीक हुए हैं। राजद के विधायक और विधान पार्षद हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विधानमंडल पहुंचे थे। उन्होंने पेपर लीक के अलावा कुछ छात्र-छात्राओं द्वारा आत्महत्या की घटनाओं को गंभीर मुद्दा बताया और राष्ट्रीय जांच एजेंसी- एनटीए को भंग करने की मांग के साथ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की।इधर, भाकपा (माले) के राज्य सचिव कुणाल का कहना है कि बीजेपी सरकार पेपर लीक का पर्याय बन गई है। उन्होंने कहा कि बिहार में भी लगातार पेपर लीक हो रहे हैं और परीक्षाओं में अनियमितता हो रही हैं। हाल ही में बिहार में एईडीओ परीक्षा के पेपर लीक हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक पर भाजपा कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती है बल्कि उल्टा ब्लैक लिस्टेड कंपनियों को परीक्षा आयोजित करवाने का ठेका दे देती है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की विफलताएँ और शिक्षा के बढ़ते व्यापारीकरण ने करोड़ों छात्रों के भविष्य को असुरक्षित बना दिया है।
भाकपा (माले) नेता ने कहा कि जब दिल्ली में छात्र जब शांतिपूर्वक और लोकतांत्रिक तरीके से पार्लियामेंट मार्च कर रहे थे तब पुलिस ने उन पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया है। इसकी निंदा करते हुए माले ने कहा कि लाठीचार्ज ने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्र विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है।