बिहार के जमुई में 10वीं कक्षा की छात्रा से छेड़छाड़ मामले में अब बिहार की मंत्री और जमुई से बीजेपी विधायक श्रेयसी सिंह का विवादास्पद बयान आया है। उन्होंने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि ‘मॉरल पुलिसिंग’ ज्यादा ‘डिसेंट और एलिगेंट’ तरीके से की जा सकती है। बाद में उन्होंने साफ़ किया कि जिस तरह दोनों बच्चों के साथ व्यवहार किया गया, वह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। विपक्ष ने कहा है कि किसी नाबालिग लड़की और लड़के को रोकना, उनके साथ मारपीट या यौन दुर्व्यवहार करना किसी भी तरह की ‘मॉरल पुलिसिंग’ के नाम पर सही नहीं ठहराया जा सकता है।

श्रेयसी सिंह के बयान पर आम आदमी पार्टी ने कहा है कि बीजेपी अपने नेताओं को किस तरह की राजनीतिक ट्रेनिंग देती है कि वे अपनी सरकार को बचाने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं और ऐसी हरकतों का बेशर्मी से बचाव करते हैं?" श्रेयसी सिंह के बयान पर हमला करते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, "तो, अब आगे क्या? 'क्या रेप तब तक ठीक हैं जब तक वे 'सभ्य और शालीन' हों- और हिंसक न हों?'" 

विपक्षी नेताओं का यह बयान तब आया है जब जमुई की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रेयसी सिंह ने एक टीवी कार्यक्रम में कहा था कि लोगों को इस बात पर अपनी राय रखने का अधिकार हो सकता है कि कोई व्यक्ति अपनी जिंदगी कैसे जीता है, लेकिन अपनी राय जाहिर करने के बेहतर तरीके होने चाहिए। उन्होंने कहा था कि ‘मॉरल पुलिसिंग’ ज्यादा ‘डिसेंट और एलिगेंट’ तरीके से की जा सकती है। मंत्री ने वायरल वीडियो को भी चिंताजनक बताया और कहा कि वह यह समझ नहीं पा रही हैं कि स्थानीय समुदाय के लोग समाज के ही दो बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे कर सकते हैं।
ताज़ा ख़बरें

‘मॉरल पुलिसिंग’ पर ही क्यों उठा सवाल?

श्रेयसी सिंह के बयान का विवाद उस शब्द को लेकर है जिसमें उन्होंने ‘मॉरल पुलिसिंग’ इस्तेमाल किया। मामले में सामने आए वीडियो के अनुसार, कुछ लोगों की भीड़ ने दो नाबालिगों को रास्ते में रोका और उनके साथ बदसलूकी की। पुलिस ने मामले में पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है। पुलिस के मुताबिक वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने श्रेयसी सिंह के बयान पर सवाल उठाया और कहा कि किसी व्यक्ति की ज़िंदगी में मौखिक, शारीरिक, भावनात्मक या मानसिक दखल सिर्फ इसलिए स्वीकार्य नहीं हो जाता क्योंकि उसे ‘डिसेंट’ या ‘एलिगेंट’ तरीके से किया गया हो।

खेड़ा ने कहा, "यह वाकई एक बड़ी बात है। बिहार सरकार में जमुई से विधायक और खेल मंत्री, श्रेयसी सिंह कहती हैं: 'नैतिकता के नाम पर मॉरल पुलिसिंग सभ्य और शालीन तरीके से की जा सकती है। लेकिन जिस तरह से उन्होंने लड़के और लड़की के साथ बदसलूकी और बुरा बर्ताव किया, वह बिल्कुल भी बर्दाश्त करने लायक नहीं है।' तो, अब आगे क्या? 'क्या रेप तब तक ठीक हैं जब तक वे 'सभ्य और शालीन' हों- और हिंसक न हों?'"
पवन खेड़ा ने आगे कहा, "किसी के निजी दायरे में दखल- चाहे वह ज़बानी, शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक या आध्यात्मिक हो - सिर्फ़ इसलिए स्वीकार्य नहीं हो जाता कि वह 'सभ्यता' या 'शालीनता' से किया गया है। समस्या दखल देने के तरीके की नहीं है। समस्या खुद दखल देने की है।" कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी मंत्री के बयान पर आपत्ति जताई इस इस बयान को शर्मनाक बताया।

आप ने पूछा- ‘बीजेपी में कैसी राजनीतिक ट्रेनिंग?’

आम आदमी पार्टी ने भी श्रेयसी सिंह के बयान को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। आप ने आरोप लगाया कि एक महिला विधायक नाबालिग से कथित बदसलूकी करने वालों की ‘मॉरल पुलिसिंग’ के नाम पर पैरवी कर रही हैं और सवाल किया कि बीजेपी अपने नेताओं को किस तरह की राजनीतिक ट्रेनिंग देती है।
आप ने एक पोस्ट में कहा, "एक महिला विधायक असल में उस हरकत को सही ठहरा रही हैं जो गुंडों ने एक नाबालिग के साथ की। बिहार के जमुई में एक नाबालिग लड़की के साथ हुई भयानक घटना के बाद, जमुई से बीजेपी विधायक श्रेयसी सिंह 'मॉरल पुलिसिंग' का बचाव करते हुए कह रही हैं कि इसे 'सलीके से' किया जा सकता है। बीजेपी अपने नेताओं को किस तरह की राजनीतिक ट्रेनिंग देती है कि वे अपनी सरकार को बचाने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं और ऐसी हरकतों का बेशर्मी से बचाव करते हैं?"
इसने आगे कहा, "राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी नेता रेप करने वालों का बचाव करते हैं, जबकि राज्य स्तर पर उनके नेता नाबालिगों के साथ छेड़छाड़ के आरोपियों का खुलेआम बचाव करते हैं। और ज़ाहिर है, डरपोक और बेशर्म पीएम मोदी ऐसे भयानक मुद्दे और घटना पर चुप ही रहेंगे क्योंकि उनके लिए भी यह बस एक और 'छुट-पुट घटना' है, ठीक वैसे ही जैसे उनके एनडीए नेताओं के लिए है, जो इसे ज़ोर-शोर से और गर्व के साथ कह रहे हैं। आपको शर्म आनी चाहिए।"

मॉरल पुलिसिंग का मामला क्या है?

पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घटना 19 सितंबर की शाम की है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग लड़की अपने नाबालिग पुरुष मित्र के साथ कोचिंग के बाद दोपहिया वाहन से निकली थी। दोनों जमुई के बाहरी इलाके में एक पहाड़ी क्षेत्र की ओर गए थे। पुलिस के अनुसार, लौटने के दौरान कुछ लोगों ने दोनों को रोका और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी की। घटना का वीडियो बनाया गया और बाद में वह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। तीखी प्रतिक्रिया होने पर पुलिस ने वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू की और एसआईटी का गठन किया गया। पुलिस के अनुसार, वीडियो से करीब सात लोगों की पहचान की गई है।

मुख्य आरोपी नंदन यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल

मामले में मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक़ मुख्य आरोपी नंदन यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ है। उसके पैर में गोली लगी और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें
एक अन्य आरोपी हरे राम यादव के भी इस कार्रवाई में घायल होने की खबर है। हालाँकि शुरुआती रिपोर्टों में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। पुलिस की कार्रवाई और मामले में सभी आरोपियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।

पुलिस ने कितने आरोपियों की पहचान की?

जमुई पुलिस के अनुसार वायरल वीडियो से करीब सात संदिग्धों की पहचान की गई है। शुरुआती कार्रवाई में तीन लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी और बाकी आरोपियों की तलाश के लिए छापेमारी चल रही थी। बाद में मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किए जाने की खबर आई। पुलिस ने मामले में पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। मामले की जांच एसआईटी कर रही है।
बिहार से और खबरें

वायरल वीडियो शेयर करने वालों पर भी कार्रवाई

मामले में पुलिस ने सिर्फ आरोपियों की तलाश तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने को लेकर भी पुलिस ने क़दम उठाया है।

रिपोर्टों के अनुसार, बिहार पुलिस ने ऐसे क़रीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिनसे वीडियो शेयर किया गया था। पुलिस ने कहा है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना गंभीर मामला है और वीडियो को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। नाबालिग पीड़िता की निजता की रक्षा के लिहाज से वीडियो को आगे साझा नहीं करने की अपील भी की गई है।